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Jalaun News: एमडी ड्रग्स फैक्टरी के दोनों आरोपी 27 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजे गए
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उरई। डकोर थाना क्षेत्र के रमपुरा गांव में पकड़ी गई एमडी ड्रग्स फैक्टरी के मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों को शुक्रवार को उरई की एनडीपीएस अदालत में पेश किया गया। अपर जिला जज भारतेंदु की अदालत ने दोनों आरोपियों को 27 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में जिला कारागार भेजने का आदेश दिया।
कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। अब जांच एजेंसियां फैक्टरी में इस्तेमाल किए जा रहे कच्चे रसायनों की खरीद, लगाए गए निवेश और तैयार ड्रग्स की सप्लाई के नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं। इसके साथ ही इस कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि मुंबई से लाए गए रसायनों की खरीद किसके माध्यम से हुई और तैयार ड्रग्स की आपूर्ति कहां की जानी थी।
शैलेंद्र की गिरफ्तारी के बाद खुलेगी पूरे नेटवर्क की परतें
फैक्टरी प्रकरण में शैलेंद्र की गिरफ्तारी जांच एजेंसियों के लिए अहम कड़ी बनी हुई है। घटना के बाद से ही वह फरार है। उसकी तलाश में टीमें जिले के अलावा झांसी में भी दबिश दे रही हैं। वहीं, हेमंत के गोहांड स्थित घर से माल बरामद होने के बाद टीम उसके घर पर लगातार निगरानी रख रही है।
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जांच एजेंसियां शैलेंद्र की भूमिका को लेकर भी कई बिंदुओं पर पड़ताल कर रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वह खुद एमडी ड्रग्स के निर्माण और कारोबार में शामिल था या फिर उसने फैक्टरी लगाने के लिए केवल अपनी जगह किराये पर दी थी। यदि वह किराये पर जगह देने की बात कहता है तो इसके बदले हुए लेनदेन और अन्य समझौतों की भी जांच होगी। उसकी गिरफ्तारी के बाद ही फैक्टरी में निवेश, निर्माण और सप्लाई से जुड़े कई सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।
अधिक दाम मांगने के फेर में खुला फैक्टरी का राज
सूत्रों के मुताबिक, ड्रग्स बनाने का कच्चा माल मुंबई से लाया गया था। बताया जा रहा है कि जिस व्यक्ति से कच्चा माल खरीदा गया था, उसी को तैयार ड्रग्स की आपूर्ति करने का भी सौदा हुआ था। शुरुआती बातचीत में तैयार माल की कीमत तय हुई थी, लेकिन बाद में उस रेट पर सहमति नहीं बन सकी।
इसके बाद आरोपियों ने दूसरे व्यक्ति से तैयार माल का सौदा करने और उसे आपूर्ति करने की बात कही। सूत्रों का दावा है कि इससे नाराज पहले व्यक्ति ने इसकी जानकारी जांच एजेंसी को दे दी। इसके बाद टीम ने पूरे मामले की पड़ताल शुरू की और फैक्टरी तक पहुंच गई। हालांकि, कीमत को लेकर हुए विवाद और मुखबिरी के इस घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि फैक्टरी का भंडाफोड़ किस सूचना के आधार पर हुआ।
बिना नंबर की कार से आते थे लोग, आवाजाही का पता लगा रही टीम
रमपुरा गांव के ग्रामीणों के मुताबिक, फैक्टरी परिसर में प्रतिदिन बिना नंबर की एक कार से करीब दस लोग आते थे। बताया जाता है कि ये लोग शाम के समय वापस चले जाते थे। ग्रामीणों को उनकी पहचान और उनके आने-जाने के उद्देश्य की जानकारी नहीं हो सकी।
अब जांच टीम इस कार और उसमें आने वाले लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वे लोग फैक्टरी में काम करने आते थे या फिर उनका संबंध कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार ड्रग्स की खरीद-फरोख्त से था। एजेंसियां आसपास के लोगों से पूछताछ करने के साथ ही संदिग्धों की आवाजाही और उनके संपर्कों की जानकारी भी जुटा रही हैं।
