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तहसीलदार के खिलाफ वकीलों ने फूंका संघर्ष का बिगुल, न्यायालय का करेंगे बहिष्कार
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-बारसंघ की बैठक में चर्चा करते अधिवक्ता
- फोटो : ORAI
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कोंच। वकीलों की समस्याओं को लेकर बार संघ की आमसभा की बैठक हुई। इसमें तहसीलदार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए उनके स्थानांतरण की मांग की। वकीलों का आरोप है कि तहसीलदार गैरविवादित वादों का भी निपटारा न करके अनावश्यक रूप से उन्हें लटकाए हैं। इसके अलावा वकीलों के प्रति उनका व्यवहार अच्छा नहीं है। जिसके चलते अधिवक्ताओं में रोष है। बैठक में सर्वसम्मति से आगामी 15 नवंबर तक तहसीलदार न्यायालय का बहिष्कार करने का फैसला लिया गया है।
बारसंघ कोंच की आमसभा बुधवार को बार भवन विजय बारहदरी में अध्यक्ष संजीव तिवारी की अध्यक्षता में हुई। एजेंडे के मुताबिक वकीलों को अपनी दिक्कतें बताने और उनके निराकरण के प्रयासों को लेकर बुलाई गई इस बैठक में अधिकांश अधिवक्ताओं ने तहसीलदार नरेंद्र कुमार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की। कहा कि तहसीलदार न्यायालय में चल रहे अविवादित दाखिल खारिज जैसे बैनामा, वसीयतनामा व शर्तिया बैनामा आदि का समय से निस्तारण न करके अनावश्यक रूप से वादों को लटकाया जाता है। इस पर वकीलों ने तहसीलदार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनके तबादले की मांग की। साथ ही 15 नवंबर तक तहसीलदार न्यायालय का बहिष्कार करने का फैसला सर्वसम्मति लिया गया। 15 नवंबर को दोबारा वकील बैठक करके अपने फैसले की समीक्षा करेंगे और अगली रूपरेखा तय करेंगे। इस दौरान महामंत्री वीरेंद्र जाटव, राजेश मिश्रा, केके श्रीवास्तव, केबी निरंजन, श्रीराम गुप्ता, सुरेंद्र शर्मा, विनोद अग्निहोत्री, अफजाल खान, अवधेश द्विवेदी, नवलकिशोर जाटव सहित तमाम अधिवक्ता मौजूद रहे।
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बारसंघ कोंच की आमसभा बुधवार को बार भवन विजय बारहदरी में अध्यक्ष संजीव तिवारी की अध्यक्षता में हुई। एजेंडे के मुताबिक वकीलों को अपनी दिक्कतें बताने और उनके निराकरण के प्रयासों को लेकर बुलाई गई इस बैठक में अधिकांश अधिवक्ताओं ने तहसीलदार नरेंद्र कुमार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की। कहा कि तहसीलदार न्यायालय में चल रहे अविवादित दाखिल खारिज जैसे बैनामा, वसीयतनामा व शर्तिया बैनामा आदि का समय से निस्तारण न करके अनावश्यक रूप से वादों को लटकाया जाता है। इस पर वकीलों ने तहसीलदार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनके तबादले की मांग की। साथ ही 15 नवंबर तक तहसीलदार न्यायालय का बहिष्कार करने का फैसला सर्वसम्मति लिया गया। 15 नवंबर को दोबारा वकील बैठक करके अपने फैसले की समीक्षा करेंगे और अगली रूपरेखा तय करेंगे। इस दौरान महामंत्री वीरेंद्र जाटव, राजेश मिश्रा, केके श्रीवास्तव, केबी निरंजन, श्रीराम गुप्ता, सुरेंद्र शर्मा, विनोद अग्निहोत्री, अफजाल खान, अवधेश द्विवेदी, नवलकिशोर जाटव सहित तमाम अधिवक्ता मौजूद रहे।
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