दो घंटे तक खुद इलाज करते रहे कर्मचारी
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सूत्रों की मानें तो प्रबंधन काफी देर तक मामले को हल्के में लेता रहा। सीएचसी प्रभारी डॉ. आरके शुक्ला के मुताबिक, उन्हें इस बाबत कोई सूचना नहीं दी गई, बल्कि सुबह पांच बजे छात्राओं को लेकर स्कूल स्टाफ ही सीएचसी आया था। इधर, वार्डन वंदना का कहना है कि उनके मोबाइल में सिग्नल नहीं होने के कारण वह सूचना नहीं दे सकीं। उधर, अस्पताल में छात्राओं से मिलने के बाद एसडीएम सीधे कस्तूरबा स्कूल पहुंचे और वहां की रसोई का निरीक्षण किया। हालांकि, दोपहर होने के कारण उन्हें गुरुवार की रात के खाने का ज्यादा सामान नहीं मिल सका। इस कारण कोई नमूना भी नहीं लिया जा सका।
एसडीएम का कहना है कि फिर भी मामले की जांच कराएंगे और यहां के पानी के नमूने भी लिए जाएंगे। इसके अलावा बाजारों में बिक रहे फल और सब्जियों की भी जांच कराई जाएगी। हालांकि, कस्तूरबा गांधी स्कूल की ओर से घटना की जानकारी छात्राओं के परिजनों को नहीं दी गई। फिर भी मामले की भनक पाकर आसपास रहने वाले कुछ अभिभावक विद्यालय पहुंचे और प्रबंधन को कोसते हुए अपनी बच्चियों को साथ ले गए। प्रबंधन ने पुलिस को भी मामले से अवगत कराना मुनासिब नहीं समझा। देर शाम तक कुछ छात्राओं को अस्पताल से विद्यालय वापस भेजने की भी सूचना है।