इस मामले में शैलेंद्र की गिरफ्तारी के साथ ही फैक्टरी में आने वाले लोगों की पहचान, मुंबई से कच्चे रसायनों की आपूर्ति और तैयार ड्रग्स के खरीदारों का पता लगाना जांच की प्रमुख कड़ियां बनी हुई हैं।
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कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। अब जांच एजेंसियां फैक्टरी में इस्तेमाल किए जा रहे कच्चे रसायनों की खरीद, लगाए गए निवेश और तैयार ड्रग्स की सप्लाई के नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं। इसके साथ ही इस कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि मुंबई से लाए गए रसायनों की खरीद किसके माध्यम से हुई और तैयार ड्रग्स की आपूर्ति कहां की जानी थी।
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शैलेंद्र की गिरफ्तारी के बाद खुलेगी पूरे नेटवर्क की परतें
फैक्टरी प्रकरण में शैलेंद्र की गिरफ्तारी जांच एजेंसियों के लिए अहम कड़ी बनी हुई है। घटना के बाद से ही वह फरार है। उसकी तलाश में टीमें जिले के अलावा झांसी में भी दबिश दे रही हैं। वहीं, हेमंत के गोहांड स्थित घर से माल बरामद होने के बाद टीम उसके घर पर लगातार निगरानी रख रही है।
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जांच एजेंसियां शैलेंद्र की भूमिका को लेकर भी कई बिंदुओं पर पड़ताल कर रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वह खुद एमडी ड्रग्स के निर्माण और कारोबार में शामिल था या फिर उसने फैक्टरी लगाने के लिए केवल अपनी जगह किराये पर दी थी। यदि वह किराये पर जगह देने की बात कहता है तो इसके बदले हुए लेनदेन और अन्य समझौतों की भी जांच होगी। उसकी गिरफ्तारी के बाद ही फैक्टरी में निवेश, निर्माण और सप्लाई से जुड़े कई सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।
अधिक दाम मांगने के फेर में खुला फैक्टरी का राज
सूत्रों के मुताबिक, ड्रग्स बनाने का कच्चा माल मुंबई से लाया गया था। बताया जा रहा है कि जिस व्यक्ति से कच्चा माल खरीदा गया था, उसी को तैयार ड्रग्स की आपूर्ति करने का भी सौदा हुआ था। शुरुआती बातचीत में तैयार माल की कीमत तय हुई थी, लेकिन बाद में उस रेट पर सहमति नहीं बन सकी।
इसके बाद आरोपियों ने दूसरे व्यक्ति से तैयार माल का सौदा करने और उसे आपूर्ति करने की बात कही। सूत्रों का दावा है कि इससे नाराज पहले व्यक्ति ने इसकी जानकारी जांच एजेंसी को दे दी। इसके बाद टीम ने पूरे मामले की पड़ताल शुरू की और फैक्टरी तक पहुंच गई। हालांकि, कीमत को लेकर हुए विवाद और मुखबिरी के इस घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि फैक्टरी का भंडाफोड़ किस सूचना के आधार पर हुआ।
बिना नंबर की कार से आते थे लोग, आवाजाही का पता लगा रही टीम
रमपुरा गांव के ग्रामीणों के मुताबिक, फैक्टरी परिसर में प्रतिदिन बिना नंबर की एक कार से करीब दस लोग आते थे। बताया जाता है कि ये लोग शाम के समय वापस चले जाते थे। ग्रामीणों को उनकी पहचान और उनके आने-जाने के उद्देश्य की जानकारी नहीं हो सकी।
अब जांच टीम इस कार और उसमें आने वाले लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वे लोग फैक्टरी में काम करने आते थे या फिर उनका संबंध कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार ड्रग्स की खरीद-फरोख्त से था। एजेंसियां आसपास के लोगों से पूछताछ करने के साथ ही संदिग्धों की आवाजाही और उनके संपर्कों की जानकारी भी जुटा रही हैं।
इस मामले में शैलेंद्र की गिरफ्तारी के साथ ही फैक्टरी में आने वाले लोगों की पहचान, मुंबई से कच्चे रसायनों की आपूर्ति और तैयार ड्रग्स के खरीदारों का पता लगाना जांच की प्रमुख कड़ियां बनी हुई हैं।