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घरों की रसोई तक पहुंची मिलावट

Jalaun Updated Wed, 05 Nov 2014 05:30 AM IST
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उरई (जालौन)। सावधान, मिलावटखोरों की जड़ें लोगों के घरों तक पहुंच गई है। हरी सब्जी हो या फिर मिर्चा-मसाला, सरसों का तेल हो अथवा देशी या डालडा घी, सभी में जमकर मिलावट हो रही है। बाजारों में खुलेआम मिलावटी खाद्य पदार्थ सस्ते दामों में बेचे और खरीदे जा रहे हैं। हरी सब्जी में केमिकलयुक्त रंग की मिलावट तो विक्रेता दुकानों में बैठकर ही करते हैं। इसके बावजूद खाद्य विभाग आंखें मूंदे हुए है। होली और दीपावली पर्व पर ही विभाग को मिलावट की सुध आती है और अधिकारी व कर्मचारी अपनी जेबें भरने के लिए मिठाइयों की दुकानों की तरफ दौड़ पड़ते हैं। खानापूरी के नाम पर नमूने भी लिए जाते हैं, लेकिन रिपोर्ट कब आती है और कहां दब जाती है, कुछ पता नहीं चलता है। खाद्य विभाग का अभियान मिठाई तक ही सीमित रहता है। कभी भी हरी सब्जी, तेल मसालों की जांच नहीं की जाती है। यही वजह है कि मिलावटखोर बेखौफ हैं और लोगों को पैसे खर्च करने के बाद भी खाने, पीने की चीजें सही नहीं मिल रही हैं। खाद्य विभाग के अधिकारियों से पूछो तो कहते हैं कि मिठाइयों में ही मिलावट की शिकायतें अधिक आतीं हैं, इसलिए विभाग का ज्यादा ध्यान दूध, खोया और मिठाई में मिलावट पर रहता है, फिर भी समय समय पर अन्य खाद्य पदार्थों की भी जांच पड़ताल की जाती है।
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सब्जी ज्यादा ताजी हो तो भी रहें सतर्क
सुबह, दोपहर हो या फिर शाम, यदि सब्जी की दुकान में रखी परवल, भिंडी, तोरई, बैंगन, लौकी, शिमला मिर्च, टमाटर कुछ ज्यादा ही चमकदार नजर आएं तो समझिये कुछ गड़बड़ है। दुकानदार सब्जियों में चमक लाने के लिए टब में पानी भरकर उसमें रंग व केमिकल मिलाते हैं, फिर उसी जहरीले पानी में इन सब्जियों को डालकर उन्हें ताजा रंग व चमक दी जाती है। पूरे साल बेचे जाने वाले मटर केे दानों का खेल तो मिलावट पर ही केंद्रित है। मटर केे दानों को केमिकलयुक्त रंगों से रंग कर पैकिंग के साथ 10 से 20 रुपये किलो बेचा जा रहा है। बासी धनिया को भी रंगीन कर उसे ताजी धनिया की गड्डी में मिलाकर बेचा जाता है।

सरसों का तेल भी मिलावटी
हाथों में सरसों का तेल लेकर उसे सूंघे, यदि उससे तेज झाग आए तो खुश होने की वजह सोचने की जरूरत है, क्योंकि दुकानदार सरसों के तेल में भूसी के तेल की मिलावट कर रहे हैं। सरसों और भूसी के तेल को मिलाकर उसमें तेल का रंग और एसेंस का प्रयोग किया जाता है, जिससे सरसों का तेल एक दम शुद्ध प्रतीत होता है। इसके बाद 40 से 50 रुपये प्रति किलो के हिसाब से तैयार होने वाला सरसों का तेल बाजार में 90 से 95 रुपये किलो में बेचा जा रहा है।

सब्जी व गर्म मसाले भी अछूते नहीं
पिसी हल्दी 200 रुपये किलो तो खड़ी हल्दी बाजार में 230 रुपये प्रति किलो बिक रही है। इसी तरह खड़ी धनिया 100 रुपये किलो व पिसी 80 रुपये किलो। इन दामों से साफ है कि मिलावट का सिलसिला तेजी पर है। इसी मिलावटी पिसी हल्दी और धनिया को सब्जी व गर्म मसालों में भी मिलाकर बेचा जा रहा है। पिसी धनिया में मिर्चे की डंठल और लकड़ी का बुरादा पीस कर मिलाया जाता है, जबकि हल्दी को पीला करने के लिए उसमें केमिकलयुक्त रंग डाला जाता है। ठेलोें से लेकर परचून की दुकानों तक मेें हल्दी, धनिया, मिर्चा, काली मिर्च, सौफ इत्यादि में मिलावट की जा रही है। बेसन में चटरी, किनी, अरारोट मिलाया जा रहा है तो काली मिर्च में पपीते का बीज मिलाने के बाद उसे तेल से चमकदार किया जाता है। काली मिर्च की जांच के लिए उसे पानी से भरे गिलास में डालेंगे तो काली मिर्च नीचे बैठ जाएगी और पपीते का बीज पानी के ऊपर आ जाएगा।

लीवर, फेफड़े, हार्ट पर होता है असर
जिला अस्पताल के डा.एके सक्सेना का कहना है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट सेहत के लिए बेहद हानिकारक है। रोजाना शरीर में पहुंचने वाले खाद्य पदार्थ लीवर, फेफड़े और हार्ट पर सीधा प्रभाव डालते हैं। इनसे होने वाली बीमारी का पता भी काफी देर से चलता है। बच्चों के लिए तो मिलावटी खाद्य पदार्थ बेहद नुकसानदायक हैं। पेट की बीमारियां बढ़ने की वजह ही मिलावट है। मिलावटी पदार्थों में असली, नकली का फर्क करना खाने वालों के लिए भी काफी कठिन होता है। लिहाजा स्वाद लेेने के बाद महंगे इलाज के अलावा लोगों के पास और कोई रास्ता नहीं बचता है।

मिलावटखोरों को दी जाए फांसी
गोपालगंज निवासी विभा का कहना है कि खाने-पीने की चीजों में मिलावट करने वालों को तो फांसी की सजा होनी चाहिए। मिलावट के चलते घर-घर में बीमारियां फैल रही हैं।

ऐसे में किस पर करें भरोसा
शिवपुरी निवासी रजनी का कहना है कि वे तो काफी भरोसेमंद दुकानदार से सामान खरीदतीं हैं। यदि फिर भी मिलावट मिल रही है तो आप ही बताए, विश्वास किया भी जाए तो किस पर।

वर्जन--
ऐसा नहीं है कि खाद्य पदार्थों के नमूने नहीं लिए जाते हैं। सितंबर में नौ, अक्तूबर में 12 और नवंबर में अब तक तीन नमूने लिए जा चुके हैं। इनकी रिपोर्ट तीन माह में आ भी जाएगी। ये बात और है कि अभी तक सब्जियों की चेकिंग का अभियान नहीं चल सका है। जल्द ही सब्जियों की चेकिंग का अभियान भी चलाया जाएगा।
ओमप्रकाश, जिला खाद्य निरीक्षक
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