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फरहा नाज को जिला पंचायत अध्यक्ष का ताज
ब्यूरो/ अमर उजाला, उरई
Updated Fri, 01 Jan 2016 11:11 PM IST
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर चल रही उठापटक आखिरकार शुक्रवार को समाप्त हो गई। बसपा प्रत्याशी का पर्चा खारिज होने के बाद सपा की घोषित प्रत्याशी फरहा नाज को निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। इस दौरान जिला कलेक्ट्रेट पर काफी गहमागहमी रही। ये पहली बार है जब मुस्लिम महिला को मौका मिला है।
जिले के सभी दलों के दिग्गज वहां जमे रहे। लोगों को उम्मीद थी कि सपा के बागी प्रत्याशी भी गुरुवार को पर्चा लेने के बाद शुक्रवार को जमा करने और अपनी दावेदारी पेश करने आएंगे। पर उनके न आने पर सारी राजनीतिक अटकलें थम र्गइं। शाम पांच बजे तक जिला निर्वाचन अधिकारी ने बसपा प्रत्याशी का पर्चा खारिज कर सपा प्रत्याशी फरहा नाज को विजयी घोषित कर दिया।
शुक्रवार को नामांकन प्रक्रिया सुबह 11 बजे से शुरू हुई। दोपहर करीब पौने दो बजे सबसे पहले एट क्षेत्र की सदस्य रूपम गौतम ने नामांकन दाखिल किया। करीब आधे घंटे बाद बबीना क्षेत्र की सदस्य फरहा नाज ने अपने समर्र्थक, प्रस्तावक एवं पार्टी के वरिष्ठ लोगों के साथ पहुंच कर दो सेटों में नामांकन किया।
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दो नामांकन होने से चुनाव के रोचक होने की चर्चाएं भी जोर पकड़ने लगीं। हालांकि जांच में रूपम का नामांकन पत्र नामांकन फीस जमा न होने से निरस्त हो गया और फरहा नाज निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित घोषित की गई। जैसे ही यह खबर निर्वाचन अधिकारी कक्ष से बाहर आई तो समर्थक व पार्टीजन खुशी से झूम उठे।
शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में 11 बजे से ही चर्चाओं का बाजार गर्म था। राजनीति से ताल्लुक रखने वाले सपा के अंतरकलह के बाद आने वाले परिणामों पर नजर लगाए हुए थे। हर किसी की नजर थी कि नम्रता तिवारी दीक्षित और इच्छा राजा में से कौन पार्टी से अधिकृत प्रत्याशी फरहा नाज के खिलाफ नामांकन करने आएगा।
एक दिन पहले ही दोनों की ओर से नामांकन पत्र खरीद लिया गया था। पार्टी के बागी नेताओं की मान मनौवल भी खूब हुई । इससे कोई भी नामांकन करने नहीं आया। बसपा की रूपम गौतम ने दो बजे के पहले ही रामेंद्र सिंह व रामकुमार गुप्ता के साथ पहुंचकर एक सेट में नामांकन जमा कर दिया।
इसके बाद सपा की फरहा नाज ने दो सेटों में नामांकन किया। उनके साथ में गरौठा विधायक दीप नारायण सिंह यादव, निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष शिशुपाल सिंह यादव पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी, जिलाध्यक्ष धीरेंद्र यादव के अलावा पूर्व जिलाध्यक्ष सोहराब खान, चेयरमैन कालपी कमर अहमद, छुन्ना निरंजन, उमा जखौली के अलावा फरहा के पति अजहर बेग आदि मौजूद रहे। फार्मों की जांच हुई तो रूपम का पर्चा जमानत राशि जमा नहीं करने से निरस्त कर दिया गया।
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जिले के सभी दलों के दिग्गज वहां जमे रहे। लोगों को उम्मीद थी कि सपा के बागी प्रत्याशी भी गुरुवार को पर्चा लेने के बाद शुक्रवार को जमा करने और अपनी दावेदारी पेश करने आएंगे। पर उनके न आने पर सारी राजनीतिक अटकलें थम र्गइं। शाम पांच बजे तक जिला निर्वाचन अधिकारी ने बसपा प्रत्याशी का पर्चा खारिज कर सपा प्रत्याशी फरहा नाज को विजयी घोषित कर दिया।
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शुक्रवार को नामांकन प्रक्रिया सुबह 11 बजे से शुरू हुई। दोपहर करीब पौने दो बजे सबसे पहले एट क्षेत्र की सदस्य रूपम गौतम ने नामांकन दाखिल किया। करीब आधे घंटे बाद बबीना क्षेत्र की सदस्य फरहा नाज ने अपने समर्र्थक, प्रस्तावक एवं पार्टी के वरिष्ठ लोगों के साथ पहुंच कर दो सेटों में नामांकन किया।
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दो नामांकन होने से चुनाव के रोचक होने की चर्चाएं भी जोर पकड़ने लगीं। हालांकि जांच में रूपम का नामांकन पत्र नामांकन फीस जमा न होने से निरस्त हो गया और फरहा नाज निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित घोषित की गई। जैसे ही यह खबर निर्वाचन अधिकारी कक्ष से बाहर आई तो समर्थक व पार्टीजन खुशी से झूम उठे।
शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में 11 बजे से ही चर्चाओं का बाजार गर्म था। राजनीति से ताल्लुक रखने वाले सपा के अंतरकलह के बाद आने वाले परिणामों पर नजर लगाए हुए थे। हर किसी की नजर थी कि नम्रता तिवारी दीक्षित और इच्छा राजा में से कौन पार्टी से अधिकृत प्रत्याशी फरहा नाज के खिलाफ नामांकन करने आएगा।
एक दिन पहले ही दोनों की ओर से नामांकन पत्र खरीद लिया गया था। पार्टी के बागी नेताओं की मान मनौवल भी खूब हुई । इससे कोई भी नामांकन करने नहीं आया। बसपा की रूपम गौतम ने दो बजे के पहले ही रामेंद्र सिंह व रामकुमार गुप्ता के साथ पहुंचकर एक सेट में नामांकन जमा कर दिया।
इसके बाद सपा की फरहा नाज ने दो सेटों में नामांकन किया। उनके साथ में गरौठा विधायक दीप नारायण सिंह यादव, निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष शिशुपाल सिंह यादव पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी, जिलाध्यक्ष धीरेंद्र यादव के अलावा पूर्व जिलाध्यक्ष सोहराब खान, चेयरमैन कालपी कमर अहमद, छुन्ना निरंजन, उमा जखौली के अलावा फरहा के पति अजहर बेग आदि मौजूद रहे। फार्मों की जांच हुई तो रूपम का पर्चा जमानत राशि जमा नहीं करने से निरस्त कर दिया गया।