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शहीद के गांव में दिखा गम और गुस्सा
Jalaun
Updated Fri, 15 Mar 2013 05:31 AM IST
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जालौन। श्रीनगर के बेमिना में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए अवध बिहारी के गांव कुठौदा बुजुर्ग में गुरुवार को भी सन्नाटा पसरा रहा। लोगों से घिरे बैठे शहीद के पिता रामकुमार भले ही अपने दर्द को सीने में छिपाए हो लेकिन गला उनका भी बेटे की याद में भरभरा रहा था। अंदर महिलाओं का करुण कुंदन गूंज रहा था। आंगन में पुत्र वियोग में सुधबुध खो बैठी मां श्रीमती मालती देवी व अपना सुहाग उजड़ने की सोच से दहाडे़ मारकर रोती शहीद की बेवा उमा देवी का बुरा हाल था। गांव की महिलाएं उन्हें ढांढस बंधा रही थी। गुरुवार की देर रात शव आने की संभावना जताई जा रही है। हालत यह है कि पत्नी अपना सुधबुध खो चुकी है। बेटा कुलदीप और रामवीर भी सिर से पिता का साया उठने से दुखी हैं लेकिन हिम्मत इतनी की वह कभी मां को चुप कराते तो कभी बाबा को ढांढस बंधाते। यह देख वहां मौजूद लोगों की भी आंखें नम हो गईं।
इनसेट
अब तो आर-पार की जंग होनी चाहिए
उरई (जालौन)। श्रीनगर के बेमिना में बुधवार को आतंकी हमले में शहीद हुए कुठौदा बुजुर्ग निवासी अवध बिहारी के पिता रिटायर्ड टीचर राम कुमार ने कहा कि अब आर-पार की जंग होनी चाहिए। अमेरिका की तर्ज पर भारत सरकार भी पाकिस्तान में चलाए जा रहे आतंकी शिविरों को नष्ट करे।
उन्होंने कहा कि आतंकी हमारे देश में घुसकर जवानों को मौत के घाट उतार रहे हैं और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। उन्हें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है लेकिन सरकार की चुप्पी का दर्द भी है। क्योंकि सरकार को यह सोचना चाहिए कि जिनका जवान बेटा जाता है उसके दर्द का भी एहसास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी फौज द्वारा दो जवान हेमराज एवं सुधाकर का सिर काटकर ले जाना क्रूरतम घटना है और सरकार के विदेश मंत्री वहां के पीएम का स्वागत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की अगर यही नीतियां रहीं तो कोई भी मां-बाप अपने बेटे को फौज में नहीं भेजेगा।
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बाक्स-
देर रात तक आएगा शव
उरई। शहीद अवध बिहारी का शव देर रात तकरीबन 11 बजे तक गांव आएगा। इसकी जानकारी देते हुए एसपी राकेश शंकर ने बताया कि पहले जवान का शव विशेष विमान से लखनऊ आएगा। जिसके बाद सड़क के रास्ते उसके पैतृक गांव कुठौदा बुजुर्ग जाएगा। उन्होंने बताया कि गांव में सिपाही तैनात कर दिए हैं।
बाक्स-
बेटे के नाम पर रखा जाए गांव का नाम
उरई। शहीद अवध बिहारी के पिता व कुठौदा बुजुर्ग के ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से मांग की है कि उनके बेटा के नाम पर ही उनके गांव का नाम रखा जाए जिससे उसकी शहादत पर लोग गर्व कर सके।
बाक्स-
नहीं आए सत्ता पक्ष के माननीय
उरई। संकट की इस घड़ी में भले ही शहीद के परिजनों को अन्य दलों के लोग ढांढस बंधा रहे हैं लेकिन अब तक सपा विधायक दयाशंकर वर्मा, सपा सांसद घनश्याम अनुरागी आदि ने शहीद के गांव नहीं आए। यही नहीं जिला प्रशासन ने भी अब तक शहीद के परिजनों की सुध नहीं ली है जिससे ग्रामीणों में रोष है।
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शहीद अवध बिहारी का प्रोफाइल
नाम-अवध बिहारी परिहार
पिता-श्री रामकुमार
शिक्षा-बीए डीवी कॉलेज उरई
नौकरी-वर्ष 1988 में सीआरपीएफ में भर्ती
----------
शहीद फौजी को श्रद्धासुमन समर्पित किए
