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Jalaun News: मायानगरी के लिए तैयार हो रहा था नशे का जखीरा
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मुहम्मदाबाद (उरई)। गुलाब जल बनाने के नाम पर रामपुरा गांव में संचालित एमडी ड्रग्स फैक्टरी का नेटवर्क अब धीरे-धीरे सामने आने लगा है। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यहां तैयार होने वाले नशीले पदार्थों को मायानगरी (मुंबई) में खपाने की तैयारी थी। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े लोगों, कर्मचारियों और आपूर्ति के रास्तों की जानकारी जुटा रही हैं।
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक शुरुआती पूछताछ में संतोष गावली और हेमंत कुशवाह की भूमिका सामने आई है। आरोप है कि दोनों ने मिलकर इस नेटवर्क को खड़ा किया था। करीब 10 लोगों की टीम इस काम में लगी थी। मुंबई से जुड़े लोग कच्चा माल यहां पहुंचाते थे और तैयार नशीले पदार्थ को दोबारा मुंबई में भेजने की तैयारी थी।
सूत्रों के अनुसार वहां चुनिंदा पार्टियों में इसकी आपूर्ति करने की तैयारी थी। हालांकि, नेटवर्क में शामिल लोगों की संख्या और सप्लाई के ठिकानों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
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बिना नंबर की कार से आते थे कर्मचारी, एजेंसियां खंगाल रही कुंडली
ग्रामीणों के मुताबिक फैक्टरी में करीब पांच माह से गतिविधियां चल रही थीं। वहां लगभग 10 लोग काम करते थे। ये लोग बिना नंबर की कार से आते थे और दिनभर फैक्टरी में रहने के बाद शाम को वापस चले जाते थे। ग्रामीणों को न तो उनके नाम-पते की जानकारी थी और न ही उनके ठिकानों का पता चल सका। अब जांच एजेंसियां फैक्टरी आने-जाने वाले लोगों की पहचान और उनकी भूमिका का पता लगाने में जुटी हैं। बिना नंबर की कार से आवाजाही करने वालों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
गुलाब जल की एक बूंद नहीं बनी, फूलों की पत्तियों से किया दिखावा
फैक्टरी में गुलाब जल बनाने के नाम पर मशीनें और उत्पादन की व्यवस्था होने का दावा किया जा रहा था, लेकिन छापेमारी के दौरान गुलाब जल बनाने की वास्तविक प्रक्रिया से जुड़े उपकरण नहीं मिलने की बात सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक किसी को शक न हो, इसके लिए परिसर में करीब दो से तीन क्विंटल गुलाब की पंखुड़ियां डाल दी गई थीं, ताकि लोगों को लगे कि वहां गुलाब जल तैयार किया जाता है। बताया जा रहा है कि मुंबई और कानपुर से जुड़े कुछ लोग फैक्टरी के संचालन में सहयोग कर रहे थे। अब एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि गुलाब जल के कारोबार का दिखावा करने के पीछे किन लोगों की भूमिका थी।
दुर्गंध रोकने के लिए जमीन में खोदे थे बड़े-बड़े गड्ढे
फैक्टरी से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। ड्रग्स के कारोबार की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के मुताबिक, ऐसे रासायनिक पदार्थों के संपर्क में आने से व्यक्ति को बेचैनी, घबराहट और बेहोशी जैसी परेशानी हो सकती है। कुछ रसायनों से निकलने वाली गैस भी जहरीली हो सकती है। उसका दावा है कि फैक्टरी के आसपास जमीन में बड़े-बड़े गड्ढे खोदे गए थे, जिनमें रासायनिक अपशिष्ट बहाया जाता था। इससे दुर्गंध बाहर न फैले और ग्रामीणों को गतिविधियों की भनक न लगे। हालांकि, गड्ढों में किस तरह के रसायन डाले गए, इसकी पुष्टि प्रयोगशाला जांच से ही होगी। एजेंसियों के लिए अब इन गड्ढों से मिट्टी और अन्य नमूने लेकर जांच करना भी महत्वपूर्ण होगा।
एनडीपीएस एक्ट, 1985 के तहत मात्रा के आधार पर सजा
एमडीएमए और मेफेड्रोन जैसे प्रतिबंधित मन:प्रभावी पदार्थों के अवैध निर्माण, कब्जे, खरीद-बिक्री और परिवहन पर एनडीपीएस एक्ट की धारा 22 के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसमें 10 से 20 साल तक कठोर कारावास और एक से दो लाख रुपये तक जुर्माना साथ ही नियंत्रित रसायनों के अवैध कारोबार पर धारा 25ए के तहत 10 साल तक कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
झांसी के पूंछ से एक महिला के पकड़े जाने की चर्चा
डकोर के रमपुरा में बृहस्पतिवार की रात को डीआरआई व एटीएस की टीम पहुंच गई थी। टीम ने यहां करीब सात बजे तक जांच की थी। टीम फैक्टरी को सील कर चली गई थी। लोगों को लग रहा था कि टीम आरोपियों को लेकर लखनऊ चली गई, लेकिन टीम लखनऊ न जाकर कुछ देर शहर में रही और इसके बाद अचानक से रात को फिर से गांव पहुंच गई और जांच के बाद अचानक से गायब हो गई। सुबह टीम के सदस्य एक गाड़ी से गांव पहुंचे और कुछ देर रुकने के बाद फिर से चले गए जबकि कुछ गाड़ियां झांसी जिले में देखी गईं। जानकारी मिली है कि टीम ने एक महिला को हिरासत में लिया है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
