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वाद-विवाद प्रतियोगिता में जुल्फिकार व आबेक जीते
अमर उजाला, हाथरस
Updated Thu, 29 Dec 2016 11:33 PM IST
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पुलिस लाइन में वाद-विवाद प्रतियोगिता में मंचासीन अधिकारीगण।
- फोटो : अमर उजाला
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पुलिस अधीक्षक दिलीप कुमार श्रीवास्तव के निर्देश पर पुलिस लाइन के मनोरंजन कक्ष में मानवाधिकार संरक्षण व पुलिस कार्य प्रणाली के मध्य सामंजस्य स्थापित हो सकता है, विषय पर जिला स्तरीय वाद विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
प्रतियोगिता में जनपद भर के पुलिस कर्मियों ने पक्ष और विपक्ष में अपने विचार व्यक्त किए। मंचासीन मुख्य अतिथि एडीजे आरके बंसल, एसडीएम सदर राकेश गुप्ता, सीओ सिटी आरके गौतम का आरआई गंगासरन द्वारा स्वागत किया गया।
प्रतियोगिता में पुलिस कर्मियों ने कहा कि मानवाधिकार आवश्यक तो है, लेकिन मानवाधिकारों का कई बार लोग दुरुपयोग करते हैं और पुलिस पर गलत आरोप लगाते हैं, लेकिन जब भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस कर्मी हल्का बल प्रयोग कर देते है तो मीडियाकर्मी इन घटनाओं को इस तरह से पेश करते हंै कि संबंधित पुलिस कर्मी दोषी न होने के बाद भी उसे दोषी करार दे दिया जाता है।
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पक्ष और विपक्ष में अपने विचार व्यक्त करने वाले पुलिस कर्मियों ने यह स्वीकार किया कि पुलिस ज्यादती करती है, लेकिन पुलिस की मजबूरी होती है। जनपद भर से शामिल हुए पुलिस कर्मियों में से प्रतियोगिता के पक्ष पर बोलने वाले कांस्टेबिल जुल्फिकार और विपक्ष में बोलने वाले कांस्टेबल आबेक कुमार ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
एडीजे आरके बंसल द्वारा दोनों को पुरस्कृत किया गया। निर्णायक मंडल में एडीजे आरके बंसल के अलावा एसडीएम सदर राकेश कुमार गुप्ता, सीओ सिटी आरके गौतम शामिल थे। प्रतियोगिता में एसआई मोहित राणा, अमरपाल, विश्ववीर, संजीव कुमार, अमित कुमार, संदीप कुमार, दिलशाद अहमद, विकास पाल, दिनेश कुमार, कार्तिक शर्मा, अजय कुमार, विजयपाल, कुमकुम, प्रीती, दीपक कुमार, अवधेश कुमार, भगवती प्रसाद, मधू सिंह शामिल हुए।
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प्रतियोगिता में जनपद भर के पुलिस कर्मियों ने पक्ष और विपक्ष में अपने विचार व्यक्त किए। मंचासीन मुख्य अतिथि एडीजे आरके बंसल, एसडीएम सदर राकेश गुप्ता, सीओ सिटी आरके गौतम का आरआई गंगासरन द्वारा स्वागत किया गया।
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प्रतियोगिता में पुलिस कर्मियों ने कहा कि मानवाधिकार आवश्यक तो है, लेकिन मानवाधिकारों का कई बार लोग दुरुपयोग करते हैं और पुलिस पर गलत आरोप लगाते हैं, लेकिन जब भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस कर्मी हल्का बल प्रयोग कर देते है तो मीडियाकर्मी इन घटनाओं को इस तरह से पेश करते हंै कि संबंधित पुलिस कर्मी दोषी न होने के बाद भी उसे दोषी करार दे दिया जाता है।
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पक्ष और विपक्ष में अपने विचार व्यक्त करने वाले पुलिस कर्मियों ने यह स्वीकार किया कि पुलिस ज्यादती करती है, लेकिन पुलिस की मजबूरी होती है। जनपद भर से शामिल हुए पुलिस कर्मियों में से प्रतियोगिता के पक्ष पर बोलने वाले कांस्टेबिल जुल्फिकार और विपक्ष में बोलने वाले कांस्टेबल आबेक कुमार ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
एडीजे आरके बंसल द्वारा दोनों को पुरस्कृत किया गया। निर्णायक मंडल में एडीजे आरके बंसल के अलावा एसडीएम सदर राकेश कुमार गुप्ता, सीओ सिटी आरके गौतम शामिल थे। प्रतियोगिता में एसआई मोहित राणा, अमरपाल, विश्ववीर, संजीव कुमार, अमित कुमार, संदीप कुमार, दिलशाद अहमद, विकास पाल, दिनेश कुमार, कार्तिक शर्मा, अजय कुमार, विजयपाल, कुमकुम, प्रीती, दीपक कुमार, अवधेश कुमार, भगवती प्रसाद, मधू सिंह शामिल हुए।