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बुंदेलखंड के सभी किसानों के कर्ज करें माफ
अमर उजाला जालौन
Updated Tue, 11 Apr 2017 12:01 AM IST
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पत्रकारों से बात करते भाकियू प्रदेश अध्यक्ष जादौन।
- फोटो : अमर उजाला
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भाकियू प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह जादौन ने कहा कि बुंदेलखंड के किसानों की कर्जमाफी उनकी जोत के हिसाब से न आंकी जाए। यहां के सभी किसानों का कर्ज एक कलम से पूरा का पूरा माफ किया जाए। तब जाकर किसानों की दशा कुछ सुधर सकती है।
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पत्रकारों से बातचीत में भाकियू नेता ने कहा कि किसानों की कर्ज माफी का मुद्दा बुंदेलखंड के किसानों की हालत देखकर ही भाजपा ने संकल्प पत्र में रखा था। वादे के मुताबिक सरकार ने कैबिनेट की पहली ही बैठक में किसानों की कर्जमाफी का ऐलान कर स्वागत योग्य कदम उठाया है, लेकिन छोटी और बड़ी जोत जैसे शब्दों में किसानों को बांधकर देखना ठीक नहीं है। बताया कि बुंदेलखंड की अधिकांश जोत ऊबड़-खाबड़ है और यह बारिश पर निर्भर है।
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इसे ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश जोत सीमा अधिनियम 1971 में बुंदेलखंड के किसानों की असिंचित की जोत सीमा को 18 एकड़ के बजाय ढाई गुना अर्थात 45 एकड़ रखी गई है। मतलब बिल्कुल साफ है कि बुंदेलखंड में शेष प्रदेश के सापेक्ष ढाई गुना कम उत्पादकता है। कानूनन यहां के बड़े किसान भी अन्य प्रदेश के मुकाबले लघु और सीमांत किसानों से भी गए गुजरे हैं। यही वजह है कि बुंदेलखंड के सरकारी अनुदान वापस हो जाते हैं।
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बुंदेलखंड के समस्त किसानों की लघु एवं सीमांत जैसा वर्गीकरण खत्म कर पूरा कर्ज माफ करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन और ज्ञापनों के माध्यम से मुख्यमंत्री महोदय का ध्यान इस ओर खींचने के प्रयास चल रहे हैं। भाकियू प्रतिनिधिमंडल सीएम योगी से मुलाकात कर अपनी बात जोरदारी के साथ रखेगा। इस दौरान रामलखन इटा, तहसील अध्यक्ष चतुरसिंह, श्यामसुंदर, रामप्रताप, शारदा मास्टर, रामस्वरूप, डॉ. पीडी निरंजन, भगवानसिंह, केदारनाथ, प्रतापसिंह डाढी, जयराम सिंह, हरीराम, कौशल किशोर सहित तमाम पदाधिकारी मौजूद रहे।