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बीमा कंपनी को दिया चार लाख रुपये क्लेम देने का आदेश
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उरई। बीमारी छिपाने की बात कहकर बीमा क्लेम देने से मना करने की दलील को जिला उपभोक्ता फोरम ने नकार दिया और वादी को चार लाख रुपये क्लेम नौ प्रतिशत ब्याज के साथ देने का आदेश दिया।
शहर के मोहल्ला राजेंद्रनगर शीतला माता मंदिर के पास की निवासी श्रीकुंवर पत्नी रामलखन प्रजापति ने उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया था। जिसमें बताया कि 28 अप्रैल 2012 को उनके पति रामलखन ने गांधी मार्केट स्थित एलआईसी से बीमा पालिसी ली थी, जिसमें 25,227 रुपये वार्षिक प्रीमियम जमा किया था। 4 नवंबर 2014 को ग्रांट मेडिकल कालेज एंड सर जेजे ग्रुप आफ हास्पिटल मुंबई में रामलखन को परिजनों ने भर्ती कराया। उसी दिन उनकी मृत्यु हो गई।
हालांकि पेशेंट हिस्ट्री में 12 साल पहले हार्ट अटैक आने की बात कही गई थी। इस आधार पर बीमा कंपनी ने क्लेम देने से इंकार कर दिया। बीमा कंपनी का कहना था कि बीमाकर्ता ने अपनी बीमारी छिपाई थी, लिहाजा उसे क्लेम का चार लाख रुपये नहीं दिया जा सकता है।
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इस पर वादी श्रीकुंवर ने 25 जुलाई 2016 को उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया। इस मामले में उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष जिष्णुकांत पांडेय व सदस्य रामबाबू निषाद ने कहा कि 12 साल पहले अटैक आने की बात कहकर दावा खारिज नहीं किया जा सकता है। फिर बीमा कंपनी के डाक्टर ने भी जांच की है। लिहाजा बीमा कंपनी पीड़िता को चार लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज की दर से भुगतान करें।
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शहर के मोहल्ला राजेंद्रनगर शीतला माता मंदिर के पास की निवासी श्रीकुंवर पत्नी रामलखन प्रजापति ने उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया था। जिसमें बताया कि 28 अप्रैल 2012 को उनके पति रामलखन ने गांधी मार्केट स्थित एलआईसी से बीमा पालिसी ली थी, जिसमें 25,227 रुपये वार्षिक प्रीमियम जमा किया था। 4 नवंबर 2014 को ग्रांट मेडिकल कालेज एंड सर जेजे ग्रुप आफ हास्पिटल मुंबई में रामलखन को परिजनों ने भर्ती कराया। उसी दिन उनकी मृत्यु हो गई।
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हालांकि पेशेंट हिस्ट्री में 12 साल पहले हार्ट अटैक आने की बात कही गई थी। इस आधार पर बीमा कंपनी ने क्लेम देने से इंकार कर दिया। बीमा कंपनी का कहना था कि बीमाकर्ता ने अपनी बीमारी छिपाई थी, लिहाजा उसे क्लेम का चार लाख रुपये नहीं दिया जा सकता है।
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इस पर वादी श्रीकुंवर ने 25 जुलाई 2016 को उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया। इस मामले में उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष जिष्णुकांत पांडेय व सदस्य रामबाबू निषाद ने कहा कि 12 साल पहले अटैक आने की बात कहकर दावा खारिज नहीं किया जा सकता है। फिर बीमा कंपनी के डाक्टर ने भी जांच की है। लिहाजा बीमा कंपनी पीड़िता को चार लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज की दर से भुगतान करें।