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हड़ताल पर रहे बैंक कर्मी
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Mon, 28 Mar 2016 10:56 PM IST
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निजीकरण के विरोध में बैंक बंद कर नारेबाजी करते आईडीबीआई बैंक के कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्र सरकार द्वारा आईडीबीआई बैंक का निजीकरण किए जाने के प्रयास का कर्मचारियों ने विरोध किया। देशव्यापी हड़ताल के तहत सोमवार को शहर में भी बैंक बंद रखी गई और नारेबाजी कर सरकार से यह मांग की गई कि बैंक को निजी हाथों में न सौंपा जाए। हड़ताल के दौरान शाखा प्रबंधक मनोज खन्ना ने बताया कि केंद्र सरकार आईडीबीआई बैंक का
निजीकरण करने जा रही है। बैंक का निजीकरण होने से कर्मचारियों के साथ ही ग्राहकों का भी काफी नुकसान होगा। अगर बैंक का निजीकरण हो गया तो मैनेजमेंट मनमानी करेगा। साथ ही सरकारी योजनाओं में बैंक की भागीदारी खत्म हो जाएगी। आम आदमी की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने की गारंटी भी नहीं रहेगी। सीबीआई व सीवीओ की निगरानी बैंक से
खत्म हो जाएगी। इससे मैनेजमेंट की मनमानी और भी बढ़ेगी। जब आम आदमी की कमाई सुरक्षित रहने का भरोसा नहीं रहेगा तो जनता का बैंक से भरोसा भी खत्म होगा। उन्होंने कहा
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कि देश की संपत्ति पूंजीपतियों को बेचकर देश को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। हम यह कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह हड़ताल 31 मार्च तक चलेगी। हड़ताल के दौरान बैंक कर्मचारी सेवा एवं परिचालन प्रबंधक इरफान अहमद, सहायक प्रबंधक अनुराग दीक्षित, नवीन चौधरी, ज्योति सिंह आदि मौजूद रहीं।
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निजीकरण करने जा रही है। बैंक का निजीकरण होने से कर्मचारियों के साथ ही ग्राहकों का भी काफी नुकसान होगा। अगर बैंक का निजीकरण हो गया तो मैनेजमेंट मनमानी करेगा। साथ ही सरकारी योजनाओं में बैंक की भागीदारी खत्म हो जाएगी। आम आदमी की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने की गारंटी भी नहीं रहेगी। सीबीआई व सीवीओ की निगरानी बैंक से
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खत्म हो जाएगी। इससे मैनेजमेंट की मनमानी और भी बढ़ेगी। जब आम आदमी की कमाई सुरक्षित रहने का भरोसा नहीं रहेगा तो जनता का बैंक से भरोसा भी खत्म होगा। उन्होंने कहा
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कि देश की संपत्ति पूंजीपतियों को बेचकर देश को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। हम यह कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह हड़ताल 31 मार्च तक चलेगी। हड़ताल के दौरान बैंक कर्मचारी सेवा एवं परिचालन प्रबंधक इरफान अहमद, सहायक प्रबंधक अनुराग दीक्षित, नवीन चौधरी, ज्योति सिंह आदि मौजूद रहीं।