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खंभों से झूल रहे जर्जर तार, क्या किसी दुर्घटना का है इंतजार
Sun, 30 Jun 2019 12:39 AM IST
Mohd Rafeek
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
Published by: Mohd Rafeek
Updated Sun, 30 Jun 2019 12:39 AM IST
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शहर में एक विद्युत खंभे पर जर्जर तारों का बना जाल।
- फोटो : अमर उजाला
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हाथरस। बिजली विभाग के अधिकारी बिलिंग पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, लेकिन जर्जर लाइनों दुरुस्त करने व उनके रखरखाव पर कतई ध्यान नहीं दे रहे हैं। इस कारण जिले भर में जर्जर लाइनें झूल रहीं है। अप्रिय घटना को न्योता दे रही है। लोगों को बिजली संकट से जूझना पड़ रहा है, क्योंकि जनवरी से लाइन मरम्मत और अन्य किसी काम का टेंडर नहीं हुआ है। इस कारण हालात जस के तस बने हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि जिले के 62 बिजलीघरों के जरिए करीब डेढ़ लाख लोगों को बिजली सप्लाई दी जाती है। करीब चार साल पहले शहर से देहात बंच कंडक्टर लाइन डाली गई थी, ताकि बिजली चोरी रुके, लेकिन समय के साथ लाइनें जर्जर हो गई हैं। साथ ही पोल भी नीचे से क्षतिग्रस्त हो गए। कई जगह पर बिजली पोल हादसों को न्योता दे रहे हैं। कई बार लोगों ने विभागीय अधिकारियों से लाइन और पोल सही कराने मांग की। आज तक उपभोक्ताओं को निराशा हाथ लगी है, क्योंकि जनवरी और फरवरी में मरम्मत व अन्य कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया नहीं हुई, फिर उसके बाद आचार संहिता लागू हो गई।
इस कारण काम नहीं हो सके। वर्तमान में शहर, देहात और कस्बों में समस्याओं का अंबार है। विभागीय अधिकारी समस्या को दूर करने की बजाय एस्टीमेट मुख्य अभियंता ऑफिस से पास होने की बात कहकर इतिश्री कर देते हैं। इस कारण लोगों आए दिन बिजली किल्लत से जूझना पड़ रहा है। इस मामले में अधीक्षण अभियंता संदीप अग्रवाल का कहना है कि टेंडर जनवरी से नहीं हुए है। मैं अभी आया हूं। इस बारे में कुछ नहीं पता है, लेकिन अब जल्द कार्यों के टेंडर कराए जाएंगे। लाइनों को दुरस्त कराया जाएगा।
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उल्लेखनीय है कि जिले के 62 बिजलीघरों के जरिए करीब डेढ़ लाख लोगों को बिजली सप्लाई दी जाती है। करीब चार साल पहले शहर से देहात बंच कंडक्टर लाइन डाली गई थी, ताकि बिजली चोरी रुके, लेकिन समय के साथ लाइनें जर्जर हो गई हैं। साथ ही पोल भी नीचे से क्षतिग्रस्त हो गए। कई जगह पर बिजली पोल हादसों को न्योता दे रहे हैं। कई बार लोगों ने विभागीय अधिकारियों से लाइन और पोल सही कराने मांग की। आज तक उपभोक्ताओं को निराशा हाथ लगी है, क्योंकि जनवरी और फरवरी में मरम्मत व अन्य कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया नहीं हुई, फिर उसके बाद आचार संहिता लागू हो गई।
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इस कारण काम नहीं हो सके। वर्तमान में शहर, देहात और कस्बों में समस्याओं का अंबार है। विभागीय अधिकारी समस्या को दूर करने की बजाय एस्टीमेट मुख्य अभियंता ऑफिस से पास होने की बात कहकर इतिश्री कर देते हैं। इस कारण लोगों आए दिन बिजली किल्लत से जूझना पड़ रहा है। इस मामले में अधीक्षण अभियंता संदीप अग्रवाल का कहना है कि टेंडर जनवरी से नहीं हुए है। मैं अभी आया हूं। इस बारे में कुछ नहीं पता है, लेकिन अब जल्द कार्यों के टेंडर कराए जाएंगे। लाइनों को दुरस्त कराया जाएगा।
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