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जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक शुरुआती पूछताछ में संतोष गावली और हेमंत कुशवाह की भूमिका सामने आई है। आरोप है कि दोनों ने मिलकर इस नेटवर्क को खड़ा किया था। करीब 10 लोगों की टीम इस काम में लगी थी। मुंबई से जुड़े लोग कच्चा माल यहां पहुंचाते थे और तैयार नशीले पदार्थ को दोबारा मुंबई में भेजने की तैयारी थी।
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सूत्रों के अनुसार वहां चुनिंदा पार्टियों में इसकी आपूर्ति करने की तैयारी थी। हालांकि, नेटवर्क में शामिल लोगों की संख्या और सप्लाई के ठिकानों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
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बिना नंबर की कार से आते थे कर्मचारी, एजेंसियां खंगाल रही कुंडली
ग्रामीणों के मुताबिक फैक्टरी में करीब पांच माह से गतिविधियां चल रही थीं। वहां लगभग 10 लोग काम करते थे। ये लोग बिना नंबर की कार से आते थे और दिनभर फैक्टरी में रहने के बाद शाम को वापस चले जाते थे। ग्रामीणों को न तो उनके नाम-पते की जानकारी थी और न ही उनके ठिकानों का पता चल सका। अब जांच एजेंसियां फैक्टरी आने-जाने वाले लोगों की पहचान और उनकी भूमिका का पता लगाने में जुटी हैं। बिना नंबर की कार से आवाजाही करने वालों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
गुलाब जल की एक बूंद नहीं बनी, फूलों की पत्तियों से किया दिखावा
फैक्टरी में गुलाब जल बनाने के नाम पर मशीनें और उत्पादन की व्यवस्था होने का दावा किया जा रहा था, लेकिन छापेमारी के दौरान गुलाब जल बनाने की वास्तविक प्रक्रिया से जुड़े उपकरण नहीं मिलने की बात सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक किसी को शक न हो, इसके लिए परिसर में करीब दो से तीन क्विंटल गुलाब की पंखुड़ियां डाल दी गई थीं, ताकि लोगों को लगे कि वहां गुलाब जल तैयार किया जाता है। बताया जा रहा है कि मुंबई और कानपुर से जुड़े कुछ लोग फैक्टरी के संचालन में सहयोग कर रहे थे। अब एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि गुलाब जल के कारोबार का दिखावा करने के पीछे किन लोगों की भूमिका थी।
दुर्गंध रोकने के लिए जमीन में खोदे थे बड़े-बड़े गड्ढे
फैक्टरी से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। ड्रग्स के कारोबार की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के मुताबिक, ऐसे रासायनिक पदार्थों के संपर्क में आने से व्यक्ति को बेचैनी, घबराहट और बेहोशी जैसी परेशानी हो सकती है। कुछ रसायनों से निकलने वाली गैस भी जहरीली हो सकती है। उसका दावा है कि फैक्टरी के आसपास जमीन में बड़े-बड़े गड्ढे खोदे गए थे, जिनमें रासायनिक अपशिष्ट बहाया जाता था। इससे दुर्गंध बाहर न फैले और ग्रामीणों को गतिविधियों की भनक न लगे। हालांकि, गड्ढों में किस तरह के रसायन डाले गए, इसकी पुष्टि प्रयोगशाला जांच से ही होगी। एजेंसियों के लिए अब इन गड्ढों से मिट्टी और अन्य नमूने लेकर जांच करना भी महत्वपूर्ण होगा।
एनडीपीएस एक्ट, 1985 के तहत मात्रा के आधार पर सजा
एमडीएमए और मेफेड्रोन जैसे प्रतिबंधित मन:प्रभावी पदार्थों के अवैध निर्माण, कब्जे, खरीद-बिक्री और परिवहन पर एनडीपीएस एक्ट की धारा 22 के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसमें 10 से 20 साल तक कठोर कारावास और एक से दो लाख रुपये तक जुर्माना साथ ही नियंत्रित रसायनों के अवैध कारोबार पर धारा 25ए के तहत 10 साल तक कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
झांसी के पूंछ से एक महिला के पकड़े जाने की चर्चा
डकोर के रमपुरा में बृहस्पतिवार की रात को डीआरआई व एटीएस की टीम पहुंच गई थी। टीम ने यहां करीब सात बजे तक जांच की थी। टीम फैक्टरी को सील कर चली गई थी। लोगों को लग रहा था कि टीम आरोपियों को लेकर लखनऊ चली गई, लेकिन टीम लखनऊ न जाकर कुछ देर शहर में रही और इसके बाद अचानक से रात को फिर से गांव पहुंच गई और जांच के बाद अचानक से गायब हो गई। सुबह टीम के सदस्य एक गाड़ी से गांव पहुंचे और कुछ देर रुकने के बाद फिर से चले गए जबकि कुछ गाड़ियां झांसी जिले में देखी गईं। जानकारी मिली है कि टीम ने एक महिला को हिरासत में लिया है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।