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भाजपा में दो टिकट रहेंगे बरकरार, एक पर मंथन जारी
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उरई। जिले के तीन विधानसभा क्षेत्रों में दो सीटों पर भाजपा सिटिंग विधायकों को उतारेगी। जबकि एक सीट पर लगातार मंथन चल रहा है। संभावना है कि 20 जनवरी की बैठक के बाद टिकटों की घोषणा होगी। वहीं एक सीट पर पार्टी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को लड़ाने की चर्चा चल रही है।
2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जिले की तीन सीटों में से दो पर नये चेहरों को मौका दिया था। इसमें माधौगढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक मूलचंद्र निरंजन और कालपी विधानसभा क्षेत्र से विधायक नरेंद्र सिंह जादौन हैं। वहीं आरक्षित उरई सदर विधानसभा क्षेत्र से गौरीशंकर वर्मा पर भरोसा जताया गया था। तीनों विधायकों ने एक लाख से अधिक वोट पाकर रिकार्ड बना दिया था। अब इस बार के चुनाव में भी भाजपा कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती है। यही कारण है कि प्रदेश में टिकट वितरण को लेकर मंथन चल रहा है।
तीसरे चरण में होने वाले चुनाव को लेकर अभी तक टिकट वितरण न होने से जहां लोगों में टिकट बदलने की चर्चा हैं। वहीं स्थानीय विधायकों और दावेदारों में हलचल है। सूत्रों की मानें तो दो सीटों के लिए टिकट लगभग तय हो गए हैं। इनमें पुरानों को ही मौका दिया जा रहा है, वहीं एक सीट पर अभी भी मंथन जारी है। यहां पर भाजपा जहां जातीय समीकरण साधकर टिकट देने के मूड में हैं वहीं इस सीट से फिर एक प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को भी लड़ाने की चर्चाएं गर्म हैं।
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2017 में भाजपा प्रत्याशी को मिले वोट
2017 के चुनाव में मोदी लहर के बीच तीनों प्रत्याशियों पर वोटों को बारिश हुई। सदर सीट से गौरीशंकर वर्मा को 140485, कालपी विधानसभा क्षेत्र से नरेंद्र पाल सिंह जादौन को 105988 वोट और माधौगढ़ विधायक मूलचंद्र निरंजन 104879 वोट मिले थे।
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स्वतंत्र देव सिंह को कालपी से प्रत्याशी बनाया था
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह का जिले से पुराना नाता रहा है। वह 12वीं पास करने के बाद यहां से स्नातक की पढ़ाई करने आए थे। इस दौरान वह छात्र राजनीति में थे और एक बार उरई के दयानंद वैदिक महाविद्यालय से छात्रसंघ अध्यक्ष भी रहे हैं। यही कारण है कि 2012 में भाजपा सरकार ने स्वतंत्र देव सिंह को कालपी से प्रत्याशी बनाया था। पर सपा की हवा में वह जीत नहीं सके थे। उन्हें उस वक्त करीब 17 हजार वोट मिले थे।
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2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जिले की तीन सीटों में से दो पर नये चेहरों को मौका दिया था। इसमें माधौगढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक मूलचंद्र निरंजन और कालपी विधानसभा क्षेत्र से विधायक नरेंद्र सिंह जादौन हैं। वहीं आरक्षित उरई सदर विधानसभा क्षेत्र से गौरीशंकर वर्मा पर भरोसा जताया गया था। तीनों विधायकों ने एक लाख से अधिक वोट पाकर रिकार्ड बना दिया था। अब इस बार के चुनाव में भी भाजपा कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती है। यही कारण है कि प्रदेश में टिकट वितरण को लेकर मंथन चल रहा है।
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तीसरे चरण में होने वाले चुनाव को लेकर अभी तक टिकट वितरण न होने से जहां लोगों में टिकट बदलने की चर्चा हैं। वहीं स्थानीय विधायकों और दावेदारों में हलचल है। सूत्रों की मानें तो दो सीटों के लिए टिकट लगभग तय हो गए हैं। इनमें पुरानों को ही मौका दिया जा रहा है, वहीं एक सीट पर अभी भी मंथन जारी है। यहां पर भाजपा जहां जातीय समीकरण साधकर टिकट देने के मूड में हैं वहीं इस सीट से फिर एक प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को भी लड़ाने की चर्चाएं गर्म हैं।
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2017 में भाजपा प्रत्याशी को मिले वोट
2017 के चुनाव में मोदी लहर के बीच तीनों प्रत्याशियों पर वोटों को बारिश हुई। सदर सीट से गौरीशंकर वर्मा को 140485, कालपी विधानसभा क्षेत्र से नरेंद्र पाल सिंह जादौन को 105988 वोट और माधौगढ़ विधायक मूलचंद्र निरंजन 104879 वोट मिले थे।
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स्वतंत्र देव सिंह को कालपी से प्रत्याशी बनाया था
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह का जिले से पुराना नाता रहा है। वह 12वीं पास करने के बाद यहां से स्नातक की पढ़ाई करने आए थे। इस दौरान वह छात्र राजनीति में थे और एक बार उरई के दयानंद वैदिक महाविद्यालय से छात्रसंघ अध्यक्ष भी रहे हैं। यही कारण है कि 2012 में भाजपा सरकार ने स्वतंत्र देव सिंह को कालपी से प्रत्याशी बनाया था। पर सपा की हवा में वह जीत नहीं सके थे। उन्हें उस वक्त करीब 17 हजार वोट मिले थे।