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देवरिया कांड: आखिर एक सिलाई केंद्र चलाने वाली साधारण सी महिला कैसे बन गई करोड़ों की मालकिन

Thu, 09 Aug 2018 04:23 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवरिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवरिया Updated Thu, 09 Aug 2018 04:23 PM IST
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How did girija tripathi became millionaire to running a sewing center

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में एक सिलाई केंद्र चलाने वाली सामान्य सी महिला गिरिजा त्रिपाठी आखिर करोड़ों की मालकिन कैसे बन गई? ये सबसे बड़ा सवाल है। पैसों की लालच में मां विन्ध्यवासिनी शेल्टर होम की प्रभावशाली मैनेजर बन गिरिजा त्रिपाठी ने खूब पैसे कमाए। बता दें कि इस शेल्टर होम पर सेक्स रैकेट चलाने का आरोप है। 

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शेल्टर होम की मैनेजर गिरिजा त्रिपाठी (50 वर्ष) का जन्म खुखुंडू पुलिस स्टेशन के रूपाई गांव में हुआ था। उसकी शादी देवरिया के नूनख्वार गांव के मोहन त्रिपाठी से हुई थी। मोहन भटनी शुगर मिल में एक छोटा कर्मचारी था, जबकि गिरिजा अपनी आर्थिक स्थित ठीक करने के लिये सिलाई केंद्र चलाती थी।
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गिरिजा को अपनी ताकत का एहसास तब हुआ जब भटनी शुगर मिल के प्रबंधन से अपने पति की नौकरी के लिये संघर्ष किया। भटनी के रहने वाले राजेश कुमार ने बताया कि 'शुगर मिल की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण मोहन की नौकरी चले जाने का खतरा उत्पन्न हो गया, तब गिरिजा ने मिल प्रबंधन के खिलाफ जबरदस्त धरना प्रदर्शन किया और आखिर में मिल प्रबंधन को झुकना पड़ा।' 
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भटनी में प्रौढ. शिक्षा केंद्र बनने पर वह प्रशासनिक अधिकारियों के संपर्क में आई और वह प्रौढ. लोगों को प्रशिक्षण भी देने लगी। बाद में देवरिया चली आयी और यहां रेलवे स्टेशन रोड पर मां विन्ध्यवासिनी सेवा संस्थान नामक शेल्टर होम और स्वयंसेवी संस्था चलाने लगी।

करीब दो दशक तक गिरिजा ने काफी पैसा कमाया और उसने गोरखपुर में एक वृध्दा आश्रम खोल दिया। इसके अलावा देवरिया के राजला इलाके और रेलवे स्टेशन रोड पर शेल्टर होम भी चलता रहा। उसकी बड़ी बेटी कनकलता फिलहाल पुलिस हिरासत में है और वह जिला प्रोबेशन अधिकारी गोरखपुर में संविदा पर काम करती है। उसका बेटा एक शिक्षित अध्यापक है, जबकि छोटी बेटी कंचनलता देवरिया के शेल्टर होम की अधीक्षिका थी।


गिरिजा के देवरिया में शेल्टर होम खोलने के साथ ही उसके काफी रसूखदार लोगों से संबंध हो गये। इसके सबूत वो फोटोग्राफ हैं, जिसमें वो नेताओं और अधिकारियों के साथ दिख रही है। उसकी स्वयंसेवी संस्था का लाइसेंस 2017 में समाप्त हो गया था, इसके बावजूद प्रशासन उसे अनेक सरकारी कार्यक्रमों में आमंत्रित करता रहा। यहां तक कि इस वर्ष नौ फरवरी को आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में भी उसे बुलाया गया था।

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