फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jalaun News ›   Brahmin Mahasabha campus poetry evening

ब्राह्मण महासभा परिसर में काव्य संध्या

Tue, 03 Jan 2017 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
अमर उजाला ब्यूरो, उरई Updated Tue, 03 Jan 2017 11:16 PM IST
विज्ञापन
Brahmin Mahasabha campus poetry evening
मंचस्थ अतिथियों के बीच काव्य पाठ करते कवि - फोटो : अमर उजाला
ब्राह्मण महासभा एवं नगर विद्वत् परिषद के संयुक्त तत्वावधान में महासभा परिसर में सोमवार देर रात काव्य संध्या का आयोजन किया गया। इसमें नामचीन व नवोदित कवियों व शायरों ने रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृपाशंकर द्विवेदी बच्चू महाराज ने इस अवसर पर अपनी रचनाएं भी पढ़ीं और साहित्यकारों को देश व समाज को नई दिशा देने का
विज्ञापन


संवाहक बताया। ब्राह्मण महासभा अध्यक्ष देवीदयाल रावत की अध्यक्षता व महामंत्री अनुरुद्ध मिश्र के संचालन में आयोजित काव्य संध्या में बतौर संरक्षक ब्रजमोहन तिवारी एवं विशिष्ट अतिथि रामलीला विशेषज्ञ रमेश तिवारी व पत्रकार पुरुषोत्तमदास रिछारिया मंचस्थ रहे। मां सरस्वती की पूजा अर्चना के बाद संचालन की बागडोर संतोष तिवारी सरल ने संभाली।
विज्ञापन


दिनेश मानव ने मां वीणापाणि का आह्वान कर कार्यक्रम को गति प्रदान की। चूंकि आध्यात्मिक माहौल था सो कवि नंदराम स्वर्णकार भावुक ने अपनी रचना का केंद्र अध्यात्म पर ही रखा। कहा, ‘विप्र गौ संतों का सकल संताप हरने को, असुर संहार करने को, परशु अवतार होता है...’। साहित्यकार नरेंद्र मोहन मित्र ने पढ़ा, ‘संतों जैसी ज्योति जगाना मुश्किल है, मीरा
विज्ञापन
विज्ञापन


जैसा भजन सुनाना मुश्किल है, रामचरित मानस घर घर वरदान बनी, तुलसी का अहसान चुकाना मुश्किल है...’। हास्य कवि ओंकारनाथ पाठक ने रचना सुनाई, ‘रात में जब भी मेरे पास आते हैं, लाल सिंदूर देखकर वहीं ठिठक जाते हैं, इसलिए बहन हरा सिंदूर लगाती हूं, तभी उन्हें पति होने का सुख दे पाती हूं...’। डॉ. मृदुल दांतरे ने अपना व्यंग्य पढ़ा, ‘जिनको थामा

था हाथ पकड़, वो खाली दस्ताने निकले, इस दुनिया में न जाने कितने बेगाने निकले, बोलते न थे मृदुल की शख्सियत पर, उन गूंगों के भी तराने निकले...’। वीरेंद्र त्रिपाठी ने अपनी व्यंग्य रचनाएं पढ़ीं। इनके अलावा कवि भास्कर सिंह माणिक्य, संजय सिंघाल, आनंद शर्मा, नरोत्तम स्वर्णकार, संजीव सरस, अरुण कुमार वाजपेई, प्रेम चौधरी नदीम, मोहनदास

नगाइच, ब्रजेशकुमार नायक आदि की रचनाएं भी सराही गईं। संचालन करते हुए संतोष तिवारी सरल ने कहा, ‘अमृत लिखता हूं गरल लिखता हूं, अपने जीवन पे गजल लिखता हूं, कठिन भाषा मुझे गंवारा नहीं, जो भी लिखता हूं सरल लिखता हूं...’। महासभा महामंत्री अनुरूद्घ मिश्रा ने आभार जताया एवं कवियों व अतिथियों को अंगवस्त्र व श्रीफल प्रदान कर सम्मानित


किया। इस दौरान आनंद दुवे, लल्लूराम मिश्रा, संजय रावत, आनंद दुवे, विनोद अग्निहोत्री, अतुल शर्मा, अखिलेश बबेले, हरिश्चंद्र तिवारी, राघवेन्द्र तिवारी, मुकेश शास्त्री, सुधीर दुवे सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed