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डकोर के जंगल में मिला दो सिर वाला कबूतर
ब्यूरो/ अमर उजाला, उरई
Updated Fri, 11 Dec 2015 11:09 PM IST
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डकोर क्षेत्र के हैदलपुर एवं बंधौली गांव के जंगल में दो सिर वाला अद्भुत
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कबूतर देखने को मिला है। राक प्रजाति का यह कबूतर वन कर्मियों के लिए भी
कौतूहल का विषय बना है। इस तरह के कबूतर कभी कभार ही देखने को मिलते हैं।
जिले में चल रहे बर्ड वाचिंग कार्यक्रम के तहत वन विभाग की टीम सर्वे कर रही थी। बंधौली व हैदलपुर गांव के जंगल में
बेतवा नदी के किनारे दो सिर वाला कबूतर मिला। इसके सीने के ऊपर का भाग दो हिस्से में बंटा है। दो चोंच हैं और चार आंखें हैं। जबकि नीचला हिस्सा सामान्य कबूतर की अपेक्षा डेढ़ गुना मोटा है। इसे देखकर टीम भी हैरत में पड़ गई। टीम के
सर्वेयर मनीष कुमार ने बताया कि उन्होंने कभी भी इस तरह का पक्षी नहीं देखा है। उनके लिए यह पहला अवसर है। पक्षी विशेषज्ञ डा. आरके गुप्ता एवं डा. आरके सिंह का कहना है कि देश में करीब 1300 पक्षियों की प्रजातियां है। दो सिर वाले भारतीय कबूतर बहुत कम देखने को मिलते हैं।
संदेशवाहक रहे हैं कबूतर
कबूतरों को पालतू बनाए जाने का सबसे पुराना उल्लेख मिस्र के पांचवे राजवंश (लगभग 300 ई.पू) से मिलता है। 1150 ई. में बग़दाद के सुल्तान ने कबूतरों की डाक व्यवस्था शुरू की थी और चंगेज़ ख़ां ने अपने विजय अभियानों के विस्तार के साथ ऐसी ही प्रणाली का उपयोग किया था। 1848 की क्रांति के दौरान यूरोप में संदेश वाहक के रुप में कबूतरों का व्यापक
इस्तेमाल हुआ था और 1849 में बर्लिन व ब्रूसेल्स के बीच टेलीग्राफ़ सेवा भंग होने पर कबूतरों को ही संदेश वाहक रुप में प्रयुक्त किया गया था। 20 वीं शताब्दी में भी युद्धों के दौरान कबूतरों को आपात संदेश ले जाने के लिए इस्तेमाल किया गया। अमेरिका के आर्मी सिगनल कॉर्प्स के कबूतर की उड़ान का कीर्तिमान 3,700 किलोमीटर का है।
फैक्ट फाइल
1300 पक्षियों की प्रजाति है भारत में
34 से अधिक किस्म के कबूतर पाए जाते हैं भारत में
1000 किलोमीटर दूरी तय कर सकते हैं एक दिन में
3700 किलोमीटर उड़ान का कीर्तिमान है अमेरिका के आर्मी सिगनल कॉर्प्स के कबूतर का
185 किलोमीटर की गति दर्ज है भारतीय रॉक कबूतर का
जिले में चल रहे बर्ड वाचिंग कार्यक्रम के तहत वन विभाग की टीम सर्वे कर रही थी। बंधौली व हैदलपुर गांव के जंगल में
बेतवा नदी के किनारे दो सिर वाला कबूतर मिला। इसके सीने के ऊपर का भाग दो हिस्से में बंटा है। दो चोंच हैं और चार आंखें हैं। जबकि नीचला हिस्सा सामान्य कबूतर की अपेक्षा डेढ़ गुना मोटा है। इसे देखकर टीम भी हैरत में पड़ गई। टीम के
सर्वेयर मनीष कुमार ने बताया कि उन्होंने कभी भी इस तरह का पक्षी नहीं देखा है। उनके लिए यह पहला अवसर है। पक्षी विशेषज्ञ डा. आरके गुप्ता एवं डा. आरके सिंह का कहना है कि देश में करीब 1300 पक्षियों की प्रजातियां है। दो सिर वाले भारतीय कबूतर बहुत कम देखने को मिलते हैं।
संदेशवाहक रहे हैं कबूतर
कबूतरों को पालतू बनाए जाने का सबसे पुराना उल्लेख मिस्र के पांचवे राजवंश (लगभग 300 ई.पू) से मिलता है। 1150 ई. में बग़दाद के सुल्तान ने कबूतरों की डाक व्यवस्था शुरू की थी और चंगेज़ ख़ां ने अपने विजय अभियानों के विस्तार के साथ ऐसी ही प्रणाली का उपयोग किया था। 1848 की क्रांति के दौरान यूरोप में संदेश वाहक के रुप में कबूतरों का व्यापक
इस्तेमाल हुआ था और 1849 में बर्लिन व ब्रूसेल्स के बीच टेलीग्राफ़ सेवा भंग होने पर कबूतरों को ही संदेश वाहक रुप में प्रयुक्त किया गया था। 20 वीं शताब्दी में भी युद्धों के दौरान कबूतरों को आपात संदेश ले जाने के लिए इस्तेमाल किया गया। अमेरिका के आर्मी सिगनल कॉर्प्स के कबूतर की उड़ान का कीर्तिमान 3,700 किलोमीटर का है।
फैक्ट फाइल
1300 पक्षियों की प्रजाति है भारत में
34 से अधिक किस्म के कबूतर पाए जाते हैं भारत में
1000 किलोमीटर दूरी तय कर सकते हैं एक दिन में
3700 किलोमीटर उड़ान का कीर्तिमान है अमेरिका के आर्मी सिगनल कॉर्प्स के कबूतर का
185 किलोमीटर की गति दर्ज है भारतीय रॉक कबूतर का