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Jalaun News: ‘एक गांव ऐसा जहां रामायण कराते मुस्लिम, ताजिए में शरीक होते हिंदू’

Sat, 13 Jan 2024 01:16 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 13 Jan 2024 01:16 AM IST
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A village where Muslims perform Ramayana and Hindus participate in Tajiya.
उरई (जालौन)। जालौन जिले में एक गांव ऐसा भी है जहां सौहार्द भाव की अद्भुत परंपरा सालों से चली आ रही है। महेवा ब्लॉक के चुर्खी गांव में हर साल रामायण का पाठ होता है।
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दिलचस्प और प्रेरणादायक बात यह है कि नौ दिन होने वाली इस रामायण में सहयोगी की बड़ी भूमिका मुस्लिम धर्म गुरु और उनके समुदाय के लोग निभाते हैं। यही नहीं गंगा जमुनी की तहजीब में हिंदू परिवार भी पीछे नहीं है। वे भी मोहर्रम पर ताजिए में शरीक होकर करबला तक खुदा की याद में आंसू बहाते हैं। दावा है कि वर्षों से दो बड़े समुदायों का एक दूसरे की आस्था के प्रति यह सम्मान न ही आज तक कहीं सुना और न ही देखा गया।
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करीब एक हजार घरों वाले चुर्खी गांव में तकरीबन 30 फीसदी मुस्लिम परिवार रहते हैं। हर साल होने वाली रामायण उसी सौहार्द के साथ इस बार भी एक से नौ जनवरी तक हुई। यह गांव केवल इस अद्भुत धार्मिक कार्याें को लेकर ही अपनी पहचान अलग नहीं बनाता है। बल्कि पुर्खों की इस धरोहर को आंच न आए इसलिए गांव के बड़े, बुजुर्ग, धर्मगुरु और जनप्रतिनिधि हर वक्त सजग रहते हैं। कहीं भी देश में आतंकवादी हरकतें होती हैं या फिर हिंदू धर्म की विचारधाराओं को नुकसान पहुंचाने वाले अराजकतत्व सौहार्द बिगाड़ने का दुस्साहस करते हैं तो उसके प्रभाव से गांव को सुरक्षित करने के लिए एक संकल्प की तरह सभी दीवार बन जाते हैं। फौरन एकता विरोधी ताकतों के खिलाफ जागरूकता अभियान होता है। प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर अपने गांव में रामायण पाठ, कीर्तन व दीपोत्सव आदि में भी मुस्लिम परिवार बढ़ चढ़कर भाग ले रहे हैं।
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रामजी मंदिर के करीब ढाई बीघा क्षेत्रफल के मैदान में हर साल नए वर्ष पर 108 रामायण का पाठ नौ दिन चलता है। इसमें हम और हमारे समुदाय के लोग सहयोगी की भूमिका निभाते हैं। गांव में 10 दिन सौहार्द त्योहार के रूप में होते हैं। हमने ऐसी परंपरा और कार्य पूरे देश में कहीं नहीं सुना। प्राण प्रतिष्ठा दिवस पर मुस्लिम परिवार भी हिंदू परिवार के साथ हैं। -मुख्तार अहमद, धर्म गुरु, जामा मस्जिद चुर्खी



हिंदू परिवार मोहर्रम पर ताजिए में शरीक होते हैं और कर्बला तक खुदा की याद में आंसू भी बहाते हैं। चुर्खी गांव गंगा-जमुनी तहजीब का बड़ा उदाहरण है। मैं बचपन से इस एकता की मिसाल का साक्षी हूं। कभी किसी ने सौहार्द के इस अनूठे माहौल पर ध्यान ही नहीं दिया। अमर उजाला ने इस पर चर्चा की, इससे गांव के लोग और उत्साहित होंगे। -तुलसी राम अहिरवार, ग्राम प्रधान, चुर्खी
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