फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   hormones are causes of love

मुहब्बत का 'राज' बोले तो 'केमिकल लोचा'

Thu, 14 Feb 2013 10:30 AM IST
अजय दुबे/आगरा
अजय दुबे/आगरा Updated Thu, 14 Feb 2013 10:30 AM IST
विज्ञापन
hormones are causes of love

जब बाजार और बहुत से युवा वेलेंटाइन वीक मनाने में जुटे हों तो यह जानना दिलचस्प है कि रिश्तों की मिठास या खटास के लिए न्यूरोट्रांसमीटर और हार्मोन जिम्मेदार हैं। वैसे सेंट वेलेंटाइन भी प्रेमी जोड़ों को मिलाने के लिए याद किए जाते हैं। या यूं कहें कि न्यूरोट्रांसमीटर और हार्मोन शरीर में छुपे वे ‘संत’ हैं जो आपको आपके प्रियतम से मिलाते हैं। हां, अंतर इतना है कि रिश्ते टूटने के कारण भी ये ही हो सकते हैं। भविष्य के चिकित्सकों को तो इन हार्मोन के लव मेकिंग फिनोमिना पढ़ाया भी जा रहा है।

विज्ञापन


केस-1
इंजीनियरिंग स्टूडेंट को ‘स्टेटस सिंबल’ के लिए गर्ल फ्रेंड बनानी पड़ी। नजदीकियां बढ़ीं तो प्यार हो गया। मगर, ये क्या कुछ दिन बाद ही दोनों के बीच ब्रेक अप। पढ़ाई खत्म होने तक नए साथी भी चुन लिए। अब दोनों ही जॉब कर रहे हैं। अब इनके वेलेंटाइन साथ काम करने वाले साथी हैं।
विज्ञापन


केस-2
उनकी फील्ड अलग थी। एक बैंक में अधिकारी तो दूसरी चित्रकार। एक पेंटिंग प्रदर्शनी में मुलाकात हुई। बातें तो कम हुईं, एक-दूसरे में भविष्य की झलक ज्यादा देखी। कुछ और मुलाकातें। फिर लगा कि अलग रहना मुश्किल है। अब वर्षों से वे सुखी दाम्पत्य जी रहे हैं। लगाव जरा भी कम न हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन


कहते हैं कि प्यार तो पहली नजर में भी हो जाता है। पहले इसके इजहार में ही सालों लग जाते थे। अब यह इतना फटाफट है कि साल भर में ‘ब्रेकअप’ भी हो जाता है। दरअसल इन सब के पीछे हार्मोन और दूसरे मनोवैज्ञानिक कारक काम करते हैं।

एसएन मेडिकल कालेज के मनोचिकित्सक डॉ. विशाल सिन्हा के मुताबिक डोपामिन, गाबा और ग्लूटामेट न्यूरोट्रांसमीटर के सक्रिय होने पर निकलने वाले सेरेटोनिन, एंडोर्फिन, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन से खुशी और प्यार का अहसास होता है। ये किसी के पसंद आने का कारण ही नहीं होते बल्कि एक तरह से एक-दूसरे का आदी भी बना देते हैं। भावनात्मक बंधन की मजबूती के लिए भी यही हार्मोन जिम्मेदार होते हैं। यदि शरीर में इनका स्राव उचित मात्रा में है तो प्यार ताउम्र चलता-बढ़ता रहता है।

और तस्वीर का दूसरा पहलू
मनोचिकित्सक डॉ. यूसी गर्ग इसी तस्वीर का दूसरा पहलू समझाते हैं। उन्होंने बताया कि अब प्यार को नफा और नुकसान के तराजू पर तोला जा रहा है। एक तो युवा अपने प्यार के भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं तो दूसरे वे प्यार पर करियर को तवज्जो दे रहे हैं। इससे उन खास हार्मोन का स्राव प्रभावित होता है जो प्यार की डोर में बांधते हैं। हार्मोन में गड़बड़ी से ‘इमोशनल बॉडिंग’ (भावनात्मक बंधन) कमजोर हो रही है।


एक-दूसरे पर भरोसे की कमी
डॉ. गर्ग के मुताबिक समाज में हो रहे बदलाव, टीवी और फिल्मों में बेवफाई के चित्रण का असर भी लोगों पर पड़ने लगा है। अपने पार्टनर पर वो भरोसा न होने से भी भावनाओं से संबंधी हार्मोन का बैलेंस बिगड़ता है। जरा-जरा सी बात पर ब्रेकअप इसी का नतीजा हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed