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चार दिवसीय छठ पूजा पर्व आज से, तैयारियां पूरी
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उरई। सूर्य उपासना, सर्व सुखदाता और आरोग्य सौभाग्य का चार दिवसीय छठ पर्व आठ नवंबर से शुरूहोगा जो 11 नवंबर तक चलेगा। अस्त होते सूर्य देव को पहला अर्घ्य 10 नवंबर को दिया जाएगा। जबकि उगते हुए सूरज को अर्घ्य अगले दिन यानी11 नवंबर को दिया जाएगा। इस पर्व की तैयारी तेज हो गई है।
बिहारी पूर्वांचल छठ पूजा समिति के अध्यक्ष संजय साहनी ने बताया कि लोक आस्था का यह चार दिवसीय छठ पर्व सोमवार को पड़ने वाली चतुर्थी के दिन संयम के साथ शुरू होगा। जिसमें सात्विक भोजन कद्दू और लौकी की सब्जी, चने की दाल और हाथ की चक्की से पीसे गए आटे की रोटियां खाई जाती है। इसे नहाय खाय भी कहा जाता है। इसके अगले दिन पंचमी तिथि को मंगलवार की शाम को स्नान, ध्यान के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं। जो धातु या मिट्टी के नए बर्तनों में बनाया जाता है। प्रसाद के तौर पर गुड़, चावल की खीर खाई जाती है। जिसे अन्य भक्तों को भी वितरित किया जाता है। इसे खरना कहते है। इसके बाद व्रत रखकर बुधवार यानी दस नवंबर को शाम अस्त होते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और सूर्य की पूजा की जाती है। जबकि 11 नवंबर को उगते हुए सूर्य की पूजा के साथ व्रत का समापन होता है। इस व्रत में शुद्धता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। उन्होंने बताया कि उगते और अस्त होते सूरज की पूजा का कार्यक्रम रामकुंड स्थित पार्क में किया जाएगा। इसकी तैयारी की जा रही है। बिहारी और पूर्वांचल समाज के लोग अपने अपने घरों में तैयारियों को अंतिम रुप दे रहे हैं।
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फोटो-15-पिंकी।
व्रत की तैयारी में लगी हूं
पटेलनगर पिंकी कुमारी का कहना है कि छठ मैया का व्रत पूरे विधि विधान के साथ करती हूं। दिवाली के बाद बाजार भी खुल गया है। सामान की भी लगभग पूरी खरीदारी हो गई है। अब घर पर व्रत की तैयारियां कर रही हूं।
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फोटो-बॉबी।
जीवन भर करूंगी मैया का व्रत
पटेलनगर बॉबी कई सालों से छठ मैया का व्रत कर रही हूं। व्रत करने से मन में शांति और आस्था रहती है। मैया से जो भी मांगा है, मैया देती है। इसलिए जब तक जीवित रहूंगी। पूरी श्रद्धा के साथ व्रत को करूंगी।
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बिहारी पूर्वांचल छठ पूजा समिति के अध्यक्ष संजय साहनी ने बताया कि लोक आस्था का यह चार दिवसीय छठ पर्व सोमवार को पड़ने वाली चतुर्थी के दिन संयम के साथ शुरू होगा। जिसमें सात्विक भोजन कद्दू और लौकी की सब्जी, चने की दाल और हाथ की चक्की से पीसे गए आटे की रोटियां खाई जाती है। इसे नहाय खाय भी कहा जाता है। इसके अगले दिन पंचमी तिथि को मंगलवार की शाम को स्नान, ध्यान के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं। जो धातु या मिट्टी के नए बर्तनों में बनाया जाता है। प्रसाद के तौर पर गुड़, चावल की खीर खाई जाती है। जिसे अन्य भक्तों को भी वितरित किया जाता है। इसे खरना कहते है। इसके बाद व्रत रखकर बुधवार यानी दस नवंबर को शाम अस्त होते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और सूर्य की पूजा की जाती है। जबकि 11 नवंबर को उगते हुए सूर्य की पूजा के साथ व्रत का समापन होता है। इस व्रत में शुद्धता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। उन्होंने बताया कि उगते और अस्त होते सूरज की पूजा का कार्यक्रम रामकुंड स्थित पार्क में किया जाएगा। इसकी तैयारी की जा रही है। बिहारी और पूर्वांचल समाज के लोग अपने अपने घरों में तैयारियों को अंतिम रुप दे रहे हैं।
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फोटो-15-पिंकी।
व्रत की तैयारी में लगी हूं
पटेलनगर पिंकी कुमारी का कहना है कि छठ मैया का व्रत पूरे विधि विधान के साथ करती हूं। दिवाली के बाद बाजार भी खुल गया है। सामान की भी लगभग पूरी खरीदारी हो गई है। अब घर पर व्रत की तैयारियां कर रही हूं।
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फोटो-बॉबी।
जीवन भर करूंगी मैया का व्रत
पटेलनगर बॉबी कई सालों से छठ मैया का व्रत कर रही हूं। व्रत करने से मन में शांति और आस्था रहती है। मैया से जो भी मांगा है, मैया देती है। इसलिए जब तक जीवित रहूंगी। पूरी श्रद्धा के साथ व्रत को करूंगी।