फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jalaun News ›   A fine of Rs 8.5 crore will have to be paid, the writ in the High Court was dismissed.

Jalaun News: भरना होगा साढ़े आठ करोड़ का जुर्माना, हाईकोर्ट में रिट खारिज

Fri, 19 Sep 2025 12:28 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 19 Sep 2025 12:28 AM IST
विज्ञापन
A fine of Rs 8.5 crore will have to be paid, the writ in the High Court was dismissed.
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कदौरा। नगर पंचायत कदौरा को पर्यावरणीय क्षति पहुंचाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट की डबल बेंच के न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार ने नगर पंचायत द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में नगर पंचायत ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लगाए गए 8.55 करोड़ रुपये के जुर्माने को रद्द करने की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि यह मामला पहले से ही एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) और सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए याचिका के क्षेत्राधिकार में दखल संभव नहीं है। इस आदेश के बाद नगर पंचायत पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का जुर्माना बरकरार रहेगा। हालांकि पंचायत के पास अभी भी एनजीटी या सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका करने का विकल्प बचा है।
विज्ञापन

वर्ष 2020 में एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) कोर कमेटी के सदस्य पुष्पेंद्र कुमार ने नगर पंचायत स्थित 12 बड़े तालाबों का निरीक्षण किया था।इस दौरान सभी तालाब गंदगी से पटे मिले और लगभग इनके आधे हिस्से में लोगों ने अतिक्रमण कर निर्माण करा लिया। उन्होंने एनजीटी, नई दिल्ली में दर्ज कराई शिकायत में बताया कि कदौरा क्षेत्र के तालाब प्रदूषित हो रहे हैं और अतिक्रमण की गिरफ्त में भी हैं। एनजीटी के निर्देश पर 17 फरवरी 2020 तत्कालीन डीएम मन्नान अख्तर ने जांच कमेटी गठित की। उच्च न्यायालय इलाहाबाद के पूर्व चीफ जस्टिस एसबीएस राठौर की अध्यक्षता वाली कमेटी में पूर्व केंद्रीय सचिव अनंत कुमार सिंह भी थे। कमेटी के सदस्यों ने भी मौके पर तालाबों को देखा था।
विज्ञापन
विज्ञापन

कमेटी ने जांच के बाद 28 फरवरी 2020 को डीएम को रिपोर्ट सौंपी और तालाबों से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। इसके बाद 23 जून 2020 को एनजीटी ने आगे की कार्रवाई और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए। 13 जनवरी 2021 को एनजीटी ने एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई। डीएम ने तालाबों से अतिक्रमण हटाने के लिए एसडीएम के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति गठित की। 25 मार्च 2021 को एनजीटी को रिपोर्ट दी गई कि अस्थायी अतिक्रमण हटा दिए गए।
इसी बीच नगर पंचायत ने आदेशों का पालन करने के लिए राज्य सरकार से 310.94 लाख रुपये की मांग की, ताकि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जा सके, लेकिन सरकार ने यह राशि स्वीकृत नहीं की।
17 फरवरी 2022 को पुनः आवेदन किया गया, मगर धन आवंटन नहीं हुआ। 10 अगस्त 2021 को नगर पंचायत ने संशोधित एक्शन प्लान डीएम को सौंपा, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने पर यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उसी दिन नगर पंचायत पर 1.82 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा दिया।
इसके बाद 25 अप्रैल 2025 को बोर्ड ने एक और आदेश जारी कर जुर्माना की राशि बढ़ाकर 8.55 करोड़ रुपये कर दिया। नगर पंचायत की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश पांडेय ने दलील दी कि बोर्ड को सीधे तौर पर जुर्माना लगाने का अधिकार नहीं है, बोर्ड केवल एनजीटी में आवेदन कर सकता है।

इस आधार पर जुर्माना अवैध बताते हुए उसे निरस्त करने की मांग की गई और हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के एक फैसले का हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया था कि बोर्ड सीधे दंड नहीं लगा सकता, लेकिन हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए साफ किया कि जब मामला पहले से एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है तो याचिका क्षेत्राधिकार में हस्तक्षेप संभव नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed