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बच्चों को बचाने में उर्मिला ने नहीं की जान की परवाह

Fri, 17 Nov 2017 11:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूूराे जालाैन
अमर उजाला ब्यूूराे जालाैन Updated Fri, 17 Nov 2017 11:55 PM IST
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urmila does not care about his life
बच्चों को बचाने में झुलसा पैर दिखाती चाची उर्मिला। - फोटो : amar ujala
कदौरा। ग्राम मदरा लालपुर निवासी अर्जुन के छप्पर में आग लगने के बाद उसके भाई राजू का छप्पर भी जलने लगा। इस पर राजू की पत्नी उर्मिला अपने बच्चों को लेकर किसी तरह बाहर निकली, लेकिन जब उसे पता चला कि अर्जुन के बच्चे जलते छप्पर में चीख रहे हैं तो वह आग में घुस गई। किसी तरह दो बच्चों को बचा लिया, लेकिन तीसरे को नहीं बचा आई।
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इस दौरान वह भी बुरी तरह से झुलस गई। गांव के लोगों की जुबान पर उर्मिला के साहस की ही चर्चा रही। ग्रामीणों का कहना था कि उर्मिला न होती तो शायद एक भी बच्चा जिंदा न बच पाता। घर में लगी आग की खबर सुनते ही अभिमन्यु की मां कुुंती व पिता अर्जुन रोते बिलखते हुए पहुंचे। जैसे ही कुंती को पता लगा कि लाडला अभिमन्यु अभी भी अंदर फंसा है तो उसकी चीखों से ममता का कलेजा फट गया और वह गश खाकर गिर पड़ी। महिलाओं ने बड़ी मुश्किल से कुंती को संभाला।
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