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Jalaun News: हत्या के चार दोषियों को गैंगस्टर में तीन-तीन साल की सजा
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उरई। वर्ष 2012 में हुई हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा पा चुके चार दोषियों को गैंगस्टर एक्ट में भी दोषी करार दिया गया। विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर कोर्ट भारतेंद्र सिंह ने चारों को तीन-तीन वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर प्रत्येक दोषी को सात दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
रामपुरा के सुल्तानपुरा निवासी दीपराज गुर्जर ने रामपुरा थाने में तहरीर देकर बताया था कि आठ मई 2012 को उनके पिता सुखबीर सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में मुनेश दद्दा, जितेंद्र यादव, महेश दोहरे और ज्ञान सिंह दोहरे को आरोपी बनाया गया था। घटना के करीब दो माह बाद चारों ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया था। पुलिस ने विवेचना पूरी कर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।
हत्या के मामले की सुनवाई के बाद वर्ष 2024 में न्यायालय ने चारों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद इन लोगों ने हाईकोर्ट में अपील की, जहां वर्ष 2026 में उन्हें जमानत मिल गई।
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अभियोजन के मुताबिक, आरोपियों के जेल में रहने के दौरान रामपुरा थाने में चंद्रशेखर दुबे की ओर से गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसकी विवेचना माधौगढ़ थाना प्रभारी सुशील कुमार को सौंपी गई। विवेचक ने जांच पूरी कर सात अगस्त 2013 को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था।
गैंगस्टर मामले की सुनवाई के दौरान वादी समेत अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए। गुरुवार को दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर चारों आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
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रामपुरा के सुल्तानपुरा निवासी दीपराज गुर्जर ने रामपुरा थाने में तहरीर देकर बताया था कि आठ मई 2012 को उनके पिता सुखबीर सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में मुनेश दद्दा, जितेंद्र यादव, महेश दोहरे और ज्ञान सिंह दोहरे को आरोपी बनाया गया था। घटना के करीब दो माह बाद चारों ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया था। पुलिस ने विवेचना पूरी कर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।
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हत्या के मामले की सुनवाई के बाद वर्ष 2024 में न्यायालय ने चारों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद इन लोगों ने हाईकोर्ट में अपील की, जहां वर्ष 2026 में उन्हें जमानत मिल गई।
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अभियोजन के मुताबिक, आरोपियों के जेल में रहने के दौरान रामपुरा थाने में चंद्रशेखर दुबे की ओर से गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसकी विवेचना माधौगढ़ थाना प्रभारी सुशील कुमार को सौंपी गई। विवेचक ने जांच पूरी कर सात अगस्त 2013 को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था।
गैंगस्टर मामले की सुनवाई के दौरान वादी समेत अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए। गुरुवार को दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर चारों आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।