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बेतवा खतरे के निशान के पार

Sat, 20 Aug 2016 10:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
अमर उजाला ब्यूरो, उरई Updated Sat, 20 Aug 2016 10:57 PM IST
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Betwa crosses danger mark
सैदनगर इलाके में घुसता पानी। - फोटो : अमर उजाला
माताटीला व राजघाट बांध से छोड़े पानी की वजह से बेतवा नदी शनिवार को देर रात खतरे के निशान के पार हो गई है। नदी का तेजी से बढ़ता जलस्तर आसपास के गांव के लिए खतरे की घंटी है। बाढ़ की आशंका से लोग चिंतित हो उठे हैं। सैदनगर इलाके में नदी का पानी सड़क पर आ गया जिससे कई गांवों का संपर्क टूट गया है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि प्रशासन
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ने अभी तक इस क्षेत्र में एलर्ट भी घोषित नहीं किया है। बेतवा नदी खतरे के निशान 122.00 मीटर के पार पहुंच गई है। शनिवार को दोपहर तेजी के साथ बेतवा का जलस्तर बढ़ा। शाम को चार बजे ये 119 मीटर पर था जो सात बजे 121.07 मीटर पर पहुंच गया और देर रात खतरे के निशान के पार हो गया। माना जा रहा है कि सुबह तक 123 मीटर तक पहुंच सकता
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है। बेतवा में माताटीला व राजघाट का तकरीबन साढ़े तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। पहले से बेतवा में बांध का पानी छोड़ा गया था जिससे जल स्तर बढ़ा हुआ था। अब तो हालात बेकाबू नजर आने लगे हैं। सैदनगर क्षेत्र में अक्षरा देवी मंदिर की ओर जाने वाले रास्ता जलमग्न हो गया है। आसपास के तकरीबन आधा दर्जन गांवों का संपर्क भी कट गया है।
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इसके अलावा गुढ़ा, सिमरिया, मकरेछा समेत कई गांव के लोग दहशत में हैं। झासी जनपद से लेकर जालौन और हमीरपुर के तकरीवन 350 गांव बेतवा में बाढ़ से प्रभावित होते हं। अगर और पानी छोड़ा गया या फिर बारिश ने कहर मचाया तो हालात बेकाबू होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। इस संदर्भ में एडीएम आनंद कुमार का कहना है कि हर पल नदी

के बढ़ते जल स्तर पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि नहर विभाग के अधिकारियों से बात भी की गई है बताया जा रहा है कि रविवार से जल स्तर कम होने लगेगा। अगर पानी बढ़ता है तो फिर बाढ़ से निपटने के सारे संसाधनों का इस्तेमाल किया जाएगा।

मंदिर के डूबे घाट
सैदनगर कोटरा के पहाड़ों पर बेतवा नदी के किनारे स्थित रक्तदंतिका माता मंदिर के घाट डूब गए हैं। पानी ऊपर की ओर बढ़ रहा है। निचले इलाके के गांव में पानी पहुंचने लगा है। इसके अलावा इसी क्षेत्र के अक्षरा देवी माता मंदिर का संपर्क टूट गया है। सड़क पर पानी भरा हुआ है।

खेतों में घुसा, पानी फसल नष्ट
बेतवा नदी उफनाई तो हर ओर पानी ही पानी नजर आने लगा है। नदी के किनारे वाले क्षेत्र के खेतों से होकर पानी आगे की ओर बढ़ रहा है। इससे आसपास के इलाके में पानी ही पानी नजर आ रहा है। खेतों में जो फसल बोई गई थी वह भी डूब गई है।


बांध का पानी पहले भी कहर ढा चुका
वर्ष 2013 में करुई बांध के पानी ने यहां पर कहर ढाया था। कोंच का मलंगा नाला से लेकर शुरू हुआ बाढ़ का असर उरई में साफ तौर पर देखने को मिला था। इसमें जनहानि से लेकर बड़ी संख्या में नुकशान हुआ था। कई लोग बेघर हो गए थे, तो कुछ का ग्रहस्थी का सामान ही बह गया था।
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