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जालौनः बालिकाओं के प्रति बदल रही समाज की सोच
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काव्य गोष्ठी में काव्य पाठ करती कवित्री मौजूद कवि
- फोटो : ORAI
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। साहित्यिक संस्था संवेदना साहित्य समिति के तत्वावधान में काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें स्थानीय कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं का पाठ किया। वहीं दो साहित्यकारों को स्मृति चिंह्न देकर सम्मानित किया गया।
समिति की अध्यक्ष डा. माया सिंह के राजेंद्रनगर स्थित आवास पर रविवार को काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की वाणी वंदना से कवियत्री प्रज्ञा श्रीवास्तव दिव्यम ने किया। उन्होंने सुनाया-नहीं अभिशाप हरगिज ईश का वरदान है बेटी, वतन का मान है, अभिभान है और सम्मान है बेटी।
कवि रामशंकर गौर ने पढ़ा-ममता प्यार दुलार हैं बेटियां, ईश्वर का उपहार है बेटियां। डा. महेश पांडेय बजरंग ने सुनाया-बेटी घर की शान, बेटी घर की पहचान है। कवि सिद्धार्थ त्रिपाठी ने काव्य पाठ करते हुए कहा कि कभी कभी जब कृपा भाव से शब्द सहारा देे देते है, कविता की पावन सरिता में अपना कलम धो लेते हैं। सुरेश चंद्र त्रिपाठी ने सुनाया-बेटी बोझ नहीं सम्मान है। गीता और कुरान है। संस्था के पदाधिकारियों ने साहित्यकार विमल पांडेय और सिद्धार्थ त्रिपाठी को सामाजिक संवेदनाओं और उत्कृष्ट कार्यशैली के लिए स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लाखन सिंह कुशवाहा रहे। अध्यक्षता यज्ञदत्त त्रिपाठी ने की। इस दौरान रविशंकर मिश्रा, मणींद्र शर्मा, जगरुप सिंह, डा. इंदिरा उस्मानी, जेपी सिंह, दयाराम, गौरव चतुर्वेदी आदि रहे।
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बालिकाओं के प्रति बदल रही समाज की सोच
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर रविवार को जन जागरूकता के कार्यक्रम आयोजित हुए। इस दौरान गोष्ठियां हुई जिनमें बालिकाओं का उत्साहवर्धन किया गया और महिलाओं व बच्चों के उत्थान के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में बताया गया।
जालौन ब्लाक में भिटारा स्थित बीआरसी पर आयोजित कार्यक्रम में सीडीपीओ अंकिता वर्मा, महिला शक्ति केंद्र की समन्वयक प्रियंका द्विवेदी और बाल संरक्षण अधिकारी जूली खातून ने संबोधित करते कहा कि कन्या भ्रूण हत्या जैसी कलंकपूर्ण कुरीतियों का अंत हो चला है। बेटियां पढ़ लिखकर दो परिवारों का नाम रोशन करती हैं। समाज अपने अनुभवों से आज इस बात को बखूबी महसूस कर रहा है। इसलिए लोगों की सोच में बदलाव आया है।
चाइल्ड लाइन कोआर्डिनेटर शिवमंगल सिंह ने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह 18 वर्ष से कम उम्र के मुसीबत में फंसे बच्चों की मदद के लिए 24 घंटे काम करने वाली फोन सेवा है। जालौन ब्लाक में ही मड़ोरा स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में भी गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसे महिला थानाध्यक्ष नीलेश कुमारी, डा.ममता स्वर्णकार, राजकुमारी,प्रवीना यादव आदि ने 24 घंटे संचालित 181 महिला हेल्प लाइन, 181 रेस्क्यू वैन, महिला पुलिस रिपोर्टिंग, पीड़ित महिलाओं को निशुल्क परामर्श और विधिक सहायता आदि के बारे में बताया। इस दौरान बालिकाओं को प्रोत्साहित करने के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के स्लोगन की पट्टिका पहनाई गई और उन्हें किट भी दी गई।
