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स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर होंगे बस अड्डे
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उरई। अब रेलवे स्टेशन और ट्रेनों की तर्ज पर बसों के नाम भी रखे जा रहे हैं। उरई का बस अड्डा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन्नीलाल पांडेय के नाम पर होगा। जालौन का बस अड्डा का नामकरण स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लल्लूराम के नाम पर किया जाएगा। इसी तरह जिले को जो दो नई बसें मिली हैं, उनका नाम भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चित्तर सिंह निरंजन बस सेवा होगा।
शासन के निर्देश पर आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत बस अड्डों और लंबी दूरी की बसों के नाम महापुरुषों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर रखे जाने के आदेश दिए गए थे। इस पर परिवहन विभाग ने पहल की। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम बस अड्डे और बस सेवा के लिए प्रस्तावित किए गए। जनप्रतिनिधियों की सहमति पर एडीएम ने भी मुहर लगा दी। जल्द डीएम की मुहर लगने के बाद फाइल शासन स्तर पर भेजी जाएगी। एमडी की सहमति के बाद बस अड्डा और बस सेवा का नामकरण कर दिया जाएगा। एआरएम रोडवेज दुर्गाशंकर विश्वकर्मा का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की सहमति से प्रस्ताव बना दिए गए हैं। शासन के आदेशानुसार प्रस्ताव पर मुहर लगने के बाद नामकरण की कार्रवाई की जाएगी।
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स्वतंत्रता आंदोलन में कई बार जेल गए चित्तर सिंह
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चित्तर सिंह निरंजन के नाम पर बस चलाई जाएगी। उनका जन्म कोंच में 1901 में हुआ था। वर्ष 1930 में नमक सत्याग्रह आंदोलन में भाग लिया और छह माह कैद की सजा पाई थी। 1941 में व्यक्तिगत सत्याग्रह में हिस्सा लिया और एक साल कैद और 100 रुपये अर्थदंड की सजा पाई। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के सिलसिले में नजरबंद रहे। कोंच म्युनिसिपल बोर्ड के सदस्य और कई साल तक सभापति रहे। सन 1952 से 62 तक कांग्रेस से विधायक रहे। उनका शिक्षा भी अहम योगदान रहा।
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व्यक्तिगत सत्याग्रह में शामिल रहे लल्लूराम
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लल्लूराम के नाम पर बस अड्डा बनाया जा रहा है। वे जालौन तहसील क्षेत्र के लौना के निवासी थे। 27 मई 1941 में व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन में गिरफ्तार हुए। चार माह कैद और 100 रुपये अर्थदंड की सजा पाई। उन्होंने अंग्रेजों को कई साल तक परेशान किया। वह आंदोलनकारी नेता के रूप में जाने जाते हैं।
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कई आंदोलनों में शामिल रहे मन्नीलाल पांडेय
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन्नीलाल पांडेय के नाम पर उरई का बस अड्डा बनाने का प्रस्ताव है। उनका जन्म कालपी में 1882 में हुआ था। उन्होंने 1916-17 में होम रूल आंदोलन में भाग लिया था। वर्ष 1921 में असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया और जेल की सजा पाई। वर्ष 1930 में नमक सत्याग्रह में भाग लिया और छह माह तक जेल में रहे। 1936 में विधानसभा के सदस्य चुने गए। जिला सहकारी बैंक के संचालक भी रहे। 21 दिसंबर 1939 में स्वर्गवासी हो गए।
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शासन के निर्देश पर आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत बस अड्डों और लंबी दूरी की बसों के नाम महापुरुषों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर रखे जाने के आदेश दिए गए थे। इस पर परिवहन विभाग ने पहल की। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम बस अड्डे और बस सेवा के लिए प्रस्तावित किए गए। जनप्रतिनिधियों की सहमति पर एडीएम ने भी मुहर लगा दी। जल्द डीएम की मुहर लगने के बाद फाइल शासन स्तर पर भेजी जाएगी। एमडी की सहमति के बाद बस अड्डा और बस सेवा का नामकरण कर दिया जाएगा। एआरएम रोडवेज दुर्गाशंकर विश्वकर्मा का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की सहमति से प्रस्ताव बना दिए गए हैं। शासन के आदेशानुसार प्रस्ताव पर मुहर लगने के बाद नामकरण की कार्रवाई की जाएगी।
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स्वतंत्रता आंदोलन में कई बार जेल गए चित्तर सिंह
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चित्तर सिंह निरंजन के नाम पर बस चलाई जाएगी। उनका जन्म कोंच में 1901 में हुआ था। वर्ष 1930 में नमक सत्याग्रह आंदोलन में भाग लिया और छह माह कैद की सजा पाई थी। 1941 में व्यक्तिगत सत्याग्रह में हिस्सा लिया और एक साल कैद और 100 रुपये अर्थदंड की सजा पाई। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के सिलसिले में नजरबंद रहे। कोंच म्युनिसिपल बोर्ड के सदस्य और कई साल तक सभापति रहे। सन 1952 से 62 तक कांग्रेस से विधायक रहे। उनका शिक्षा भी अहम योगदान रहा।
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व्यक्तिगत सत्याग्रह में शामिल रहे लल्लूराम
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लल्लूराम के नाम पर बस अड्डा बनाया जा रहा है। वे जालौन तहसील क्षेत्र के लौना के निवासी थे। 27 मई 1941 में व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन में गिरफ्तार हुए। चार माह कैद और 100 रुपये अर्थदंड की सजा पाई। उन्होंने अंग्रेजों को कई साल तक परेशान किया। वह आंदोलनकारी नेता के रूप में जाने जाते हैं।
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कई आंदोलनों में शामिल रहे मन्नीलाल पांडेय
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन्नीलाल पांडेय के नाम पर उरई का बस अड्डा बनाने का प्रस्ताव है। उनका जन्म कालपी में 1882 में हुआ था। उन्होंने 1916-17 में होम रूल आंदोलन में भाग लिया था। वर्ष 1921 में असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया और जेल की सजा पाई। वर्ष 1930 में नमक सत्याग्रह में भाग लिया और छह माह तक जेल में रहे। 1936 में विधानसभा के सदस्य चुने गए। जिला सहकारी बैंक के संचालक भी रहे। 21 दिसंबर 1939 में स्वर्गवासी हो गए।