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24 घंटे होगी गंभीर रोगियों की जांच
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Tue, 04 Oct 2016 11:18 PM IST
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जिला अस्पताल के वार्ड की व्यवस्थाएं देखते सीएमएस।
- फोटो : अमर उजाला
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जिला अस्पताल में अब किसी भी वक्त गंभीर बीमारियों की जांच हो सकेगी। अभी तक यहां पर सुबह 8 से 11 बजे तक ही रक्त की जांच होती है। जांच वाले मरीजों को दूसरे दिन बुलाया जाता है। इससे कई मरीजों का इलाज शुरू नहीं हो पाता था। अमर उजाला के एक दिन पहले इस मुद्दे को उठाने बाद अब अस्पताल के सीएमएस ने गंभीर स्थिति में मरीजों के रक्त की
जांच चौबीस घंटे में कभी भी होने की बात कही है। हालांकि इसके लिए उनसे अनुमति लेना जरूरी होगा। मौसम में बदलाव के चलते जिला अस्पताल उरई में इन दिनों रोज 700 से 800 मरीज पहुंच रहे हैं। अस्पताल में हर जगह भीड़ है। बुखार, मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया की आशंका को देखते हुए चिकित्सक पहले मरीजों को ब्लड जांच के लिए लिखते हैं। इसके
बाद ही इलाज शुरू किया जाता है। लैब में सुबह 8 बजे से 11 बजे तक नमूने लिए जाते हैं। इसके बाद जांच का काम होता है। ऐसे में दूरदराज क्षेत्रों से जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की जांच नहीं हो पाती है। ऐसे में इलाज नहीं हो पाता है। इससे समय व पैसा बर्बाद कर गांव क्षेत्र से आए मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। प्राइवेट में इलाज व जांचें कराने को
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मजबूर होना पड़ता है। अमर उजाला में 4 अक्तूबर को प्रकाशित खबर को संज्ञान में लेते हुए सीएमएस ने जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं मौके पर जाकर देखीं। कर्मचारियों को मरीजों के
साथ अच्छा व्यवहार करने व सहानुभूति के साथ उपचार करने की हिदायत दी। सीएमएस जीके निगम ने कहा कि ब्लड व अन्य जांचों के मरीजों के लिए सुबह 8 से 11 बजे तक का समय निर्धारित हैै। इसकेे बाद भी यदि कोई गंभीर मरीज आता है तो उसके रक्त की जांच को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि उसका उपचार शुरू करने में दिक्कत पेश न आए।
ड्रिप लगी मरीज के पैदल जाने की खबर पर हड़कंप
जिला अस्पताल के इमरजेंसी से वार्ड तक ड्रिप लगे होने के बावजूद पैदल मरीज को ले जाए जाने और उसे स्ट्रेचर उपलब्ध न कराने की खबर पर भी जिला अस्पताल में हड़कंप मचा रहा। मंगलवार को जिला चिकित्सालय के सीएमएस जीके निगम ने खुद वार्डों और इमरजेंसी में जाकर व्यवस्थाएं परखीं। इस दौरान उन्होंने संबंधित कर्मचारियों व चिकित्सकों को आदेश
दिया कि मरीजों को किसी भी हाल में स्ट्रेचर उपलब्ध कराया जाए ताकि वार्ड तक जाने में उन्हें कोई दिक्कत का सामना न करना पड़े। इस दौरान उन्होंने कई मरीजों से बातचीत की और उनकी समस्याएं भी सुनीं।
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जांच चौबीस घंटे में कभी भी होने की बात कही है। हालांकि इसके लिए उनसे अनुमति लेना जरूरी होगा। मौसम में बदलाव के चलते जिला अस्पताल उरई में इन दिनों रोज 700 से 800 मरीज पहुंच रहे हैं। अस्पताल में हर जगह भीड़ है। बुखार, मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया की आशंका को देखते हुए चिकित्सक पहले मरीजों को ब्लड जांच के लिए लिखते हैं। इसके
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बाद ही इलाज शुरू किया जाता है। लैब में सुबह 8 बजे से 11 बजे तक नमूने लिए जाते हैं। इसके बाद जांच का काम होता है। ऐसे में दूरदराज क्षेत्रों से जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की जांच नहीं हो पाती है। ऐसे में इलाज नहीं हो पाता है। इससे समय व पैसा बर्बाद कर गांव क्षेत्र से आए मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। प्राइवेट में इलाज व जांचें कराने को
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मजबूर होना पड़ता है। अमर उजाला में 4 अक्तूबर को प्रकाशित खबर को संज्ञान में लेते हुए सीएमएस ने जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं मौके पर जाकर देखीं। कर्मचारियों को मरीजों के
साथ अच्छा व्यवहार करने व सहानुभूति के साथ उपचार करने की हिदायत दी। सीएमएस जीके निगम ने कहा कि ब्लड व अन्य जांचों के मरीजों के लिए सुबह 8 से 11 बजे तक का समय निर्धारित हैै। इसकेे बाद भी यदि कोई गंभीर मरीज आता है तो उसके रक्त की जांच को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि उसका उपचार शुरू करने में दिक्कत पेश न आए।
ड्रिप लगी मरीज के पैदल जाने की खबर पर हड़कंप
जिला अस्पताल के इमरजेंसी से वार्ड तक ड्रिप लगे होने के बावजूद पैदल मरीज को ले जाए जाने और उसे स्ट्रेचर उपलब्ध न कराने की खबर पर भी जिला अस्पताल में हड़कंप मचा रहा। मंगलवार को जिला चिकित्सालय के सीएमएस जीके निगम ने खुद वार्डों और इमरजेंसी में जाकर व्यवस्थाएं परखीं। इस दौरान उन्होंने संबंधित कर्मचारियों व चिकित्सकों को आदेश
दिया कि मरीजों को किसी भी हाल में स्ट्रेचर उपलब्ध कराया जाए ताकि वार्ड तक जाने में उन्हें कोई दिक्कत का सामना न करना पड़े। इस दौरान उन्होंने कई मरीजों से बातचीत की और उनकी समस्याएं भी सुनीं।