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खून देकर 45 बने महादानी
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Mon, 16 May 2016 11:03 PM IST
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जिला चिकित्सालय में रक्तदान शिविर में रक्तदान करते जगजीत सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला फाउंडेशन व पतंजलि योग समिति की ओर से रक्तदान शिविर सोमवार को जिला अस्पताल परिसर में आयोजित किया गया। जिलाधिकारी संदीप कौर और अपर जिलाधिकारी आनंद कुमार ने फीता काटकर शिविर का उद्घाटन किया। इसके बाद 11 बजे से दोपहर बाद तीन बजे तक 45 लोगों ने खून देकर महादानी बनने का गौरव प्राप्त
किया। कुछ लोग पहली बार खून दान कर रहे थे तो कई ने 5वी, 6वी और 10वीं बार रक्तदान किया। सभी का कहना रहा कि कि रक्तदान से से मन को शांति और खुशी मिलती है।
कार्यक्रम की शुरुआत जगजीत सिंह ने खून दानकर की। दोपहर बाद तक 45 रक्तदाताओं ने दूसरों की जान बचाने के लिए रक्तदान किया। डीएम व एडीएम ने कहा कि रक्तदान से
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एक नहीं बल्कि चार जानों को बचाने का काम आप सब कर रहे हैं। महादानियों को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से प्रशस्तिपत्र दिया गया। डीएम ने अमर उजाला फाउंडेशन व पतंजलि योग समिति को इस पुनीत काम के लिए बधाई दी। रक्तदाताओं को रक्त देने के बाद फलों का जूस पिलाया गया। लोगों ने भी फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना की। रक्तदान
के लिए 50 और लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया। इस मौके पर सीएमएस डा.वीवी आर्या, डा. अरविंद श्रीवास्तव, मान सिंह, प्रेम कुमार सिंह, शिखा श्रीवास्तव, अनीता के अलावा इं.राजीव गोयल, ममता स्वर्णकार, दीपक द्विवेदी, डा. शत्रुघन सिंह, हरिशरण सिंह, महेंद्र विक्रम आदि मौजूद रहे।
दंपति ने एक साथ किया रक्तदान
रक्तदान शिविर में महेंद्र विक्रम सिंह व उनकी पत्नी नीरजा सिंह ने एक साथ रक्तदान किया। यह पहला मौका नहीं है इसके पहले भी दोनों ने रक्तदान किया है। इनका कहना है, जब मौका मिलता रक्तदान जरूर करते हैं।
जाति धर्म का भेद खत्म करता है ब्लड - संदीप बत्रा
दस से अधिक बार रक्तदान कर चुके युवा समाजसेवी संदीप बत्रा का कहना है कि रक्तदान समाज से जाति-धर्म के भेदभाव को भी खत्म करता है। खून का कोई धर्म नहीं होता है। समाज में प्रेम और भाईचारे का संचार करने के लिए रक्तदान से बेहतर और कोई माध्यम हो ही नहीं सकता है।
15 बार कर चुके हैं ब्लड डोनेट
युवा आकाश सूरी का कहना है कि वे अब तक 15 मर्तबा रक्तदान कर चुके है। पहली मर्तबा जब उन्होंने एक जरूरतमंद को ब्लड दिया था, तो उसके परिवार वालों के चेहरों पर छाने वाली खुशी आज भी याद है। उसी खुशी को याद कर जब मौका मिलता है तब रक्तदान कर लेते हैं।
समाज में जागरूकता लाने की जरूरत
