फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jalaun News ›   25 kg of a vine tomatoes

एक बेल में 25 किलो टमाटर

Wed, 07 Dec 2016 10:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
अमर उजाला ब्यूरो, उरई Updated Wed, 07 Dec 2016 10:49 PM IST
विज्ञापन
25 kg of a vine tomatoes
खेत में लहलहाती उन्नत प्रजाति के टमाटर की फसल। - फोटो : अमर उजाला
दैवी आपदा का शिकार बुंदेलखंड के किसानों का अब पारंपरिक खेती से मोह भंग हो रहा है। शायद यही वजह है कि अब यह किसान वैज्ञानिक खेती की ओर उन्मुख हो रहे हैं। डकोर विकास खंड के गांव मुहम्मदाबाद निवासी किसान मुजाहिद ने वैज्ञानिक विधि से अपने 12 बीघा खेतों में टमाटर की खेती शुरू की है। इसकी प्रेरणा उन्हें मध्य प्रदेश के शिवपुरी क्षेत्र के
विज्ञापन


किसान डॉ. एके जैन से मिली जो वहां करीब 200 बीघा क्षेत्र में टमाटर की उन्नत खेती कर रहे थे। इसके बाद मुजाहिद खुद छत्तीसगढ़ के जिला खंडवा के बड़वई क्षेत्र गए जहां उन्होंने न केवल टमाटर के बीज खरीदे बल्कि वहां के किसानों से खेत तैयार करने और इसकी खेती के अन्य गुर भी सीखे। यही नहीं, मुजाहिद ने खेती के पूर्व तिरुपति ग्रीन हाउस रिसर्च सेंटर में
विज्ञापन


अपने खेत की मिट्टी का परीक्षण भी कराया और रिसर्च सेंटर द्वारा प्राप्त आंकड़ों व भूमि के तत्वों की जानकारी के अनुसार ही टमाटर की उन्नत खेती के लिए अपने खेत को तैयार किया। वे बताते हैं कि उन्नत किस्म की इस प्रजाति में टमाटर का पौधा बेल की तरह बढ़ता है। जैसे-जैसे बेल बढे़गी, उसमें टमाटर लगते जाएंगे। टमाटर की बेल को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने बांस, बल्लियों का भी सहारा लिया है। उनके अनुसार यह पेड़ छह फुट तक का होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


एक पेड़ में 180 दिन में 25 किलो पैदावार
मुजाहिद ने बताया कि नई तरीके से बोई गई टमाटर की फसल लाभकारी साबित हो रही है। टमाटर की एक बेल में 180 दिनों में तीन बार फसल तोड़ी जाती है और करीब 25 किलो टमाटर की पैदावार हो जाती है। यह अपने आप में एक रिकार्ड है।

दो लाख रुपये के लाए थे पौधे
नई किस्म की यह फसल मध्यप्रदेश के शिवपुरी क्षेत्र में सबसे अधिक होती है। वहां का किसान कम पैसा खर्च कर अच्छा पैदावार कर रहा है। वहां से यहां प्रेरणा लेकर इस खेती को अपनाया और करीब दो लाख रुपये के पौधे खरीद कर लाए और 12 बीघा क्षेत्र में उसे लगवाया।


घाटे के चलते उठाया कदम
किसान ने बताया कि समय पर खाद, बीज और पानी न मिलने की वजह से रबी फसल में नुकसान हो रहा था। इतना हीं नहीं ओलावृष्टि, अतिवृष्टि मेें भी खासा घाटा हुआ है। उसकी भरपाई करने और नई किस्म की खेती करने के उद्देश्य से इस फसल को बोया हैं और फसल बेहतर भी होने की पूरी उम्मीद है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed