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Jalaun News: बयान बदलने के लिए मरीज से डॉक्टर बना रहे दबाव, दे रहे धमकी
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उरई। मेडिकल कॉलेज में डिस्चार्ज होने वाले मरीज को चार घंटे तक ओटी में लिटाकर ऑपरेशन की तैयारी करने के मामले में नया मोड़ आया है। पीड़ित ने डॉक्टरों अन्य स्टाफ पर धमकी देने और बयान बदलने का दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को डीएम राजेश कुमार पांडेय व एसपी डॉ. दुर्गेश कुमार को शिकायती पत्र दिया है। आरोप है कि कोतवाली में तहरीर देने के बावजूद डॉक्टर व स्टॉफ पर रिपोर्ट दर्ज नहीं की जा रही है।
माधौगढ़ कोतवाली क्षेत्र के डिकौली गांव निवासी ब्रजेश चौधरी ने शिकायती पत्र में कि आंतों में सूजन होने पर 28 जुलाई को मेडिकल कॉलेज में उसे भर्ती किया गया था। डॉक्टर ने ओपीडी में देखने के बाद उसे दो दिन तक भर्ती रहने की सलाह दी। बुधवार को उसके डिस्चार्ज की तैयारी थी।
इधर, बुधवार की सुबह दो वार्डबॉय उसे जांच के बहाने ऑपरेशन थियेटर ले गए। वह ऑपरेशन की तैयारी करने लगे। उसके शरीर में कई जगहों पर मार्कर से गोले बना दिए गए। विरोध किया तो स्टाफ ने उसे चुपचाप लेटे रहने की धमकी दी। पूरे मामले की शिकायत करने पर डिप्टी सीएम ने कार्रवाई के आदेश दिए थे। इस पर प्राचार्य ने दो डॉक्टरों और तीन स्टाफ नर्स को निलंबित कर दिया था।
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आरोप है कि अब निलंबित डॉक्टर अपने वकील के माध्यम से उसे दूसरे डॉक्टर का नाम लेने का दबाव बना रहे हैं। बताया कि एक सप्ताह बाद भी कोई जांच के नाम पर उसके पास नहीं आया। बावजूद फोन से उसे धमकी दी जा रही है। उसने कहा कि वह डॉक्टरों व स्टाफ पर रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए कोतवाली गया था, लेकिन उसकी तहरीर नहीं ली गई। उसने सीएम पोर्टल पर भी शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
पीड़ित का आरोप है कि उसे अंदेशा है कि अगर वह ओटी से नहीं भागता तो उसके किसी पार्ट को भी निकाला जा सकता था। पीड़ित ने डीएम व एसपी से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है।
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माधौगढ़ कोतवाली क्षेत्र के डिकौली गांव निवासी ब्रजेश चौधरी ने शिकायती पत्र में कि आंतों में सूजन होने पर 28 जुलाई को मेडिकल कॉलेज में उसे भर्ती किया गया था। डॉक्टर ने ओपीडी में देखने के बाद उसे दो दिन तक भर्ती रहने की सलाह दी। बुधवार को उसके डिस्चार्ज की तैयारी थी।
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इधर, बुधवार की सुबह दो वार्डबॉय उसे जांच के बहाने ऑपरेशन थियेटर ले गए। वह ऑपरेशन की तैयारी करने लगे। उसके शरीर में कई जगहों पर मार्कर से गोले बना दिए गए। विरोध किया तो स्टाफ ने उसे चुपचाप लेटे रहने की धमकी दी। पूरे मामले की शिकायत करने पर डिप्टी सीएम ने कार्रवाई के आदेश दिए थे। इस पर प्राचार्य ने दो डॉक्टरों और तीन स्टाफ नर्स को निलंबित कर दिया था।
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आरोप है कि अब निलंबित डॉक्टर अपने वकील के माध्यम से उसे दूसरे डॉक्टर का नाम लेने का दबाव बना रहे हैं। बताया कि एक सप्ताह बाद भी कोई जांच के नाम पर उसके पास नहीं आया। बावजूद फोन से उसे धमकी दी जा रही है। उसने कहा कि वह डॉक्टरों व स्टाफ पर रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए कोतवाली गया था, लेकिन उसकी तहरीर नहीं ली गई। उसने सीएम पोर्टल पर भी शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
पीड़ित का आरोप है कि उसे अंदेशा है कि अगर वह ओटी से नहीं भागता तो उसके किसी पार्ट को भी निकाला जा सकता था। पीड़ित ने डीएम व एसपी से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है।