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नवरात्र के लिए मां की मूर्तियां हो रहीं तैयार
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Wed, 28 Sep 2016 11:28 PM IST
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देवी मां की मूर्तियों को अंतिम रूप देने में लगे मूर्तिकार श्याम कुशवाहा
- फोटो : अमर उजाला
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शारदीय नवरात्र में नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में लगने वाली देवी मां के पंडालों में स्थापित होने वाली मां के नौ रूपों की प्रतिमाओं को मूर्तिकार अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं।
नगर के एकमात्र मूर्तिकार श्याम कुशवाहा की मूर्तियां वर्षों से नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित की जाती हैं। जानकार लोग दूर-दूर से यहां मूर्ति लेने आते हैं। मूर्तिकार द्वारा प्रकृति व
पर्यावरण के अनुरूप मूर्तियों को बनाने का कार्य महीनों पहले से प्रारंभ हो जाता है। एक अक्तूबर से प्रारंभ हो रही शारदीय नवरात्र को लेकर तैयारी चल रही है। ऐसे में मूर्तियों को अंतिम रूप देने में मूर्तिकार दिन-रात लगे हुए हैं। मूर्तिकार ने बताया कि इस बार 3 फु ट से लेकर 8 फु ट तक की देवी मां की मूर्तियां तैयार की जा रही हैं। इनकी कोई कीमत निर्धारित नहीं की
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जाती है। भक्त और मूर्तिकार एक न्योछावर तय कर लेते हैं। इसके बाद न्योछावर देकर मूर्तियों को अपने साथ ले जाते हैं। उन्होंने बताया कि इन मूर्तियों को घासफूस, लकड़ी, मिट्टी और कलर से तैयार किया जाता है। इनको तैयार करने में श्याम कुशवाहा तथा उनके साथी दिन रात मेहनत कर रहे हैं। सभी साथियों के सहयोग से मूर्तियों को तैयार किया जा रहा है
जो नवरात्र में नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित पंडाल में विराजमान होंगी। मूर्ति स्थापना के बाद देवी भक्तों द्वारा देवी मां की मूर्तियों का शृंगार भी किया जाएगा। नवरात्र का यह पर्व दशहरा को मूर्ति विसर्जन के बाद समाप्त हो जाता है।
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नगर के एकमात्र मूर्तिकार श्याम कुशवाहा की मूर्तियां वर्षों से नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित की जाती हैं। जानकार लोग दूर-दूर से यहां मूर्ति लेने आते हैं। मूर्तिकार द्वारा प्रकृति व
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पर्यावरण के अनुरूप मूर्तियों को बनाने का कार्य महीनों पहले से प्रारंभ हो जाता है। एक अक्तूबर से प्रारंभ हो रही शारदीय नवरात्र को लेकर तैयारी चल रही है। ऐसे में मूर्तियों को अंतिम रूप देने में मूर्तिकार दिन-रात लगे हुए हैं। मूर्तिकार ने बताया कि इस बार 3 फु ट से लेकर 8 फु ट तक की देवी मां की मूर्तियां तैयार की जा रही हैं। इनकी कोई कीमत निर्धारित नहीं की
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जाती है। भक्त और मूर्तिकार एक न्योछावर तय कर लेते हैं। इसके बाद न्योछावर देकर मूर्तियों को अपने साथ ले जाते हैं। उन्होंने बताया कि इन मूर्तियों को घासफूस, लकड़ी, मिट्टी और कलर से तैयार किया जाता है। इनको तैयार करने में श्याम कुशवाहा तथा उनके साथी दिन रात मेहनत कर रहे हैं। सभी साथियों के सहयोग से मूर्तियों को तैयार किया जा रहा है
जो नवरात्र में नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित पंडाल में विराजमान होंगी। मूर्ति स्थापना के बाद देवी भक्तों द्वारा देवी मां की मूर्तियों का शृंगार भी किया जाएगा। नवरात्र का यह पर्व दशहरा को मूर्ति विसर्जन के बाद समाप्त हो जाता है।