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सेंट्रल बैंक से साढे़ अठारह लाख गायब
Jalaun
Updated Wed, 29 May 2013 05:30 AM IST
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जालौन। सेंट्रल बैंक जालौन में सोमवार को कैश मिलान के दौरान साढे़ अठारह लाख रुपये कम निकले से अफरातफरी मच गई। आलाधिकारियों के आदेश के बाद बैंक प्रबंधक ने रिपोर्ट दर्ज करा दी है। बैंक प्रबंधक ने कर्मचारी पर ही हेराफेरी की आशंका जताई है।
सेंट्रल बैंक जालौन के शाखा प्रबंधक केके गौतम सोमवार को बैंक के कैश का मिलान कर रहे थे तभी कै श में साढे़ अठारह लाख रुपये कम पाए गए। बैंक प्रबंधक ने अपने क्षेत्रीय प्रबंधक मिस्टर मैहर एवं मंडल प्रबंधक अजय व्यास को सूचना दी। दोनों अधिकारी बैंक पहुंचे और जांच के बाद कैश कम पाए जाने पर प्रबंधक को एफआईआर करने के निर्देश दिए। बैंक प्रबंधक ने अज्ञात लोगों के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है। कोतवाल नसीम खान का कहना है कि बैंक में कोई चोरी नहीं हुई है। लिहाजा यह उन्हीं के कर्मचारियों की हेराफेरी हो सकती है। वह जांच कर कार्रवाई करेंगे। उधर, मंडल प्रबंधक अजय व्यास ने भी बैंक के स्टाफ पर शक जाहिर किया है।
इसी तरह 2003-2005 में इलाहाबाद बैंक के बावई शाखा प्रबंधक शेर सिंह पर एक करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगा था। ये पिछले चार-पांच साल से जेल में है। पुलिस ने इन्हें माफिया भी घोषित कर दिया है। ये करीब 70 लोगों के साथ ग्रामीणों के अभिलेख तहसील से निकलवा कर गड़बड़ी करते थे। उनके नाम लोन लेकर फिर उन्हें रिकवरी नोटिस भिजवाते थे। इसमें कई किसान आत्महत्या भी कर चुके हैं।
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सेंट्रल बैंक जालौन के शाखा प्रबंधक केके गौतम सोमवार को बैंक के कैश का मिलान कर रहे थे तभी कै श में साढे़ अठारह लाख रुपये कम पाए गए। बैंक प्रबंधक ने अपने क्षेत्रीय प्रबंधक मिस्टर मैहर एवं मंडल प्रबंधक अजय व्यास को सूचना दी। दोनों अधिकारी बैंक पहुंचे और जांच के बाद कैश कम पाए जाने पर प्रबंधक को एफआईआर करने के निर्देश दिए। बैंक प्रबंधक ने अज्ञात लोगों के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है। कोतवाल नसीम खान का कहना है कि बैंक में कोई चोरी नहीं हुई है। लिहाजा यह उन्हीं के कर्मचारियों की हेराफेरी हो सकती है। वह जांच कर कार्रवाई करेंगे। उधर, मंडल प्रबंधक अजय व्यास ने भी बैंक के स्टाफ पर शक जाहिर किया है।
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इसी तरह 2003-2005 में इलाहाबाद बैंक के बावई शाखा प्रबंधक शेर सिंह पर एक करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगा था। ये पिछले चार-पांच साल से जेल में है। पुलिस ने इन्हें माफिया भी घोषित कर दिया है। ये करीब 70 लोगों के साथ ग्रामीणों के अभिलेख तहसील से निकलवा कर गड़बड़ी करते थे। उनके नाम लोन लेकर फिर उन्हें रिकवरी नोटिस भिजवाते थे। इसमें कई किसान आत्महत्या भी कर चुके हैं।
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