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अधिवक्ता कल्याण कोष को मिले बजट
Jalaun
Updated Wed, 29 May 2013 05:30 AM IST
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कोंच (जालौन)। बार कौंसिल ऑफ उप्र के आह्वान पर कोंच बार के अधिवक्ताओं ने सीएम को संबोधित आठ सूत्री मांग पत्र एसडीएम को सौंपा। उन्होंने अधिवक्ता कल्याण कोष में प्रति वर्ष दो सौ करोड़ रुपये बजट, वृद्ध वकीलों के लिये पेंशन योजना लागू करने की मांग उठाई।
बार संघ कोंच के अध्यक्ष राजेश मिश्रा के नेतृत्व में वकीलों ने मांग की कि लोकायुक्त की संस्था को मजबूत करते हुए इसे बहुसदस्यीय बनाया जाए। आर्थिक अनुसंधान पुलिस शाखा को इसके अधीन करते हुए प्रदेश में हुए भ्रष्टाचार की जांच कराकर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। वृद्ध अधिवक्ताओं को पेंशन, वकीलों की असमय मृत्यु पर कल्याणकारी ट्रस्ट द्वारा संचालित अधिवक्ता कल्याण योजना के अंतर्गत परिजनों को योजना की संपूर्ण राशि का भुगतान किया जाए। अधिवक्ता कल्याण योजना की परिपक्वता राशि डेढ़ से बढ़ाकर पांच लाख की जाए और हत्या के शिकार हुए अधिवक्ताओं के परिजनों को पचीस लाख रुपये का मुआवजा दिया जाये। स्नातक और शिक्षक विधान परिषद की ही भांति अधिवक्ता विधान परिषद सीट का भी गठन किया जाए।
साथ ही माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के अनुसार राजस्व न्यायालय के अधिकारियों का अलग से कैडर गठित किया जाए। अधिवक्ताओं को वरीयता दी जाए। इस दौरान रमेशचंद्र गौतम, सुनील लोहिया, अरविंद दीक्षित, शशांक मोहन श्रीवास्तव, विजय कुमार गोयल, संजीव तिवारी, नरेंद्र पुरोहित, ज्ञानेंद्र सेठ, नवल जाटव, राकेश तिवारी, आदि रहे।
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बार संघ कोंच के अध्यक्ष राजेश मिश्रा के नेतृत्व में वकीलों ने मांग की कि लोकायुक्त की संस्था को मजबूत करते हुए इसे बहुसदस्यीय बनाया जाए। आर्थिक अनुसंधान पुलिस शाखा को इसके अधीन करते हुए प्रदेश में हुए भ्रष्टाचार की जांच कराकर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। वृद्ध अधिवक्ताओं को पेंशन, वकीलों की असमय मृत्यु पर कल्याणकारी ट्रस्ट द्वारा संचालित अधिवक्ता कल्याण योजना के अंतर्गत परिजनों को योजना की संपूर्ण राशि का भुगतान किया जाए। अधिवक्ता कल्याण योजना की परिपक्वता राशि डेढ़ से बढ़ाकर पांच लाख की जाए और हत्या के शिकार हुए अधिवक्ताओं के परिजनों को पचीस लाख रुपये का मुआवजा दिया जाये। स्नातक और शिक्षक विधान परिषद की ही भांति अधिवक्ता विधान परिषद सीट का भी गठन किया जाए।
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साथ ही माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के अनुसार राजस्व न्यायालय के अधिकारियों का अलग से कैडर गठित किया जाए। अधिवक्ताओं को वरीयता दी जाए। इस दौरान रमेशचंद्र गौतम, सुनील लोहिया, अरविंद दीक्षित, शशांक मोहन श्रीवास्तव, विजय कुमार गोयल, संजीव तिवारी, नरेंद्र पुरोहित, ज्ञानेंद्र सेठ, नवल जाटव, राकेश तिवारी, आदि रहे।
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