भगवान की भक्ति से मिलता है मोक्ष

Jalaun Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
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उरई (जालौन)। भगवान की भक्ति करने वाले व्यक्ति को मोक्ष मिलता है। आत्मा का संबंध परमात्मा से होता है। आत्मा अजर अमर है। आत्मा का स्वरूप एक बालक और वृद्ध में समान होता है। यह बात मंगलवार श्रीमद्भागवत कथा के छठवे दिन वृंदावन धाम से पधारे कथा वाचक पुरुषोत्तम शरण शास्त्री ने कही।
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शास्त्री जी ने कहा कि आत्मा कभी भोजन नहीं करती और न ही उसे भोजन की आवश्यकता होती है। आत्मा केवल भजन करती है यानी चिंतन करती है। जब गोपियों को अपने रूप का अहंकार हो गया तब भगवान श्रीकृष्ण गोपियों का अहंकार नष्ट करने के लिये अंतर्ध्यान हो गए। गोपियों ने उनका भजन करके उन्हें पुकारा तब वे प्रकट हुए। इसके बाद शास्त्री ने श्रीकृष्ण व रुक्मिणी विवाह की कथा का विस्तार से वर्णन किया। शास्त्री जी ने कहा जो मनुष्य धर्म को मानते हुये अच्छे कार्य करता है तथा भगवान का भजन करता है उसके पास हमेशा लक्ष्मी निवास करती है। जो बुरे काम करके लक्ष्मी को जबरन अपने पास लाता है। उसके पास लक्ष्मी हमेशा नहीं रहती। इसलिये मनुष्य को लक्ष्मी प्राप्ति के लिये भगवान का भजन करना चाहिए। नारायण को प्रसन्न रखना चाहिए, लक्ष्मी का हरण करके अपने घर में नहीं लाना चाहिए।
भगवान कृष्ण की बारात निकाली गई। इस अवसर पर श्रद्धालु महिलाओं ने विवाह गीत गाते हुए नृत्य किया। कथा के विश्राम पर राजेंद्र नीखरा, श्रीमती कमला नीखरा, संतोष नीखरा, मनोज नीखरा, प्रियंका गुप्ता, राममूर्ति गुप्ता, वरुण गुप्ता, आयुद गुप्ता आदि ने श्रीमद्भागवत पुराण की आरती की तथा भोग लगाकर श्रोताओं को प्रसाद वितरण किया।
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