ये फिल्मी नहीं, रियल पीपली लाइव है
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गंगा के किनारे शोक में डूबे कटरी के इस गांव में पीपली लाइव जैसी किसी फिल्म की शूटिंग नहीं हो रही है लेकिन गांव का नजारा देखकर लगता है कि हम किसी फिल्मी पीपली गांव में आ गए हैं।
एक सहमा सा पीड़ित परिवार जैसे सबके लिए खिलौना सा बन गया है। क्रूरतम तरीके से किए गए बलात्कार के बाद दो किशोरियों को पेड़ पर लटका देने की दर्दनाक कहानी के सिरे तो मिल गए हैं लेकिन बीच का हिस्सा गायब है।
लगता है कि इसे गायब करने की साजिश चल रही है ताकि पूरा सच सामने न आ सके। देश विदेश के मीडिया वाले, तमाम दलों के नेता, स्वयंसेवी संगठनों का मजमा लगा हुआ हैं। विदेशी मीडिया के लिए अब बड़ा मुद्दा गांव में शौचालयों का न होना है तो भारतीय मीडिया नेताओं के बयान ले रहा है।
जख्म कुरेदे जा रहे हैं बार-बार
पीड़ित परिवार के कच्चे घर के आंगन से भीड़ छंटती नहीं। एक जत्था लौटता है, दूसरा आ धमकता है। मीडिया के माइक और कैमरे चालू हैं। एक बच्ची का पिता बीच में बैठा सबके सवालों के जवाब दिए जा रहा है।
बीच बीच में उनींदी आंखें झपकी लेने लगती हैं। बार-बार जख्म कुरेदे जा रहे हैं। कोई दल नहीं छूटा। सुबह से बैठी कुछ महिलाएं थक गई हैं। ये सोचकर कुछ और महिलाएं वहां आकर उन्हें हटाकर खुद बैठ जाती हैं।
बच्चियों की मांएं अंदर कमरे में हैं। उनके आंसुओं और उनकी पीड़ा के अलावा यहां बहुत कुछ है जो असली सा नहीं लग रहा है। बाहर हो रहे सवाल और उनके जवाब भी। क्षेत्रीय बसपा विधायक सिनोद शाक्य ने 10 लाख रुपये पीड़ित परिवार के खाते में जमा करा दिए हैं। मंगलवार को भाजपा के बड़े नेता भी दस लाख दे गए हैं।
इसी बीच बड़ी लड़की का पिता पास के एक घर में जाकर एक आस्ट्रेलियन पत्रकार को दूभाषिए के जरिए इंटरव्यू देने चला जाता है। कुछ देर पहले ही एक और गोरी मेम अलजजीरा के लिए इंटरव्यू करने आई थी। अब वह खेतों में फाइनल शूट कर रही हैं। इन्हें इंडियन नेताओं की बाइट्स में कोई दिलचस्पी नहीं। गांव की गलियां और शौच से भरे रास्ते शूट कर रही हैं।
हादसे वाले पेड़ के नीचे प्रेस कांफ्रेंस
जिस पेड़ पर बच्चियों को फांसी दी गई थी वहां प्रेस कांफ्रेंस हो रही हैं, वहीं ओबी वैन लगी है। एक पेड़ के नीचे अल्लापुर के लोगों ने तिरपाल बिछाई है, वहां कई लोग बैठे हैं बाकी टहल रहे हैं।
गांव के बच्चे दूसरे पेड़ की डालियों पर चढ़ रहे हैं लेकिन उस मनहूस पेड़ पर नहीं। ये बाग पीड़ित परिवार का ही है। पास में उनके खेतों में खड़ा मैथा भीड़ ने बुरी तरह कुचल दिया है।
आरोपियों के घर पर सब कुछ अस्त व्यस्त पड़ा है
आरोपियों के घर में अनाज, कपड़े बर्तन सब कुछ बिखरा पड़ा है। ऐसा लगता है सब जल्दबाजी में भागे। पुलिस ने पहले गांव वालों के कहने पर तीन भाइयों को पकड़ा, फिर दो को छोड़ दिया।
जोर पड़ा तो उन दो को भी ले आए। सिपाही सर्वेश इस घर के सदस्य की तरह था। ये बात तो साबित हो रही है कि आरोपित परिवार पर पुलिस मेहरबान रही लेकिन कहानी पीड़ित पक्ष के चश्मदीदों ने भी इतनी उलझा दी है कि सच तक पहुंचना टेढ़ी खीर बन गया है।
पुराने एसओ जांच कर रहे हैं
उसहैत के एसओ गंगा सिंह यादव अब तक हटे नहीं हैं। घटना स्थल के पास बनी पीड़ित भाइयों की फूस की दो झोपड़ियों के बीच गांव के कर्मवीर के बयान ले रहे थे। उसने जो कहानी बताई उसका इशारा ऑनर किलिंग की ओर था।
जब पूछा कि तो क्या बलात्कार भी पीड़ित पक्ष ने खुद कराया तो चुप हो गए। बोले किसने किया यही तो जांच कर रहे हैं। चौकी में नई टीम आ गई है। इस बार कोई भी यादव नहीं है।