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Jalaun News: छत्रपति शिवाजी के गुरु समर्थ रामदास ने कराई थी कालपी के गणेश मंदिर की स्थापना
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कालपी। गणेश चतुर्थी कल है। जगह-जगह तैयारियां जोरों पर हैं। रेलवे स्टेशन से 200 मीटर दूर पर प्राचीन गणेश मंदिर का अपना ऐतिहासिक महत्व है। इस मंदिर में गणेश मूर्ति की स्थापना छत्रपति शिवाजी के गुरु समर्थ रामदास ने की थी।
दरअसल, बुंदेलखंड के प्रवेश द्वार धर्मनगरी कालपी में वैसे तो कई प्राचीन मंदिर हैं। इस वजह से कालपी को छोटी काशी भी कहा जाता है। इन्हीं मंदिरों में नगर के रेलवे स्टेशन से लगभग 200 मीटर दूरी पर स्थित प्राचीन गणेश मंदिर है। बताया जाता है यह नगर का सबसे प्राचीन मंदिर है। इतिहासकारों की मानें बुंदेलखंड में मराठाओं का सन 1729 से कालपी आना-जाना रहता था। बाजीराव पेशवा बुंदेलखंड में प्रदेश का एक भाग प्राप्त हुआ था।
इस मंदिर का मरम्मत का कार्य बाजीराव पेशवा द्वारा किया गया था। संवत 1749 में इस गणेश मंदिर का सुंदरीकरण बाजीराव प्रथम ने कराया था। इतिहासकार कुलदीप शर्मा एवं पूर्व सभासद भारत यादव ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण महाराज छत्रपति शिवाजी के गुरु समर्थ गुरु रामदास ने सन संवत 1569 में अपने कालपी आगमन पर कराया था। इस मंदिर के निर्माण में लाल बलुआ पत्थर एवं चूने का इस्तेमाल हुआ है।
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यह मंदिर 60 फीट क्षेत्रफल में स्थापित है। इस मठ के ऊपर चतुर्थ कोणीय विमान अंकित है। मंदिर के अंदर 21 फीट चौड़ा आंगन है। उत्तरी बाउंड्रीवाल की तरफ शिव मंदिर है। इस मंदिर में तीन मूर्ति स्थापित हैं। पहले मूर्ति 12 इंच ऊंची व आठ इंच चौड़ी है। यह मूर्ति गणेश जी की शांत मुद्रा मूर्ति है, जिसके ऊपर तीन नागफनों से संयुक्त शोभित है।
दूसरी मूर्ति सफेद संगमरमर पत्थर की शांत मुद्रा की चतुर्भुजी मूर्ति है। इसकी सूंड दाहिनी ओर है। इस मूर्ति के प्राण प्रतिष्ठा पेशवा बाजीराव प्रथम ने संवत 1749 में मंदिर के सुंदरीकरण के समय की थी। इस मूर्ति की ऊंचाई 16 इंच एवं चौड़ाई 12 इंच है। तृतीय गणेश मूर्ति से श्वेत संगमरमर से निर्मित है, जिसकी ऊंचाई 14 इंच चौड़ाई 8.5 इंच है। इस चतुर्भुज की मूर्ति में सूंड अंकित है। इस मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा महारानी लक्ष्मीबाई ने की थी। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में जो भी भक्त आते हैं, उनकी मुराद पूरी होती है।
मंदिर के पुजारी अनिल महाराज ने बताया कि गणेश उत्सव को लेकर इस मंदिर में तैयारी चालू कर दी गई हैं। इस मंदिर में हर वर्ष से गणेश उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। इसमें मोहल्लेवाले सहयोग करते हैं।
कालपी में पांच दिवसीय गणेश उत्सव
उरई। श्याम पैलेस सांस्कृतिक मंडल की ओर से पांच दिवसीय गणेश उत्सव समारोह का आयोजन किया जा रहा है। यह गणेश उत्सव 27 से 31 अगस्त तक चलेगा। कलाकार की ओर से गणेश जी की अलग-अलग झांकियां प्रस्तुत करेंगे। साथ में गणेश प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी। 31 अगस्त की दोपहर तीन बजे गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। (संवाद)
