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गुरुनानक जयंती पर भजन-कीर्तन
ब्यूरो/ अमर उजाला, उरई
Updated Wed, 25 Nov 2015 10:58 PM IST
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गुरुनानक जयंती बुधवार को राठ रोड स्थित गुरुद्वारा में धूमधाम से मनाई गई।
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इस अवसर पर गुरुद्वारा में भजन, कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम व लंगर का
आयोजन किया गया। बुधवार की सुबह पांच बजे गुरुद्वारा से प्रभातफेरी निकाली
गई। प्रभातफेरी में श्रद्धालु कीर्तन करते चल रहे थे। दोपहर बाद 3 बजे से
गुरुद्वारा में भजन कीर्तन का आयोजन किया गया। इस
मौके पर महिलाएं ..में खड़ी उड़ी कारा की आज मेरा श्याम आएगा भजन गा रही थी, वहीं पुरुष धनगुरु नानक प्रकट हुआ.. कीर्तन कर रहे थे। इस मौके पर समाज के लोगों ने गुरुनानक जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 ईं. वी. में तलवंडी नामक गांव में हुआ था, जो आज ननकाना साहब के नाम से विख्यात हैं। ये अब पाकिस्तान
में है। गुरुनानक देव जी के पिता का नाम महता कालू जी था। जब गुुरुनानक का जन्म हुआ, तब संसार में पाप का अंधकार छाया था। गुरुनानक ने अपने दो शिष्य बाला तथा मर्दाना के साथ भ्रमण करके संसार में मानवता का संदेश दिया। तीन बजे से गुरुद्वारा में लंगर का आयोजन किया गया। जिसमें हजारों श्रृद्धालुओं ने लंगर छका। लंगर का आयोजन देर शाम तक चला। रात्रि 8 बजे से बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रमोें का आयोजन किया गया। इस मौके पर समाज के सैकड़ो लोग मौजूद रहे।
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मौके पर महिलाएं ..में खड़ी उड़ी कारा की आज मेरा श्याम आएगा भजन गा रही थी, वहीं पुरुष धनगुरु नानक प्रकट हुआ.. कीर्तन कर रहे थे। इस मौके पर समाज के लोगों ने गुरुनानक जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 ईं. वी. में तलवंडी नामक गांव में हुआ था, जो आज ननकाना साहब के नाम से विख्यात हैं। ये अब पाकिस्तान
में है। गुरुनानक देव जी के पिता का नाम महता कालू जी था। जब गुुरुनानक का जन्म हुआ, तब संसार में पाप का अंधकार छाया था। गुरुनानक ने अपने दो शिष्य बाला तथा मर्दाना के साथ भ्रमण करके संसार में मानवता का संदेश दिया। तीन बजे से गुरुद्वारा में लंगर का आयोजन किया गया। जिसमें हजारों श्रृद्धालुओं ने लंगर छका। लंगर का आयोजन देर शाम तक चला। रात्रि 8 बजे से बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रमोें का आयोजन किया गया। इस मौके पर समाज के सैकड़ो लोग मौजूद रहे।
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