मुजफ्फरनगर दंगे: छह हजार में से 2200 के नाम फर्जी
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दंगे के मुकदमों में 6000 से अधिक लोगों की नामजदगी में एसआईटी की जांच के बाद 2200 आरोपियों के नाम फर्जी पाए गए हैं। 535 मामलों की तफ्तीश में अब करीब 3800 ही जांच के दायरे में रह गए हैं।
इनमें से 1100 लोगों पर आरोप साबित हो चुके हैं, जिनमें 940 की गिरफ्तारी के आदेश दिए गए हैं। छह माह पूर्व जिले में भड़की हिंसा के बाद दर्ज मुकदमों की तफ्तीश में एसआईटी की जांच अंतिम दौर में है।
1100 पर आरोप तय
दंगे में फर्जी नामजदगी को लेकर सरकार निशाने पर है। छह हजार से अधिक की नामजदगी में एसआईटी ने 2200 आरोपियों को फर्जी पाया है।
दंगा मामलों में ऐसे 3800 लोग चिह्नित किए गए हैं, जिन पर दंगा भड़काने, हत्या, लूटपाट और आगजनी जैसी संगीन वारदातों में शामिल रहने का शक है। जांच के बाद अभी तक एसआईटी इनमें से 1100 लोगों पर आरोप तय कर चुकी है।
224 आरोपियों पर हुई कार्रवाई
शाहपुर, भौराकलां, फुगाना, बुढ़ाना, मीरापुर, भोपा, तितावी, मंसूरपुर, खतौली और रतनपुरी इलाके में हुई दंगे की वारदात में शामिल 940 की गिरफ्तारी के आदेश संबंधित थानों को दे दिए गए हैं।
449 आरोपियों के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके हैं, जबकि 248 के खिलाफ चार्जशीट लगाई गई है। अभी तक 224 लोगों के खिलाफ 82 की कार्रवाई अमल में लाई जा चुकी है। हालांकि पुलिस के लिए आरोपियों की गिरफ्तारी जी का जंजाल बनी हुई है।
वादी-गवाह नदारद, लटकी जांचें
दंगे के बाद दर्ज मुकदमों में अधिकांश की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। ऐसे ही मामले अधर में लटके हैं, जिनके वादी और गवाह ढूंढे नहीं मिल रहे हैं।
एसआईटी के एएसपी मनोज कुमार झा ने बताया कि कई थानों के मुकदमों में वादी और गवाह को जांच के लिए बुलाने की सूचना दी गई है। बीते छह माह में बार-बार अवगत कराने के बावजूद वादी और गवाह नहीं पहुंच पा रहे हैं।