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सरकारी तंत्र का नहीं कर सकेंगे प्रयोग
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Tue, 10 Jan 2017 10:55 PM IST
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चुनाव
- फोटो : demo pic
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विधानसभा चुनाव के दौरान सत्तारूढ़ दल चाहे वह केंद्र के हों या राज्य के, सरकारी तंत्र का प्रयोग चुनाव प्रचार के लिए नहीं कर सकेंगे। चुनाव आचार संहिता के तहत सत्तारुढ़ दल के मंत्री तक सरकारी विमानों, वाहनों सहित सरकारी तंत्रों और कर्मिर्यों का उपयोग चुनाव प्रचार के लिए नहीं कर सकेंगे। इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी संदीप
कौर ने बताया कि चुनाव आयोग ने सख्त नियम लागू कर दिए हैं। इनकी जानकारी सभी राजनीतिक दलों को पहले ही दी जा चुकी है। नए नियम के अनुसार निर्वाचन सभाओं के आयोजन और निर्वाचन संबंधी प्रचार प्रसार के दौरान कोई भी मंत्री या नेता सरकारी विमान, हेलीपैड, विमान पट्टी आदि का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा सार्वजनिक स्थलों
जैसे मैदानों आदि के प्रयोग तक का अधिकार सत्तारूढ़ दल के पास नहीं होगा। अन्य दलों और उम्मीदवारों को ऐसे स्थानों और सुविधाओं का उपयोग करने की अनुमति उन्हीं शर्तों पर होगी जो सत्तारूढ़ दल के लिए लागू होंगी। कहा कि विश्रामगृहों, डाक बंगलों व अन्य सरकारी आवासों पर भी सत्तारूढ़ दल का एकाधिकार नहीं होगा। कोई भी दल इन आवासाेें या
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इनके परिसरों का इस्तेमाल निर्वाचन अभियान में या सार्वजनिक सभा के लिए नहीं कर सकेगा, न ही इसमें अपना कोई कार्यालय खोल सकेगा। इसके अलावा मंत्री या अन्य प्राधिकारी अपने निधियों से किसी भी तरह के अनुदान के लिए अनुमोदन नहीं कर सकेंगे।
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कौर ने बताया कि चुनाव आयोग ने सख्त नियम लागू कर दिए हैं। इनकी जानकारी सभी राजनीतिक दलों को पहले ही दी जा चुकी है। नए नियम के अनुसार निर्वाचन सभाओं के आयोजन और निर्वाचन संबंधी प्रचार प्रसार के दौरान कोई भी मंत्री या नेता सरकारी विमान, हेलीपैड, विमान पट्टी आदि का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा सार्वजनिक स्थलों
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जैसे मैदानों आदि के प्रयोग तक का अधिकार सत्तारूढ़ दल के पास नहीं होगा। अन्य दलों और उम्मीदवारों को ऐसे स्थानों और सुविधाओं का उपयोग करने की अनुमति उन्हीं शर्तों पर होगी जो सत्तारूढ़ दल के लिए लागू होंगी। कहा कि विश्रामगृहों, डाक बंगलों व अन्य सरकारी आवासों पर भी सत्तारूढ़ दल का एकाधिकार नहीं होगा। कोई भी दल इन आवासाेें या
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इनके परिसरों का इस्तेमाल निर्वाचन अभियान में या सार्वजनिक सभा के लिए नहीं कर सकेगा, न ही इसमें अपना कोई कार्यालय खोल सकेगा। इसके अलावा मंत्री या अन्य प्राधिकारी अपने निधियों से किसी भी तरह के अनुदान के लिए अनुमोदन नहीं कर सकेंगे।