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तो कैसे बचेगी आईएएस फैक्ट्री की शान

Wed, 04 Dec 2013 01:40 AM IST
अमर उजाला, इलाहाबाद
अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Wed, 04 Dec 2013 01:40 AM IST
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how to survive the IAS pride factory

दो साल पहले जब आईएएस में इलाहाबाद से 71 मेधावियों ने सफलता अर्जित की तो बड़े जोर-शोर से कहा गया कि यह परंपरा आने वाले दिनों में और आगे बढ़ेगी। कहा गया कि इलाहाबाद से आईएएस बनने के मामले में 80 के दशक का दौर क्या फिर लौटेगा।

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लेकिन पूर्वांचल समेत पूरे प्रदेश से यह सपना लेकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय तथा संघटक कालेजों में दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं में घोर निराशा है। हास्टलों में अराजकता तथा अवैध कब्जे के कारण पढ़ाई का माहौल गायब है।
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विश्वविद्यालय और कालेजों में कक्षाएं नहीं चल रही हैं। छात्रसंघ भी अराजक हो गया है तथा छात्र आमने-सामने हैं। अब तो अराजक तत्वों के निशाने पर शिक्षक भी हैं। इलाहाबाद डिग्री कालेज के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शिक्षकों को भी अराजक तत्वों ने कमरे में बंद करके पीटा।
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आलम यह है कि अब शिक्षकों को छात्रों के खिलाफ आंदोलन करना पड़ रहा है। आईएएस-पीसीएस में सीसैट लागू होने तथा अन्य बदलाव के बाद यहां के प्रतियोगियों की उड़ान पर पहले से ही ब्रेक लगा हुआ है, इस परिस्थिति ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ऐसे में एक समय देश को सबसे अधिक आईएएस देने वाली इस ‘फैक्ट्री’ की शान पर भी सवाल खड़ा हो गया है।

विश्वविद्यालय के शिक्षक तय करते हैं कि आने वाले दिनों में आईएएस और पीसीएस में किन विषयों का दबदबा होगा। विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र, इतिहास, भूगोल आदि विषयों के शिक्षकों की ख्याति पूरे देश में है। यही कारण है कि आईएएस-पीसीएस में भी इन विषयों का दबदबा कायम है।

विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं अब यूजीसी-नेट तथा सीएसआईआर-नेट में भी सफलता का नया आयाम स्थापित कर रहे हैं लेकिन परिसर की अराजकता ने सभी की उम्मीदों को तगड़ा झटका दिया है। इस सत्र में विश्वविद्यालय में शिक्षकों पर चार बार हमला हो चुका है।

अपमानित तो कई बार होना पड़ा। स्थिति यह हो गई है कि 20 साल बाद शिक्षकों को मंगलवार को रोड शो तक करना पड़ा। प्रतियोगी राहुल त्यागी, रोशन सिंह का कहना है कि शहर से आइएएस, पीसीएस में सफल होने वाले प्रतियोगियों में हास्टल की भागीदारी अधिक रही है।

बघाड़ा के आशीष, रोहित माथुर का कहना है कि यही कारण है तैयारी के लिए वे कई बार हास्टल में जाकर रुकते हैं। वहां सफल लोगों तथा वरिष्ठ प्रतियोगियों का मार्गदर्शन भी प्राप्त होता है लेकिन पिछले चार दिनों में ही हास्टल में मारपीट की तीन घटनाएं हो चुकी हैं। इससे पहले छात्रसंघ चुनाव के कारण पढ़ाई नहीं हुई।

अराजकता की यह स्थिति विगत चार वर्षों से है। इसका असर यह रहा कि पिछले साल आईएएस के फाइनल रिजल्ट में हास्टल खाली रहा। आईएएस फैक्ट्री के नाम से मशहूर एएन झा से भी सिर्फ एक अंत:वासी को सफलता मिली।

परिसर तथा हास्टलों में अराजकता के कारण आईएएस, पीसीएस की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में भी सफल होने वालों का ग्राफ तेजी से गिरा है। पीसीएस 2007 के टॉपर पुष्पराज सिंह का कहना है कि  विश्वविद्यालय हमेशा से ही प्रतियोगियों के आकर्षण का केंद्र रहा है। यह सब दिशा में नहीं जा रहा है। इससे विश्वविद्यालय और शहर दोनों की साख खतरे में है।


विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी का कहना है कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। इससे विश्वविद्यालय ही नहीं समाज पर भी बुरा असर देखने को मिलेगा। इसलिए विश्वविद्यालय को बचाने के लिए सभी को आगे आना होगा।

0 सीसैट तथा अन्य बदलावों से परेशान प्रतियोगियों की विवि में अराजकता से और बढ़ी मुश्किलें
0 एक महीने में ही शिक्षकों पर चार बार हमले, 20 साल बाद सड़कों पर मार्च करने को हुए मजबूर
0 प्रशासनिक असफलता से हास्टलों में भी अराजकता, रिकार्ड सफलता के बाद बनी उम्मीदों को झटका
0 पिछले साल हास्टल से नहीं निकले आईएएस, प्रारंभिक परीक्षा में भी सफलता का तेजी से गिरा ग्राफ

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