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नुकसान के आकलन का तरीका दोषपूर्ण
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Tue, 14 Jun 2016 11:33 PM IST
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एसडीएम को ज्ञापन देते भाकियू कार्यकर्ता
- फोटो : अमर उजाला
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भारतीय किसान यूनियन ने सूखे को देखते हुए अनुदान दिए जाने के आधार को दोषपूर्ण करार दिया है। यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि जिले को सरकार ने सूखाग्रस्त घोषित किया है। रबी की फसल के नुकसान के आकलन के लिए क्रॉप कटिंग का तरीका दोषपूर्ण है। क्राप कटिंग की टीम के साथ अधिकांश गांवों में संबंधित बीमा कंपनी के नुमाइंदों ने जाकर बीमा
कंपनी के पक्ष में रिपोर्टों को प्रभावित किया। यूनियन ने मांग की कि किसानों के व्यापक हित को देखते हुए सही नीति अपनाई जाए। भाकियू के तहसील अध्यक्ष चतुर सिंह पटेल की अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को एसडीएम से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन दिया। इसमें किसानों की समस्याओं को उठाते हुए कहा कि गलत नीतियों के कारण कोई भी गांव पूर्ण रूप
से सूखाग्रस्त नहीं दिखाया जा रहा है। भिन्न-भिन्न गांवों में भिन्न-भिन्न फसलों पर नुकसान दर्शाया गया है। जिन गांवों में क्राप कटिंग हुई ही नहीं है, उन्हें पूर्ण रूप से छोड़ दिया गया है। जिला प्रशासन की इस आधी अधूरी व दोषपूर्ण नीति के कारण जिले का किसान शासन की मंशा के अनुरूप लाभान्वित नहीं हो पा रहा है। चूंकि प्रदेश सरकार के द्वारा पूरी तरह से जिले
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में सूखा माना गया है और पिछले दिनों केंद्रीय टीम के सर्वे में भी इसकी पुष्टि हुई है। ऐसे में जिला प्रशासन द्वारा कृषि निवेश वितरण एवं बीमा का लाभ सभी किसानों तक नहीं पहुंचाने की जो नीति अपनाई जा रही है उसमें बदलाव कर सही नीति निर्धारित की जाए। अन्यथा की स्थिति में भाकियू संघर्ष के लिए अपने कदम आगे बढ़ा सकती है। इस दौरान डॉ. केदारनाथ
सिमिरिया, श्यामसुंदर कुंवरपुरा, कुंजविहारी, रामप्रताप पटेल, डॉ. पीडी निरंजन, रामलखन इटा, प्रमोदकुमार, वीरेन्द्र अंडा, मनोहर कैथी, संतकुमार आचार्य, भगवानसिंह कुशवाहा, छुन्ना धनौरा, देवेन्द्र अग्रवाल, सुनीलकुमार पिपरैया आदि मौजूद रहे।
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कंपनी के पक्ष में रिपोर्टों को प्रभावित किया। यूनियन ने मांग की कि किसानों के व्यापक हित को देखते हुए सही नीति अपनाई जाए। भाकियू के तहसील अध्यक्ष चतुर सिंह पटेल की अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को एसडीएम से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन दिया। इसमें किसानों की समस्याओं को उठाते हुए कहा कि गलत नीतियों के कारण कोई भी गांव पूर्ण रूप
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से सूखाग्रस्त नहीं दिखाया जा रहा है। भिन्न-भिन्न गांवों में भिन्न-भिन्न फसलों पर नुकसान दर्शाया गया है। जिन गांवों में क्राप कटिंग हुई ही नहीं है, उन्हें पूर्ण रूप से छोड़ दिया गया है। जिला प्रशासन की इस आधी अधूरी व दोषपूर्ण नीति के कारण जिले का किसान शासन की मंशा के अनुरूप लाभान्वित नहीं हो पा रहा है। चूंकि प्रदेश सरकार के द्वारा पूरी तरह से जिले
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में सूखा माना गया है और पिछले दिनों केंद्रीय टीम के सर्वे में भी इसकी पुष्टि हुई है। ऐसे में जिला प्रशासन द्वारा कृषि निवेश वितरण एवं बीमा का लाभ सभी किसानों तक नहीं पहुंचाने की जो नीति अपनाई जा रही है उसमें बदलाव कर सही नीति निर्धारित की जाए। अन्यथा की स्थिति में भाकियू संघर्ष के लिए अपने कदम आगे बढ़ा सकती है। इस दौरान डॉ. केदारनाथ
सिमिरिया, श्यामसुंदर कुंवरपुरा, कुंजविहारी, रामप्रताप पटेल, डॉ. पीडी निरंजन, रामलखन इटा, प्रमोदकुमार, वीरेन्द्र अंडा, मनोहर कैथी, संतकुमार आचार्य, भगवानसिंह कुशवाहा, छुन्ना धनौरा, देवेन्द्र अग्रवाल, सुनीलकुमार पिपरैया आदि मौजूद रहे।