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दरअसल, बुंदेलखंड के प्रवेश द्वार धर्मनगरी कालपी में वैसे तो कई प्राचीन मंदिर हैं। इस वजह से कालपी को छोटी काशी भी कहा जाता है। इन्हीं मंदिरों में नगर के रेलवे स्टेशन से लगभग 200 मीटर दूरी पर स्थित प्राचीन गणेश मंदिर है। बताया जाता है यह नगर का सबसे प्राचीन मंदिर है। इतिहासकारों की मानें बुंदेलखंड में मराठाओं का सन 1729 से कालपी आना-जाना रहता था। बाजीराव पेशवा बुंदेलखंड में प्रदेश का एक भाग प्राप्त हुआ था।
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इस मंदिर का मरम्मत का कार्य बाजीराव पेशवा द्वारा किया गया था। संवत 1749 में इस गणेश मंदिर का सुंदरीकरण बाजीराव प्रथम ने कराया था। इतिहासकार कुलदीप शर्मा एवं पूर्व सभासद भारत यादव ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण महाराज छत्रपति शिवाजी के गुरु समर्थ गुरु रामदास ने सन संवत 1569 में अपने कालपी आगमन पर कराया था। इस मंदिर के निर्माण में लाल बलुआ पत्थर एवं चूने का इस्तेमाल हुआ है।
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यह मंदिर 60 फीट क्षेत्रफल में स्थापित है। इस मठ के ऊपर चतुर्थ कोणीय विमान अंकित है। मंदिर के अंदर 21 फीट चौड़ा आंगन है। उत्तरी बाउंड्रीवाल की तरफ शिव मंदिर है। इस मंदिर में तीन मूर्ति स्थापित हैं। पहले मूर्ति 12 इंच ऊंची व आठ इंच चौड़ी है। यह मूर्ति गणेश जी की शांत मुद्रा मूर्ति है, जिसके ऊपर तीन नागफनों से संयुक्त शोभित है।
दूसरी मूर्ति सफेद संगमरमर पत्थर की शांत मुद्रा की चतुर्भुजी मूर्ति है। इसकी सूंड दाहिनी ओर है। इस मूर्ति के प्राण प्रतिष्ठा पेशवा बाजीराव प्रथम ने संवत 1749 में मंदिर के सुंदरीकरण के समय की थी। इस मूर्ति की ऊंचाई 16 इंच एवं चौड़ाई 12 इंच है। तृतीय गणेश मूर्ति से श्वेत संगमरमर से निर्मित है, जिसकी ऊंचाई 14 इंच चौड़ाई 8.5 इंच है। इस चतुर्भुज की मूर्ति में सूंड अंकित है। इस मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा महारानी लक्ष्मीबाई ने की थी। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में जो भी भक्त आते हैं, उनकी मुराद पूरी होती है।
मंदिर के पुजारी अनिल महाराज ने बताया कि गणेश उत्सव को लेकर इस मंदिर में तैयारी चालू कर दी गई हैं। इस मंदिर में हर वर्ष से गणेश उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। इसमें मोहल्लेवाले सहयोग करते हैं।
कालपी में पांच दिवसीय गणेश उत्सव
उरई। श्याम पैलेस सांस्कृतिक मंडल की ओर से पांच दिवसीय गणेश उत्सव समारोह का आयोजन किया जा रहा है। यह गणेश उत्सव 27 से 31 अगस्त तक चलेगा। कलाकार की ओर से गणेश जी की अलग-अलग झांकियां प्रस्तुत करेंगे। साथ में गणेश प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी। 31 अगस्त की दोपहर तीन बजे गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। (संवाद)