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शीत लहर भी न खोल सकी रैन बसेरा के ताले

Sun, 12 Jan 2020 01:15 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jan 2020 01:15 AM IST
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Even cold wave could not open the lock of rain shelter
राज नारायण - फोटो : ORAI
कालपी (जालौन)। शीत लहर के वक्त भी तहसील स्थित रैन बसेरा में ताला पड़ा है। यूं तो यह ताला बीते कई सालों से पड़ा है पर बीते वर्ष जब तत्कालीन एसडीएम सुनील कुमार को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने तत्काल रैन बसेरा खुलवाने के लिए न सिर्फ उसका निरीक्षण ही किया बल्कि कागजी कार्रवाई कराकर उसे चालू कराने का भी प्रयास किया, कुुछ दिन साफ सफाई भी हुई फिर ताला लगा दिया गया, लोगों को लगा कि शायद कोई नेता व अधिकारी फीता काटने आएगा तो रैन बसेरा चालू हो जाएगा पर साल 2019 इसी पूरे इंतजार में बीत गया। साल 2020 की शुरुआत से ही कड़ाके की शीत लहर चल रही है लेकिन यह ठंडी हवाएं भी अभी तक रैन बसेरा का ताला नहीं खोल सकी हैं।
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बता दें कि लगभग दो दशक पूर्व पर्यटन विभाग की ओर से तहसील परिसर में लगभग बीस लाख रुपये की लागत से दो मंजिला रैन बसेरा स्थापित किया गया था। जिसमें बेसहारा लोगों के लिए कमरे, बिस्तर, टायलेट आदि की सारी सुविधा भी उपलब्ध है। नहीं है तो देखरेख करने वाले कर्मचारी। जिनकी कमी से रैन बसेरा लोगों को सुविधा नहीं दे पा रहा है। रैन बसेरा के निकट ही रेलवे स्टेशन भी है। इस कारण रात के वक्त ट्रेनों से उतरने वाले मुसाफिर ठिकाना तलाशते हुए जब तहसील स्थित रैन बसेरा के सामने आते हैं तो उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। भले ही प्रशासन व पालिका के अधिकारियों ने रैन बसेरा के बोर्ड पर लिखवा रखा हो कि सीएम योगी की प्रेरणा से संचालित, लेकिन हकीकत में यह प्रेरणा भी बंद रैन बसेरा के ताले न खुलवा सकी। इलाकाई लोगों का कहना है कि अधिकारियों को अब किसी का डर नहीं रह गया है। सीएम का नाम लिखा होने के बाद भी बेसहारों को रैन बसेरा से दूर रखा जा रहा है।
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बुजुर्ग व्यापारी मुन्नालाल सोहाने का कहना है कि रैन बसेरा चालू होना ही चाहिए, ताकि सड़क पर कड़ाके की ठंड में घूम रहे लोगों को रात बिताने के लिए सहारा मिल सके। तहसील का एकमात्र स्थायी रैन बसेरा है, इसकी अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
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सीनियर सिटीजन राजकुमार तिवारी के मुताबिक रैन बसेरा के नाम पर सरकारी धन की बर्बादी ही हो रही है। जब यहां के ताले खोलने ही नहीं थे तो लाखों खर्च करने की क्या आवश्यकता थी। जब किसी को रैन बसेरा का लाभ ही नहीं मिल पा रहा है।
अधिवक्ता पतंजलि तिवारी कहते हैं कि कई मर्तबा अधिवक्ताओं के संगठन इस रैन बसेरे को खोलने की मांग कर चुके हैं. ताकि दूर दराज से आने वाले वादकारियों को भी इसकी सुविधा का लाभ मिल सके। लेकिन सारी कोशिशें व्यर्थ साबित हुई, रैन बसेरा के ताले नहीं खुले।
समाजसेवी राजनारायण शुक्ला कहते हैं ऐसी सर्दी में भी रैनबसेरा बंद है। इससे खराब स्थिति और क्या होगी। रैन बसेरा को खुलवाने के लिए जल्द ही डीएम कुछ लोगों को साथ लेकर डीएम से मिलेंगे और उसे खुलवाने की मांग करेंगे।

एसडीएम कौशल कुमार कहते हैं कि सर्दी की शुरुआत से पहले ही रैन बसेरा में रंग रोगन कराकर उसे तैयार कर दिया गया था। फिर भी यदि वह चालू नहीं है तो कर्मचारियों की ड्यूटी लगवाने के लिए वे पालिका के अधिकारियों से बात करेंगे और उसे जल्द से जल्द चालू कराएंगे, ताकि लोगों को सुविधा का लाभ मिल सके।

कौशल कुमार

कौशल कुमार- फोटो : ORAI

मुन्नालाल

मुन्नालाल- फोटो : ORAI

राजकुमार

राजकुमार- फोटो : ORAI

पतंजलि

पतंजलि- फोटो : ORAI

कालपी स्थित रैन बसेरे के चैनल में पड़ा ताला।

कालपी स्थित रैन बसेरे के चैनल में पड़ा ताला। - फोटो : ORAI

रेन बसेरे का बोर्ड जिसमें लिखा सीएम को प्रेरणा संचालित

रेन बसेरे का बोर्ड जिसमें लिखा सीएम को प्रेरणा संचालित- फोटो : ORAI

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