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हेमराज के परिवार ने मांगा मुआवजा
आशुतोष मिश्र/ सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 10 Dec 2013 08:40 PM IST
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देश की चर्चित मर्डर मिस्ट्री आरुषि हत्याकांड में फैसले का इंतजार सीमा पार नेपाल में भी था। तलवार दंपति को कोर्ट ने सजा सुनाई तो नेपाल के अर्घाखांची जिले में भी खुशी के आंसू छलके।
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यहीं का रहने वाला हेमराज आरुषि के साथ मौत के घाट उतार दिया गया था। फैसले के बाद हेमराज का परिवार न्याय की अनुभूति कर रहा है, मगर अब क्षतिपूर्ति की आवाज उठाकर भारत सरकार से पूरा इंसाफ चाह रहा है।
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हेमराज की 46 वर्षीय पत्नी खुमकला कहती हैं कि खेती से तीन महीने भी घर का खर्च नहीं चल सकता। पिछले पांच साल से मायके के सहारे परिवार की गाड़ी चल रही है।
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सास बीमार हैं, बेटा दिल का रोगी हो गया है। परिवार के साथ हुए अन्याय पर न्यायालय ने न्याय सुना दिया है, मगर अब भारत सरकार को क्षतिपूर्ति देकर परिवार के साथ पूरा इंसाफ करना चाहिए।
हेमराज का बेटा प्रज्ज्वल 11वीं का छात्र है। बताता है कि पिता की हत्या के बाद अखिल नेपाल-भारत एकता समाज की ओर से 50 हजार रुपये का सहयोग मिला था, मगर उसके बाद से कुछ नहीं मिला। हेमराज की मां कृष्णकला कहती हैं बेटे की मौत के पहले तक सब ठीक चल रहा था। दिल्ली से हर महीने वह घर खर्च के लिए पांच-छह हजार रुपये भेज दिया करता था। उसकी मौत के बाद दो जून की रोटी का इंतजाम भी मुश्किल हो गया है।
पहले हत्यारोपी बना नेपाली कामगार
राजेश तलवार के नौकर कृष्णा, राजकुमार और विजय मंडल इस मामले में पहले पुलिस टीम की गिरफ्त में आए। शुरुआती जांच में इनकी भूमिका संदिग्ध मानते हुए यूपी पुलिस समेत सीबीआई ने इन्हें हिरासत में रखा। नार्को, ब्रेनमैपिंग और पॉलिग्राफ टेस्ट हुए। इसके बाद इन्हें निर्दोष माना गया। राजकुमार सीमा से सटे कपिलवस्तु जिले का रहने वाला है। भारत-नेपाल मैत्री संघ का कहना है कि निर्दोष और संरक्षणविहीन नेपाली कामगार राजकुमार और हेमराज के परिवार को प्रताड़ना के जिस दौर से गुजरना पड़ा, उसकी क्षतिपूर्ति भारत सरकार की ओर से दी जानी चाहिए।