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सभी समझें अपनी जिम्मेदारी, तभी होगा जल संरक्षण
Jalaun
Updated Sat, 14 Jun 2014 05:32 AM IST
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उरई (जालौन)। भारतीय सांस्कृतिक निधि के तत्वावधान में शुक्रवार को दयानंद वैदिक महाविद्यालय में आयोजित जल संरक्षण गोष्ठी में पानी की बर्बादी पर चिंता जताई गई। गोष्ठी में मौजूद कमोबेश सभी वक्ताओं का यही कहना रहा कि जब तक हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगा, तब तक पानी का संरक्षण नहीं हो सकता।
गोष्ठी के मुख्य वक्ता भूजल विशेषज्ञ एवं नाभिकीय अनुसंधान प्रयोगशाला नई दिल्ली के पूर्व निदेशक तथा एशियाई क्षेत्रीय जल संरक्षण योजना यूनैस्को के महासचिव डॉ. पार्थ सारथि दत्ता ने कहा कि हर साल बारिश से 4.57 हजार मिलियन क्यूविक पानी प्राप्त होता है। इसका 20 फीसदी पानी ही जमीन में जा पाता है और नदी नाले द्वारा समुद्र में चला जाता है। उन्होंने कहा कि हमारे देश का मुख्य व्यवसाय कृषि है। इसमें 80 से 90 फीसदी पानी की आपूर्ति भूजल से होती है। दस फीसदी पानी का प्रयोग कल कारखानों में होता है। कृषि को पानी मुहैया हो सके, इसके लिए शासन द्वारा बांध बनवाए गए । बाधों से जितना पानी छोड़ा जाता उसमें 15 फीसदी पानी ही कृषि उपयोग में आता है और 85 फीसदी पानी बर्बाद हो जाता है।
गोष्ठी में भूजल दोहन पर विस्तार से चर्चा हुई और जल संरक्षण के लिए आम आदमी के जागरूक होने की आवश्यकता बताई गई। कहा गया कि अब समय आ गया है कि सभी लोगों को अपने दायित्व समझना चाहिए। कालेज के प्रबंधक डॉ. देवेंद्र कुमार ने कहा कि जल ही जीवन है इन शब्दों को हर कोई याद रखे तो पानी की बर्बादी रुक सकती है। गोष्ठी में मुख्य वक्ता को इंटेक अध्याय के संयोजक हरी मोहन पुरवार ने सम्मानित किया। गोष्ठी में डॉ. राजेंद्र कुमार, डॉ. एमबी चतुर्वेदी, डॉ. जय श्री पुरवार, संध्या पुरवार, मोहित पाटकार, केपी सिंह व अय्यूब खान आदि मौजूद रहे।
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गोष्ठी के मुख्य वक्ता भूजल विशेषज्ञ एवं नाभिकीय अनुसंधान प्रयोगशाला नई दिल्ली के पूर्व निदेशक तथा एशियाई क्षेत्रीय जल संरक्षण योजना यूनैस्को के महासचिव डॉ. पार्थ सारथि दत्ता ने कहा कि हर साल बारिश से 4.57 हजार मिलियन क्यूविक पानी प्राप्त होता है। इसका 20 फीसदी पानी ही जमीन में जा पाता है और नदी नाले द्वारा समुद्र में चला जाता है। उन्होंने कहा कि हमारे देश का मुख्य व्यवसाय कृषि है। इसमें 80 से 90 फीसदी पानी की आपूर्ति भूजल से होती है। दस फीसदी पानी का प्रयोग कल कारखानों में होता है। कृषि को पानी मुहैया हो सके, इसके लिए शासन द्वारा बांध बनवाए गए । बाधों से जितना पानी छोड़ा जाता उसमें 15 फीसदी पानी ही कृषि उपयोग में आता है और 85 फीसदी पानी बर्बाद हो जाता है।
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गोष्ठी में भूजल दोहन पर विस्तार से चर्चा हुई और जल संरक्षण के लिए आम आदमी के जागरूक होने की आवश्यकता बताई गई। कहा गया कि अब समय आ गया है कि सभी लोगों को अपने दायित्व समझना चाहिए। कालेज के प्रबंधक डॉ. देवेंद्र कुमार ने कहा कि जल ही जीवन है इन शब्दों को हर कोई याद रखे तो पानी की बर्बादी रुक सकती है। गोष्ठी में मुख्य वक्ता को इंटेक अध्याय के संयोजक हरी मोहन पुरवार ने सम्मानित किया। गोष्ठी में डॉ. राजेंद्र कुमार, डॉ. एमबी चतुर्वेदी, डॉ. जय श्री पुरवार, संध्या पुरवार, मोहित पाटकार, केपी सिंह व अय्यूब खान आदि मौजूद रहे।
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