कोंच। जम्मू कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते समय शहीद हुए अवध विहारी सिंह को जालौन और देश की शान बताते हुए अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक संस्था भारत विकास परिषद् के जिलाध्यक्ष देवेंद्र कुमार द्विवेदी के आवास पर बैठक कर श्रद्धांजलि दी। कहा कि शहीद ने जिस जांबाजी से आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दिया वह गर्व की बात है। उनकी कुर्बानी बेकार नहीं जाएगी और एक न एक दिन आतंकवाद का खात्मा होकर रहेगा। अध्यक्षता गजराज सिंह सेंगर ने की। इस दौरान डॉ. दिनेश उदैनिया, प्रो. वीरेंद्र सिंह, रामशंकर छानी, अनिल कपूर स्वर्णकार, इंजी. राजीव रेजा, आदि रहे।
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अब तो आर-पार की जंग होनी चाहिए
उरई (जालौन)। श्रीनगर के बेमिना में बुधवार को आतंकी हमले में शहीद हुए कुठौदा बुजुर्ग निवासी अवध बिहारी के पिता रिटायर्ड टीचर राम कुमार ने कहा कि अब आर-पार की जंग होनी चाहिए। अमेरिका की तर्ज पर भारत सरकार भी पाकिस्तान में चलाए जा रहे आतंकी शिविरों को नष्ट करे।
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उन्होंने कहा कि आतंकी हमारे देश में घुसकर जवानों को मौत के घाट उतार रहे हैं और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। उन्हें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है लेकिन सरकार की चुप्पी का दर्द भी है। क्योंकि सरकार को यह सोचना चाहिए कि जिनका जवान बेटा जाता है उसके दर्द का भी एहसास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी फौज द्वारा दो जवान हेमराज एवं सुधाकर का सिर काटकर ले जाना क्रूरतम घटना है और सरकार के विदेश मंत्री वहां के पीएम का स्वागत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की अगर यही नीतियां रहीं तो कोई भी मां-बाप अपने बेटे को फौज में नहीं भेजेगा।
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देर रात तक आएगा शव
उरई। शहीद अवध बिहारी का शव देर रात तकरीबन 11 बजे तक गांव आएगा। इसकी जानकारी देते हुए एसपी राकेश शंकर ने बताया कि पहले जवान का शव विशेष विमान से लखनऊ आएगा। जिसके बाद सड़क के रास्ते उसके पैतृक गांव कुठौदा बुजुर्ग जाएगा। उन्होंने बताया कि गांव में सिपाही तैनात कर दिए हैं।
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बेटे के नाम पर रखा जाए गांव का नाम
उरई। शहीद अवध बिहारी के पिता व कुठौदा बुजुर्ग के ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से मांग की है कि उनके बेटा के नाम पर ही उनके गांव का नाम रखा जाए जिससे उसकी शहादत पर लोग गर्व कर सके।
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नहीं आए सत्ता पक्ष के माननीय
उरई। संकट की इस घड़ी में भले ही शहीद के परिजनों को अन्य दलों के लोग ढांढस बंधा रहे हैं लेकिन अब तक सपा विधायक दयाशंकर वर्मा, सपा सांसद घनश्याम अनुरागी आदि ने शहीद के गांव नहीं आए। यही नहीं जिला प्रशासन ने भी अब तक शहीद के परिजनों की सुध नहीं ली है जिससे ग्रामीणों में रोष है।
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शहीद अवध बिहारी का प्रोफाइल
नाम-अवध बिहारी परिहार
पिता-श्री रामकुमार
शिक्षा-बीए डीवी कॉलेज उरई
नौकरी-वर्ष 1988 में सीआरपीएफ में भर्ती
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शहीद फौजी को श्रद्धासुमन समर्पित किए
कोंच। जम्मू कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते समय शहीद हुए अवध विहारी सिंह को जालौन और देश की शान बताते हुए अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक संस्था भारत विकास परिषद् के जिलाध्यक्ष देवेंद्र कुमार द्विवेदी के आवास पर बैठक कर श्रद्धांजलि दी। कहा कि शहीद ने जिस जांबाजी से आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दिया वह गर्व की बात है। उनकी कुर्बानी बेकार नहीं जाएगी और एक न एक दिन आतंकवाद का खात्मा होकर रहेगा। अध्यक्षता गजराज सिंह सेंगर ने की। इस दौरान डॉ. दिनेश उदैनिया, प्रो. वीरेंद्र सिंह, रामशंकर छानी, अनिल कपूर स्वर्णकार, इंजी. राजीव रेजा, आदि रहे।