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फर्जी केस बनाने में फंसे तत्कालीन डीएम-एसपी
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Tue, 06 Sep 2016 11:11 PM IST
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आटा थाना पुलिस की ओर से वर्ष 2009 में चार लोगों के खिलाफ दर्ज गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा फर्जी साबित होने पर विशेष जज गैंगस्टर कोर्ट मनोज शुक्ल ने कड़ा रुख अपनाया। इसके लिए उन्होंने तत्कालीन डीएम रिग्जियान सैंफिल, एसपी जीपी कनौजिया सहित चार के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। आदेश की कापी प्रदेश के मुख्य
सचिव और जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय भेजी गई है। कोर्ट ने आरोपी बनाए गए चारों लोगों को बरी कर दिया। आटा थाना पुलिस ने वर्ष 2009 में शंभूदयाल निवासी लैकूपुरवा आटा, संतोष केड़ा निवासी बिलगांव थाना जलालपुर हमीरपुर, वीरेंद्र उर्फ वीरेंद्र राजपूत निवासी बम्हौरी थाना आटा व त्रिलोकी सिंह निवासी खेड़ा शिलाजीत हमीरपुर के खिलाफ2/3 गैंगस्टर
एक्ट की कार्रवाई की थी। इस पर तत्कालीन एसपी जीपी कनौजिया, तत्कालीन डीएम रिग्जियान सैंफिल ने अनुमोदन भी कर दिया था। इसके बाद आटा थानाध्यक्ष रहे सरस चंद्र व तत्कालीन उरई कोतवाल पहूप सिंह ने आरोपियाें को नोटिस तामील करवाने के बाद गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आरोपियों को छह महीने बाद जमानत मिली थी। इस मामले का
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ट्रायल गैंगस्टर कोर्ट के जज मनोज शुक्ल की अदालत में चल रहा था। उन्हाेंने दोनाें पक्षाें के वकीलाें की दलीलें सुनने के बाद पाया कि आरोपियों पर दोष साबित नहीं होता है। इस पर उन्होंने तत्कालीन डीएम रिग्जियान सैंफिल, एसपी जीपी कनौजिया, कोतवाल पहूप सिंह व आटा थानाध्यक्ष रहे सरस चंद्र के खिलाफ आपराधिक अभियोग चलाने का फैसला सुनाया।
साथ ही चाराें आरोपियाें को बरी कर दिया। अधिवक्ता शिवेश सिंह सेंगर ने बताया कि जज ने इस आदेश की प्रति प्रदेश के मुख्य सचिव व जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय भिजवाने के भी निर्देश देकर कार्रवाई की संस्तुति की है। बताते चलें कि कोतवाल पहूप सिंह की करीब दो माह पूर्व सड़क हादसे में मौत हो चुकी है। बाकी अधिकारियों का यहां से तबादला हो चुका है।
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सचिव और जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय भेजी गई है। कोर्ट ने आरोपी बनाए गए चारों लोगों को बरी कर दिया। आटा थाना पुलिस ने वर्ष 2009 में शंभूदयाल निवासी लैकूपुरवा आटा, संतोष केड़ा निवासी बिलगांव थाना जलालपुर हमीरपुर, वीरेंद्र उर्फ वीरेंद्र राजपूत निवासी बम्हौरी थाना आटा व त्रिलोकी सिंह निवासी खेड़ा शिलाजीत हमीरपुर के खिलाफ2/3 गैंगस्टर
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एक्ट की कार्रवाई की थी। इस पर तत्कालीन एसपी जीपी कनौजिया, तत्कालीन डीएम रिग्जियान सैंफिल ने अनुमोदन भी कर दिया था। इसके बाद आटा थानाध्यक्ष रहे सरस चंद्र व तत्कालीन उरई कोतवाल पहूप सिंह ने आरोपियाें को नोटिस तामील करवाने के बाद गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आरोपियों को छह महीने बाद जमानत मिली थी। इस मामले का
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ट्रायल गैंगस्टर कोर्ट के जज मनोज शुक्ल की अदालत में चल रहा था। उन्हाेंने दोनाें पक्षाें के वकीलाें की दलीलें सुनने के बाद पाया कि आरोपियों पर दोष साबित नहीं होता है। इस पर उन्होंने तत्कालीन डीएम रिग्जियान सैंफिल, एसपी जीपी कनौजिया, कोतवाल पहूप सिंह व आटा थानाध्यक्ष रहे सरस चंद्र के खिलाफ आपराधिक अभियोग चलाने का फैसला सुनाया।
साथ ही चाराें आरोपियाें को बरी कर दिया। अधिवक्ता शिवेश सिंह सेंगर ने बताया कि जज ने इस आदेश की प्रति प्रदेश के मुख्य सचिव व जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय भिजवाने के भी निर्देश देकर कार्रवाई की संस्तुति की है। बताते चलें कि कोतवाल पहूप सिंह की करीब दो माह पूर्व सड़क हादसे में मौत हो चुकी है। बाकी अधिकारियों का यहां से तबादला हो चुका है।