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Jalaun News: इंस्पेक्टर अरुण राय हत्याकांड में महिला सिपाही को जमानत
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फोटो - 09 मृतक इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय की फाइल फोटो।
फोटो - 10 आरोपी महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा।
- इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली राहत, करीब सात माह जेल में रही मीनाक्षी शर्मा
- पांच दिसंबर 2025 को
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। जालौन के बहुचर्चित कुठौंद थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय हत्याकांड में आरोपी महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति समीर जैन की एकल पीठ ने मामले के गुण-दोष के आधार पर उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली है। करीब सात माह से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद मीनाक्षी शर्मा की अब आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद रिहाई होगी।
पांच दिसंबर 2025 को कुठौंद थाने में तैनात थाना प्रभारी अरुण कुमार राय की सरकारी पिस्टल की गोली लगने से मौत हो गई थी। अगले दिन उनकी पत्नी माया राय ने महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा के खिलाफ हत्या का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने विवेचना के बाद 7 दिसंबर को मीनाक्षी शर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में जिला कारागार में हुए विवाद के चलते उन्हें झांसी जेल स्थानांतरित कर दिया गया जहां वह अब तक निरुद्ध है।
मीनाक्षी शर्मा की जमानत अर्जी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में 4 मई 2026 को सुनवाई हुई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने 22 जुलाई को मामले के मेरिट के आधार पर जमानत मंजूर कर ली। आदेश की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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383 पन्नों की चार्जशीट में 39 गवाह, वैज्ञानिक साक्ष्यों को भी बनाया गया आधार
इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय हत्याकांड की विवेचना पूरी करने के बाद पुलिस ने आरोपी महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा के विरुद्ध 383 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट जिला एवं सत्र न्यायालय में दाखिल की है। चार्जशीट में घटना से जुड़े परिस्थितिजन्य, दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ विवेचना के दौरान एकत्र किए गए सभी महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख किया गया है। अभियोजन पक्ष ने मामले को मजबूत करने के लिए 39 गवाहों को सूचीबद्ध किया है। इनमें पुलिस अधिकारी, घटनास्थल से जुड़े प्रत्यक्ष एवं परिस्थितिजन्य गवाह, फॉरेंसिक विशेषज्ञ, चिकित्सकीय अधिकारी तथा विवेचना से जुड़े अन्य अधिकारी शामिल हैं।
चार्जशीट में घटनास्थल से एकत्र किए गए भौतिक साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक एवं तकनीकी साक्ष्य, पुलिस विवेचना के दौरान दर्ज किए गए बयान तथा अन्य दस्तावेजों को भी शामिल किया गया है। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष अदालत के समक्ष अपना पक्ष रख रहा है।
ट्रायल जारी रहेगा, अंतिम फैसला सेशन कोर्ट में जारी रहेगा
हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद इस बहुचर्चित हत्याकांड का ट्रायल जिला एवं सत्र न्यायालय में जारी रहेगा। अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से गवाहों के बयान और साक्ष्य प्रस्तुत किए जा रहे हैं। मामले में दोषी या निर्दोष होने का अंतिम निर्णय ट्रायल कोर्ट साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही सुनाएगी।
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फोटो - 10 आरोपी महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा।
- इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली राहत, करीब सात माह जेल में रही मीनाक्षी शर्मा
- पांच दिसंबर 2025 को
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। जालौन के बहुचर्चित कुठौंद थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय हत्याकांड में आरोपी महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति समीर जैन की एकल पीठ ने मामले के गुण-दोष के आधार पर उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली है। करीब सात माह से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद मीनाक्षी शर्मा की अब आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद रिहाई होगी।
पांच दिसंबर 2025 को कुठौंद थाने में तैनात थाना प्रभारी अरुण कुमार राय की सरकारी पिस्टल की गोली लगने से मौत हो गई थी। अगले दिन उनकी पत्नी माया राय ने महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा के खिलाफ हत्या का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने विवेचना के बाद 7 दिसंबर को मीनाक्षी शर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में जिला कारागार में हुए विवाद के चलते उन्हें झांसी जेल स्थानांतरित कर दिया गया जहां वह अब तक निरुद्ध है।
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मीनाक्षी शर्मा की जमानत अर्जी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में 4 मई 2026 को सुनवाई हुई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने 22 जुलाई को मामले के मेरिट के आधार पर जमानत मंजूर कर ली। आदेश की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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383 पन्नों की चार्जशीट में 39 गवाह, वैज्ञानिक साक्ष्यों को भी बनाया गया आधार
इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय हत्याकांड की विवेचना पूरी करने के बाद पुलिस ने आरोपी महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा के विरुद्ध 383 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट जिला एवं सत्र न्यायालय में दाखिल की है। चार्जशीट में घटना से जुड़े परिस्थितिजन्य, दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ विवेचना के दौरान एकत्र किए गए सभी महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख किया गया है। अभियोजन पक्ष ने मामले को मजबूत करने के लिए 39 गवाहों को सूचीबद्ध किया है। इनमें पुलिस अधिकारी, घटनास्थल से जुड़े प्रत्यक्ष एवं परिस्थितिजन्य गवाह, फॉरेंसिक विशेषज्ञ, चिकित्सकीय अधिकारी तथा विवेचना से जुड़े अन्य अधिकारी शामिल हैं।
चार्जशीट में घटनास्थल से एकत्र किए गए भौतिक साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक एवं तकनीकी साक्ष्य, पुलिस विवेचना के दौरान दर्ज किए गए बयान तथा अन्य दस्तावेजों को भी शामिल किया गया है। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष अदालत के समक्ष अपना पक्ष रख रहा है।
ट्रायल जारी रहेगा, अंतिम फैसला सेशन कोर्ट में जारी रहेगा
हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद इस बहुचर्चित हत्याकांड का ट्रायल जिला एवं सत्र न्यायालय में जारी रहेगा। अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से गवाहों के बयान और साक्ष्य प्रस्तुत किए जा रहे हैं। मामले में दोषी या निर्दोष होने का अंतिम निर्णय ट्रायल कोर्ट साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही सुनाएगी।