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कछुआ चाल से योजनाएं बदहाल
Jalaun
Updated Mon, 22 Sep 2014 05:31 AM IST
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उरई(जालौन)। करोड़ों रुपये की लागत से जिले में हो रहे विकास कार्यों में कार्यदायी संस्थाओं की सुस्ती से विकास दिखाई नहीं दे रहा। मौजूदा समय में एक करोड़ से अधिक बजट की 52 परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिनमें 10 परियोजनाएं ही पूर्ण हो पाईं। 42 परियोजनाएं अधूरी हैं। इनमें नदियों पर पुल निर्माण से लेकर ग्रामीण पेयजल परियोजना, महिला थाना निर्माण से लेकर स्वास्थ केंद्र निर्माण एवं अन्य कार्य हैं। जिन पर काम धीमी गति से हो रहा है।
जिले में एक करोड़ से अधिक बजट की 52 परियोजनाओं को पूर्ण करने का जिम्मा कार्यदायी संस्थाओं पर था, इसमें ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के द्वारा कोंच उरई मार्ग पर भदारी के सामने अंडा तक लेपन स्तर तक संपर्क मार्ग बनाया जाना था, जो पूर्ण हो गया। इसके अलावा अन्य संस्थाओं के काम अधूरे हैं। जलनिगम 555.17 लाख के बजट में सोमई, अंडा और बम्हौरी कला, पेयजल परियोजना पर काम कर रहा है। यह तीनों परियोजनाएं वर्ष 2013 में पूर्ण होनी थीं, लेकिन अभी तक पूरी नहीं हो पाई। बम्हौरी कला में 40 फीसदी तो अंडा में 60 और सोमई में 80 फीसदी काम हो पाया। उरई विकास प्राधिकरण कांशीराम योजना पर 3675.00 लाख के बजट से काम कर रहा है। इसमें द्वितीय चरण में कोंच में 756 और कालपी में 744 आवास बनने थे, लेकिन अभी तक कोंच के ही आवास पूर्ण हो पाए। कालपी में भी काम अधूरा है। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद 1527.17 लाख के बजट से माधौगढ़ में राजकीय पालीटेक्निक कालेज का निर्माण करा रहा है, जो 70 फीसदी ही पूरा हो पाया है। सिंचाई विभाग 2528.38 लाख के बजट में कुठौंद शाख प्रणाली की लाइनिंग एवं अन्य कार्य करा रहा है, जो अभी तक 50 फीसदी ही पूरा हो पाया। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम लिमिटेड 11064.95 लाख के बजट से सिम्हारा, पाल, सरैनी घाट, यमुना पुल नदी पर पुल, भीखेपुर, जहीखा घाट, कोटरा में बेतवा नदी पर पुल, उपरगिरामी सेतु सम्पार उरई राठ मार्ग पर काम कर रहा है। इन चार परियोजनाओं में से एक भी पूर्ण नहीं हो पाईं। सीएनडीएए झांसी यूनिट के द्वारा छह परियोजनाओं पर 2616.59 लाख के बजट से काम किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश समाज कल्याण निर्माण निगम के द्वारा रामपुरा व कालपी से आईटीआई में वर्कशाप का निर्माण कार्य 221.52 लाख के बजट में कराया जा रहा है। इसमें 50 फीसदी भी काम नहीं हो पा रहा है। पैक्स फेड की पांच परियोजनाएं भी अधूरी पड़ी हैं।
बजट के अभाव में बंद है कार्य
यूपी प्रोजेक्टर्स कारपोरेशन लिमिटेड यूनिट 12 उरई द्वारा जालौन में अग्निशमन केंद्र का निर्माण कराया जाना था। इसके लिए 189 लाख का बजट स्वीकृत हुआ था, लेकिन पूरा बजट ना मिलने से कार्य बंद हो गया। इसके अलावा उरई मे महिला थाने का निर्माण जालौन व सिरसा कलार में 80 व्यक्तियों के लिए बैरक का निर्माण कार्यदायी संस्था के द्वारा कराया जा रहा है, जो वर्ष 13 मार्र्च तक पूरा होना था, मगर एक वर्ष बीत जाने के बाद भी पूरा ना हो सका।
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पुनरीक्षित लागत के कारण अटक जाता काम
शासन से स्वीकृत परियोजनाओं पर काम करने के लिए कार्यदायी संस्थाओं को जिम्मेदारी सौंपी जाती है। लेकिन कार्यदायी संस्थाएं समय पर काम पूरा नहीं कर पातीं और फिर जब समयवाधि बढ़ जाती तो लागत खर्च में बढ़ोत्तरी का रोना शुरु कर देती, जिससे कई काम समय पूरे नहीं हो पाते हैं और कागजी कार्रवाई में उलझ कर रह जाती।
वर्जन-------------------