पतंजलि योग समिति के डा. रामप्रकाश द्विवेदी का कहना है कि जिस तरह अमर उजाला फाउंडेशन और पतंजलि समिति ने रक्तदान को लेकर जागरूकता फैलाने का काम किया है, ठीक वैसे ही अन्य संस्थाओं को भी इस नेक काम के लिए आगे आना चाहिए। ताकि खून की कमी के चलते किसी को अपनी जिंदगी से हाथ ना धोना पड़े।
-महिलाएं किसी से कम नहीं
रक्तदान करने के बाद उमा त्रिपाठी बोली कि महिलाएं जब किसी क्षेत्र में पुरुषों से कम नही हैं तो भला रक्तदान में कैसे पीछे रह सकती हैं। कहा कि उन्होंने कई महिलाओं को खून की कमी के चलते अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझते देखा है। तभी ठान लिया था कि कहीं पर भी मौका मिलेगा तो रक्तदान जरूर करेंगी और वह मौका अमर उजाला फाउंडेशन ने दिला भी दिया।
23 बार कर चुकी हैं महादान
23 बार रक्तदान कर चुकी शिक्षिका डा.ममता स्वर्णकार का कहना है कि रक्त का महत्व क्या होता है, यह किसी जरूरतमंद के तीमारदार से पूछिए। जब मौत से जूझते व्यक्ति को खून की आवश्यकता होती है, उनके परिजनों को लगता है किकहीं से किसी भी तरीके से खून का इंतजाम हो जाए। इसके लिए वह हर संभव प्रयास भी करती हैं।
यह बने महादानी
जगजीत सिंह, राजीव दोहरे, अनुराग पटेल, रूप कुमार तिवारी, अचुल रावत, आकाश, पवन कुमार, अनूप माहेश्वरी, प्रदीप कुमार जैन, विमल प्रताप सिंह, आकाश सूरी, अमन गुप्ता, उमा त्रिपाठी, अंकुर शर्मा, ईशान आब्दीन, डा. शत्रुघन सिंह राजपूत, अनिल पोरवाल, पंकज चावला, शुभम अग्रवाल, अभय सोनी, आदित्य राज, संदीप बत्रा, सोयल खान, अनस
अंसारी, विशाल शर्मा, मौसम वर्मा, सलिल तिवारी, कृष्ण कुमार कुशवाहा, हरीशरण विद्यार्थी, राहुल सोनी, नितिन गुप्ता, श्याम सोनी, अमित, रामहेत तिवारी, कपिल सोनी, शैलेंद्र सिंह, महेंद्र विक्रम सिंह, हरिश्चंद्र सिंह, अजय कुशवाहा, शैलेंद्र वर्मा, डा. रामप्रकाश द्विवेदी, गजेंद्र सिंह, नीरजा सिंह, तलहा मजहर, विजय कुमार, हरिशरण ने रक्तदान किया।
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किया। कुछ लोग पहली बार खून दान कर रहे थे तो कई ने 5वी, 6वी और 10वीं बार रक्तदान किया। सभी का कहना रहा कि कि रक्तदान से से मन को शांति और खुशी मिलती है।
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कार्यक्रम की शुरुआत जगजीत सिंह ने खून दानकर की। दोपहर बाद तक 45 रक्तदाताओं ने दूसरों की जान बचाने के लिए रक्तदान किया। डीएम व एडीएम ने कहा कि रक्तदान से
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एक नहीं बल्कि चार जानों को बचाने का काम आप सब कर रहे हैं। महादानियों को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से प्रशस्तिपत्र दिया गया। डीएम ने अमर उजाला फाउंडेशन व पतंजलि योग समिति को इस पुनीत काम के लिए बधाई दी। रक्तदाताओं को रक्त देने के बाद फलों का जूस पिलाया गया। लोगों ने भी फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना की। रक्तदान
के लिए 50 और लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया। इस मौके पर सीएमएस डा.वीवी आर्या, डा. अरविंद श्रीवास्तव, मान सिंह, प्रेम कुमार सिंह, शिखा श्रीवास्तव, अनीता के अलावा इं.राजीव गोयल, ममता स्वर्णकार, दीपक द्विवेदी, डा. शत्रुघन सिंह, हरिशरण सिंह, महेंद्र विक्रम आदि मौजूद रहे।