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उरई। साहित्यिक संस्था संवेदना साहित्य समिति के तत्वावधान में काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें स्थानीय कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं का पाठ किया। वहीं दो साहित्यकारों को स्मृति चिंह्न देकर सम्मानित किया गया।
समिति की अध्यक्ष डा. माया सिंह के राजेंद्रनगर स्थित आवास पर रविवार को काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की वाणी वंदना से कवियत्री प्रज्ञा श्रीवास्तव दिव्यम ने किया। उन्होंने सुनाया-नहीं अभिशाप हरगिज ईश का वरदान है बेटी, वतन का मान है, अभिभान है और सम्मान है बेटी।
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कवि रामशंकर गौर ने पढ़ा-ममता प्यार दुलार हैं बेटियां, ईश्वर का उपहार है बेटियां। डा. महेश पांडेय बजरंग ने सुनाया-बेटी घर की शान, बेटी घर की पहचान है। कवि सिद्धार्थ त्रिपाठी ने काव्य पाठ करते हुए कहा कि कभी कभी जब कृपा भाव से शब्द सहारा देे देते है, कविता की पावन सरिता में अपना कलम धो लेते हैं। सुरेश चंद्र त्रिपाठी ने सुनाया-बेटी बोझ नहीं सम्मान है। गीता और कुरान है। संस्था के पदाधिकारियों ने साहित्यकार विमल पांडेय और सिद्धार्थ त्रिपाठी को सामाजिक संवेदनाओं और उत्कृष्ट कार्यशैली के लिए स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लाखन सिंह कुशवाहा रहे। अध्यक्षता यज्ञदत्त त्रिपाठी ने की। इस दौरान रविशंकर मिश्रा, मणींद्र शर्मा, जगरुप सिंह, डा. इंदिरा उस्मानी, जेपी सिंह, दयाराम, गौरव चतुर्वेदी आदि रहे।
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बालिकाओं के प्रति बदल रही समाज की सोच
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर रविवार को जन जागरूकता के कार्यक्रम आयोजित हुए। इस दौरान गोष्ठियां हुई जिनमें बालिकाओं का उत्साहवर्धन किया गया और महिलाओं व बच्चों के उत्थान के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में बताया गया।
जालौन ब्लाक में भिटारा स्थित बीआरसी पर आयोजित कार्यक्रम में सीडीपीओ अंकिता वर्मा, महिला शक्ति केंद्र की समन्वयक प्रियंका द्विवेदी और बाल संरक्षण अधिकारी जूली खातून ने संबोधित करते कहा कि कन्या भ्रूण हत्या जैसी कलंकपूर्ण कुरीतियों का अंत हो चला है। बेटियां पढ़ लिखकर दो परिवारों का नाम रोशन करती हैं। समाज अपने अनुभवों से आज इस बात को बखूबी महसूस कर रहा है। इसलिए लोगों की सोच में बदलाव आया है।
चाइल्ड लाइन कोआर्डिनेटर शिवमंगल सिंह ने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह 18 वर्ष से कम उम्र के मुसीबत में फंसे बच्चों की मदद के लिए 24 घंटे काम करने वाली फोन सेवा है। जालौन ब्लाक में ही मड़ोरा स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में भी गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसे महिला थानाध्यक्ष नीलेश कुमारी, डा.ममता स्वर्णकार, राजकुमारी,प्रवीना यादव आदि ने 24 घंटे संचालित 181 महिला हेल्प लाइन, 181 रेस्क्यू वैन, महिला पुलिस रिपोर्टिंग, पीड़ित महिलाओं को निशुल्क परामर्श और विधिक सहायता आदि के बारे में बताया। इस दौरान बालिकाओं को प्रोत्साहित करने के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के स्लोगन की पट्टिका पहनाई गई और उन्हें किट भी दी गई।