हर माह निर्माण कार्यों की समीक्षा कराई जाती है। इसमें कार्यदायी संस्थाओं को समय से काम पूरा करने के लिए निर्देशित किया जाता है। सीडीओ भी लगातार समीक्षा कर रहे हैं। इसके बावजूद कार्यदायी संस्थाएं काम तेजी से नहीं कर रहीं हैं, जिससे कई कार्य अधूरे हैं। इस पर शासन को पत्र लिखकर कार्यदायी संस्थाओं पर कार्रवाई की जाएगी।
रामगणेश, जिलाधिकारी
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जिले में एक करोड़ से अधिक बजट की 52 परियोजनाओं को पूर्ण करने का जिम्मा कार्यदायी संस्थाओं पर था, इसमें ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के द्वारा कोंच उरई मार्ग पर भदारी के सामने अंडा तक लेपन स्तर तक संपर्क मार्ग बनाया जाना था, जो पूर्ण हो गया। इसके अलावा अन्य संस्थाओं के काम अधूरे हैं। जलनिगम 555.17 लाख के बजट में सोमई, अंडा और बम्हौरी कला, पेयजल परियोजना पर काम कर रहा है। यह तीनों परियोजनाएं वर्ष 2013 में पूर्ण होनी थीं, लेकिन अभी तक पूरी नहीं हो पाई। बम्हौरी कला में 40 फीसदी तो अंडा में 60 और सोमई में 80 फीसदी काम हो पाया। उरई विकास प्राधिकरण कांशीराम योजना पर 3675.00 लाख के बजट से काम कर रहा है। इसमें द्वितीय चरण में कोंच में 756 और कालपी में 744 आवास बनने थे, लेकिन अभी तक कोंच के ही आवास पूर्ण हो पाए। कालपी में भी काम अधूरा है। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद 1527.17 लाख के बजट से माधौगढ़ में राजकीय पालीटेक्निक कालेज का निर्माण करा रहा है, जो 70 फीसदी ही पूरा हो पाया है। सिंचाई विभाग 2528.38 लाख के बजट में कुठौंद शाख प्रणाली की लाइनिंग एवं अन्य कार्य करा रहा है, जो अभी तक 50 फीसदी ही पूरा हो पाया। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम लिमिटेड 11064.95 लाख के बजट से सिम्हारा, पाल, सरैनी घाट, यमुना पुल नदी पर पुल, भीखेपुर, जहीखा घाट, कोटरा में बेतवा नदी पर पुल, उपरगिरामी सेतु सम्पार उरई राठ मार्ग पर काम कर रहा है। इन चार परियोजनाओं में से एक भी पूर्ण नहीं हो पाईं। सीएनडीएए झांसी यूनिट के द्वारा छह परियोजनाओं पर 2616.59 लाख के बजट से काम किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश समाज कल्याण निर्माण निगम के द्वारा रामपुरा व कालपी से आईटीआई में वर्कशाप का निर्माण कार्य 221.52 लाख के बजट में कराया जा रहा है। इसमें 50 फीसदी भी काम नहीं हो पा रहा है। पैक्स फेड की पांच परियोजनाएं भी अधूरी पड़ी हैं।
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बजट के अभाव में बंद है कार्य
यूपी प्रोजेक्टर्स कारपोरेशन लिमिटेड यूनिट 12 उरई द्वारा जालौन में अग्निशमन केंद्र का निर्माण कराया जाना था। इसके लिए 189 लाख का बजट स्वीकृत हुआ था, लेकिन पूरा बजट ना मिलने से कार्य बंद हो गया। इसके अलावा उरई मे महिला थाने का निर्माण जालौन व सिरसा कलार में 80 व्यक्तियों के लिए बैरक का निर्माण कार्यदायी संस्था के द्वारा कराया जा रहा है, जो वर्ष 13 मार्र्च तक पूरा होना था, मगर एक वर्ष बीत जाने के बाद भी पूरा ना हो सका।
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पुनरीक्षित लागत के कारण अटक जाता काम
शासन से स्वीकृत परियोजनाओं पर काम करने के लिए कार्यदायी संस्थाओं को जिम्मेदारी सौंपी जाती है। लेकिन कार्यदायी संस्थाएं समय पर काम पूरा नहीं कर पातीं और फिर जब समयवाधि बढ़ जाती तो लागत खर्च में बढ़ोत्तरी का रोना शुरु कर देती, जिससे कई काम समय पूरे नहीं हो पाते हैं और कागजी कार्रवाई में उलझ कर रह जाती।
वर्जन-------------------
हर माह निर्माण कार्यों की समीक्षा कराई जाती है। इसमें कार्यदायी संस्थाओं को समय से काम पूरा करने के लिए निर्देशित किया जाता है। सीडीओ भी लगातार समीक्षा कर रहे हैं। इसके बावजूद कार्यदायी संस्थाएं काम तेजी से नहीं कर रहीं हैं, जिससे कई कार्य अधूरे हैं। इस पर शासन को पत्र लिखकर कार्यदायी संस्थाओं पर कार्रवाई की जाएगी।
रामगणेश, जिलाधिकारी