दंपति ने एक साथ किया रक्तदान
रक्तदान शिविर में महेंद्र विक्रम सिंह व उनकी पत्नी नीरजा सिंह ने एक साथ रक्तदान किया। यह पहला मौका नहीं है इसके पहले भी दोनों ने रक्तदान किया है। इनका कहना है, जब मौका मिलता रक्तदान जरूर करते हैं।
जाति धर्म का भेद खत्म करता है ब्लड - संदीप बत्रा
दस से अधिक बार रक्तदान कर चुके युवा समाजसेवी संदीप बत्रा का कहना है कि रक्तदान समाज से जाति-धर्म के भेदभाव को भी खत्म करता है। खून का कोई धर्म नहीं होता है। समाज में प्रेम और भाईचारे का संचार करने के लिए रक्तदान से बेहतर और कोई माध्यम हो ही नहीं सकता है।
15 बार कर चुके हैं ब्लड डोनेट
युवा आकाश सूरी का कहना है कि वे अब तक 15 मर्तबा रक्तदान कर चुके है। पहली मर्तबा जब उन्होंने एक जरूरतमंद को ब्लड दिया था, तो उसके परिवार वालों के चेहरों पर छाने वाली खुशी आज भी याद है। उसी खुशी को याद कर जब मौका मिलता है तब रक्तदान कर लेते हैं।
समाज में जागरूकता लाने की जरूरत
पतंजलि योग समिति के डा. रामप्रकाश द्विवेदी का कहना है कि जिस तरह अमर उजाला फाउंडेशन और पतंजलि समिति ने रक्तदान को लेकर जागरूकता फैलाने का काम किया है, ठीक वैसे ही अन्य संस्थाओं को भी इस नेक काम के लिए आगे आना चाहिए। ताकि खून की कमी के चलते किसी को अपनी जिंदगी से हाथ ना धोना पड़े।
-महिलाएं किसी से कम नहीं
रक्तदान करने के बाद उमा त्रिपाठी बोली कि महिलाएं जब किसी क्षेत्र में पुरुषों से कम नही हैं तो भला रक्तदान में कैसे पीछे रह सकती हैं। कहा कि उन्होंने कई महिलाओं को खून की कमी के चलते अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझते देखा है। तभी ठान लिया था कि कहीं पर भी मौका मिलेगा तो रक्तदान जरूर करेंगी और वह मौका अमर उजाला फाउंडेशन ने दिला भी दिया।
23 बार कर चुकी हैं महादान
23 बार रक्तदान कर चुकी शिक्षिका डा.ममता स्वर्णकार का कहना है कि रक्त का महत्व क्या होता है, यह किसी जरूरतमंद के तीमारदार से पूछिए। जब मौत से जूझते व्यक्ति को खून की आवश्यकता होती है, उनके परिजनों को लगता है किकहीं से किसी भी तरीके से खून का इंतजाम हो जाए। इसके लिए वह हर संभव प्रयास भी करती हैं।
यह बने महादानी
जगजीत सिंह, राजीव दोहरे, अनुराग पटेल, रूप कुमार तिवारी, अचुल रावत, आकाश, पवन कुमार, अनूप माहेश्वरी, प्रदीप कुमार जैन, विमल प्रताप सिंह, आकाश सूरी, अमन गुप्ता, उमा त्रिपाठी, अंकुर शर्मा, ईशान आब्दीन, डा. शत्रुघन सिंह राजपूत, अनिल पोरवाल, पंकज चावला, शुभम अग्रवाल, अभय सोनी, आदित्य राज, संदीप बत्रा, सोयल खान, अनस
अंसारी, विशाल शर्मा, मौसम वर्मा, सलिल तिवारी, कृष्ण कुमार कुशवाहा, हरीशरण विद्यार्थी, राहुल सोनी, नितिन गुप्ता, श्याम सोनी, अमित, रामहेत तिवारी, कपिल सोनी, शैलेंद्र सिंह, महेंद्र विक्रम सिंह, हरिश्चंद्र सिंह, अजय कुशवाहा, शैलेंद्र वर्मा, डा. रामप्रकाश द्विवेदी, गजेंद्र सिंह, नीरजा सिंह, तलहा मजहर, विजय कुमार, हरिशरण ने रक्तदान किया।