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नहरों में उड़ रही धूल, मवेशी प्यास से बेहाल
Jalaun
Updated Sat, 03 May 2014 05:30 AM IST
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कोंच(जालौन)। मई माह की शुरूआत में ही सूरज ने आग उगल कर आम जनजीवन को बेहाल कर रहा है, नहरों में अभी तक खैराती पानी नहीं छोड़े जाने से मवेशियों की हालत खराब है और उन्हें दूर तक पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। तमाम तालाब ऐसे हैं जिनमें पानी की एक बूंद भी नहीं है और न ही सरकारी मुलाजिम उन्हें भरवाने के प्रति गंभीर दिख रहे हैं। वैसे कोंच एवं नदीगांव विकास खंडों में तकरीबन चार सैकड़ा तालाब हैं। जिनमें अधिकांश में धूल उड़ रही है।
हर साल मवेशियों के लिये नहरों में खैराती पानी छोड़े जाने का चलन है ताकि उनके पानी से गांव गिरांवों के पोखर तालाब और तलैयों में पानी भरा जा सके और ढोर डंगरों के लिये पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके, लेकिन अबकी दफा शायद बांधों में ही पानी की हालत खराब है इसलिए नहरों में पानी छोड़े जाने की तरफ से ढिलाई बरती जा रही है। सैकड़ों की संख्या में बेजुबान पशु पक्षी काल के गाल में समा चुके हैं। प्यास के मारे जानवरों के हलक सूख रहे हैं और गला तर करने के लिए वे तालाबों में गड्ढों में जमा कीचड़ में मुंह मारने को मजबूर हैं।
कोंच विकास खंड में कुल 182 तालाब हैं जिसमें से 131 तालाबों को नहर से भरे जाने की व्यवस्था है, 11 तालाब नलकूपों से भरे जाते हैं, जबकि इस विकास खंड में 40 तालाबों का मुकद्दर ऐसा है जिन्हें भरने के वैकल्पिक साधन भी नहीं हैं, वे पूरी तरह से वर्षा जल पर ही निर्भर हैं। उधर, नदीगांव ब्लॉक के गांवों में कुल दो सौ तालाब हैं जिनमें 114 को नलकूपों या नहरों से भरने की व्यवस्था है लेकिन शेष 86 तालाबों की किस्मत बारिश के साथ बंधी है। आजकल इन तालाबों की स्थिति खराब है, एक तो इस विकास खंड का अधिकांश इलाका बीहड़ है जहां नहरों आदि का उतना संजाल नहीं है जितना कोंच विकास खंड में, ज्यादातर तालाब सूखे हैं और उनमें धूल उड़ रही है। इधर, भूगर्भ जल स्तर भी लगातार नीचे की ओर खिसक रहा है जिसके चलते घरों में लगे लगभग सभी हैंडपंप शोपीस बन चुके हैं और इंडिया मार्का सरकारी हैंडपंप जिनमें बल्लियां कम डाली गई हैं, दम तोड़ने की दिशा में आगे बढ रहे हैं। हैंडपंपों की इस हालत के कारण नगरीय और देहात इलाकों में भी पेयजल संकट खड़ा हो रहा है।
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हर साल मवेशियों के लिये नहरों में खैराती पानी छोड़े जाने का चलन है ताकि उनके पानी से गांव गिरांवों के पोखर तालाब और तलैयों में पानी भरा जा सके और ढोर डंगरों के लिये पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके, लेकिन अबकी दफा शायद बांधों में ही पानी की हालत खराब है इसलिए नहरों में पानी छोड़े जाने की तरफ से ढिलाई बरती जा रही है। सैकड़ों की संख्या में बेजुबान पशु पक्षी काल के गाल में समा चुके हैं। प्यास के मारे जानवरों के हलक सूख रहे हैं और गला तर करने के लिए वे तालाबों में गड्ढों में जमा कीचड़ में मुंह मारने को मजबूर हैं।
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कोंच विकास खंड में कुल 182 तालाब हैं जिसमें से 131 तालाबों को नहर से भरे जाने की व्यवस्था है, 11 तालाब नलकूपों से भरे जाते हैं, जबकि इस विकास खंड में 40 तालाबों का मुकद्दर ऐसा है जिन्हें भरने के वैकल्पिक साधन भी नहीं हैं, वे पूरी तरह से वर्षा जल पर ही निर्भर हैं। उधर, नदीगांव ब्लॉक के गांवों में कुल दो सौ तालाब हैं जिनमें 114 को नलकूपों या नहरों से भरने की व्यवस्था है लेकिन शेष 86 तालाबों की किस्मत बारिश के साथ बंधी है। आजकल इन तालाबों की स्थिति खराब है, एक तो इस विकास खंड का अधिकांश इलाका बीहड़ है जहां नहरों आदि का उतना संजाल नहीं है जितना कोंच विकास खंड में, ज्यादातर तालाब सूखे हैं और उनमें धूल उड़ रही है। इधर, भूगर्भ जल स्तर भी लगातार नीचे की ओर खिसक रहा है जिसके चलते घरों में लगे लगभग सभी हैंडपंप शोपीस बन चुके हैं और इंडिया मार्का सरकारी हैंडपंप जिनमें बल्लियां कम डाली गई हैं, दम तोड़ने की दिशा में आगे बढ रहे हैं। हैंडपंपों की इस हालत के कारण नगरीय और देहात इलाकों में भी पेयजल संकट खड़ा हो रहा है।
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