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कांठ बवाल: मुरादाबाद में हाई वोल्टेज सियासी ड्रामा

Sun, 27 Jul 2014 08:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद Updated Sun, 27 Jul 2014 08:35 AM IST
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high voltage political drama in kanth

पूर्व घोषणा के मुताबिक पुलिस प्रशासन के तमाम इंतजाम, प्रतिबंध और बैरिकेडिंग को तोड़ते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी सात विधायकों और दो सांसदों के साथ मुरादाबाद में घुसने में कामयाब रहे। ऐलान के मुताबिक भाजपा ने एसएसपी धर्मवीर यादव के खिलाफ कांठ थाने में तहरीर दी और लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने सांसद, विधायकों के साथ डीएम आवास पर तीन घंटा धरना भी दिया। तहरीर देने के लिए भाजपा के दो विधायक दीवार फांदकर थाने में घुसे। इस बीच कांठ आने की कोशिश कर रहे भाजपा के पांच सांसदों को सिंभावली में रोक लिया गया जबकि अमरोहा सांसद गजरौला में ही नजरबंद कर लिए गए।

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भाजपा के कांठ कूच को प्रतिबंधित कर चुके जिला प्रशासन ने भाजपा नेताओं की मुरादाबाद में एंट्री रोकने के लिए पुख्ता बंदोबस्त किए थे। कांठ तो शुक्रवार रात से ही छावनी में तब्दील था लेकिन इन सबके बावजूद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी शुक्रवार रात को दो बजे मुरादाबाद पहुंच गए। सुबह ठीक दस बजे चार विधायकों और एक सांसद के साथ डीएम आवास पर धरने पर बैठ गए।
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इधर, साढ़े ग्यारह बजे पुलिस, पीएसी और एसएसबी के सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए शामली विधायक सुरेश राणा और नूरपुर विधायक लोकेंद्र चौहान ने दीवार फांदकर कांठ थाने में घुस गए। जब थाने में बैठे डीएम एसएसपी के सामने तहरीर बढ़ाई तो सुरक्षा किले में बेफिक्री से बैठे अफसर हैरान रह गए। सीओ कांठ ने तहरीर रिसीव की और विधायकों को हिरासत में लेकर मुरादाबाद भेज दिया। इसके बाद भाजपा के मेरठ विधायक रवींद्र भड़ाना और व्यापार मोर्चा के प्रदेश संयोजक विनीत शारदा भी कांठ थाने पहुंचे।

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कांठ बवाल में पब्लिक को नुकसान

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कांठ पर चल रहे घमासान से पूरा मंडल पिछले एक माह से प्रभावित है। नेता और अफसर भले ही रिलैक्स हों लेकिन पब्लिक पर यह तनाव भारी गुजर रहा है। पहले 27 जून का बवाल, फिर चार जुलाई का उपद्रव और अब 26 जुलाई को कांठ कूच और शांति मार्च का ऐलान। कुछ घंटों में भाजपा और कांग्रेस का आंदोलन तो निपट गया लेकिन इसके शोर की व्यापकता ने कई मरीजों को घर में रोके रखा। तमाम ने अपनी यात्रा रद्द् कर दी और जो लोग घर से निकले उनके मन में दहशत भरी हुई थी। कुल मिलाकर तीन घंटे चले सियासत के शो में नुकसान पब्लिक का हुआ।

भाजपा ने ऐलान किया था कि एसएसपी के खिलाफ कांठ थाने में तहरीर दी जाएगी और यह तहरीर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सांसद लेकर पहुंचेंगे। प्रशासन ने अनुमति देने से इनकार किया तो भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने ऐलान किया कि हर हाल में कांठ पहुंचेंगे भाजपाई। अभी भाजपा से प्रशासन निपटने की रणनीति बना रहा था तभी कांग्रेस ने इसी दिन शांति मार्च निकालने का ऐलान कर दिया। अखबारों में बयानबाजी होने लगी तो जिले का माहौल गरमाता दिखने लगा। सावन में कांवडियों की भीड़ और रमजान माह की संवेदनशीलता को देखते हुए यह दोनों कार्यक्रम ही लोगों के दिलों में डर पैदा करने लगे।

इसी बीच शनिवार को भाजपा और कांग्रेस का आंदोलन शुरू भी नहीं हुआ था कि सहारनपुर में कर्फ्यू लग गया। मीडिया लगातार सहारनपुर, कांठ पर ब्रेकिंग न्यूज दिखाने लगी और लोग सहमते गए जबकि भाजपा का कार्यक्रम पहले से तय था। लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कांठ जाने की कोशिश नहीं की। सीधे डीएम आवास पर पहुंच गए। उन्होंने कहा भी उनका ऐलान कूच का नहीं था बल्कि तहरीर देनी थी। इसलिए ही प्रशासन को किसी को गिरफ्तार तक करने की जरूरत नहीं पड़ी। यही हाल कांग्रेस के प्रदर्शनकारियों का भी था। शांति मार्च का ऐलान करने वाले निकले तो लेकिन अधूरे मन से। पुलिस लाइन तक तो आधे भी नहीं पहुंचे। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी लंबे समय तक एक कांग्रेसी नेता के घर बैठी रहीं। फिर रोके जाने का नाटक और फिर उन्हें भी दोपहर में ही पुलिस लाइन से छोड़ दिया गया।

कांठ जाते भाजपा सांसद और विधायक को रोका

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प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर कांठ कूंच करते आंवला से भाजपा सांसद और बरेली के विधायक को मिलक में रोक लिया गया। सांसद और विधायक को पहले कोतवाली और बाद में निरीक्षण भवन ले जाया गया। इस दौरान स्थानीय भाजपाई भी पहुंच गए। बाद में सांसद और विधायक को बरेली वापस भेज दिया गया। आंवला संसदीय क्षेत्र से भाजपा सांसद धमेंद्र कश्यप और बरेली के शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार सक्सेना कार से कांठ के लिए रवाना हुए। बरेली की सीमा पार कर मिलक पहुंचते ही कोतवाली गेट पर उन्हें रोक लिया गया। पुलिस उन्हें कोतवाली ले गई। उपजिलाधिकारी अली हसन कर्नी और सीओ डॉ. तेजवीर सिंह भी कोतवाली पहुंच गए। सांसद और विधायक काफी देर कोतवाली में ही बैठे रहे।

पुलिस को चकमा देकर कांठ पहुंचे विधायक सुरेश राणा
कड़ी चौकसी के बावजूद थाना भवन विधायक सुरेश राणा पुलिस को चकमा देकर कांठ पहुंच गए। राणा ने दावा किया कि कांठ में एक नलकूप पर शुक्रवार की रात काटी। विधायक राणा ने फोन पर हुई वार्ता के दौरान दावा किया है कि शनिवार को चौतरफा घेराबंदी के बावजूद थाने पहुंचकर वहां कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज के मामले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ थाने में तहरीर दे दी है। इसके बाद, पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर मुरादाबाद पुलिस लाइन ले गई।

नूरबानो समेत 137 कांग्रेसी गिरफ्तार

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मुरादाबाद में कांग्रेस ने शनिवार को पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी के नेतृत्व में ऐलान के मुताबिक शांति मार्च निकालने का प्रयास किया लेकिन प्रशासन की मुस्तैदी के चलते इसे नाकाम कर दिया गया। शांति मार्च निकालने के लिए कूच कर रहे कांग्रेसियों को पुलिस ने दफ्तर से निकलने के बाद ही गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं को पुलिस लाइन ले जाया गया। करीब तीन घंटे बाद निजी मुचलकों पर छोड़ दिया गया। कांग्रेसियों का दावा है कि करीब तीन सौ कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी दी जबकि पुलिस का कहना था कि 137 कार्यकर्ता गिरफ्तार किए गए थे।

कांग्रेस ने शनिवार को कांठ में शांति मार्च निकाले जाने की घोषणा की थी लेकिन मुरादाबाद प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी थी। कांग्रेसियों को जहां-तहां रोकने की तैयारी थी। कांग्रेसी भी कांठ कूच करने पर अड़े हुए थे। प्रस्तावित कार्यक्रम के मुताबिक कार्यकर्ता पार्टी के जिला दफ्तर पर एकत्र हुए। यहां से पूर्व सांसद बेगम नूरबानो के नेतृत्व में जुलूस निकाला गया। जुलूस नवाब गेट होता हुआ जब गांधी समाधि पर पहुंचा तो कांग्रेसियों को पुलिस ने रोक लिया। कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। इसके बाद पुलिस ने सभी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन भेज दिया। करीब तीन घंटे के  बाद पुलिस प्रशासन ने गिरफ्तार कि ए गए कांग्रेसियों को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया।

उधर, रामपुर में कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और विधायक संजय कपूर कांठ के लिए कूच कर रहे थे। उनको कोसी पुल पर रोक लिया गया। इसके बाद उनको भी पुलिस लाइन भेज दिया गया। विधायक को पुलिस ने निजी मुचलके पर छोड़ दिया। विधायक संजय कपूर, जिलाध्यक्ष दिलबाग सिंह, मुतीउर्रहमान खां बब्लू, डा. तनवीर अहमद आदि मौजूद थे।

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