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घर पर ही होगी मलेरिया रोगियों की जांच
अमर उजाला, हाथरस
Updated Mon, 27 Feb 2017 11:33 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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अगर आप मलेरिया से पीड़ित हैं, या होने की संभावना है तो आप गांव की आशा को आवाज दे सकते हैं। मलेरिया है या नहीं, इसकी जानकारी जल्द ही आपको हो जाएगी। शासन के निर्देश पर अब मलेरिया की जांच स्वास्थ्य विभाग की आशा कार्यकत्री मरीज के घर पर ही करेंगी और स्लाइड भी बनाएंगी।
इसके लिए विभाग ने आशाओं को प्रशिक्षित भी कर दिया है। पिछले दिनों हसायन, सासनी, मुरसान, सादाबाद, सहपऊ और महौ के स्वास्थ्य केंद्रों पर हुए प्रशिक्षण में आशाओं को चिकित्सकों ने बुखार और मलेरिया रोगियों की जांच और स्लाइड बनाने का तौर तरीका सिखाया था।
आशाओं को बताया गया कि जब भी वह मलेरिया की जांच करें तो पूरी तरह से सावधानी बरतें। जांच के लिए आशाओं को किट भी प्रदान की गई हैं, जिसमें स्लाइड तैयार करने के सारे सामान हैं। मलेरिया की बढ़ती बीमारी और अस्पतालों में जुटती भीड़ को देखकर शासन ने यह अहम जिम्मेदारी आशाओं को सौंपी है।
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यह रहेगी स्लाइड बनाने से लेकर उपचार की प्रक्रिया
आशा कार्यकत्री स्लाइड को जांच के लिए नजदीक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के एलटी को देंगी। यदि जांच के दौरान मलेरिया की पुष्टि होती है तो पीड़ित का इलाज कराया जाएगा। इलाज में आशाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। आशाएं मलेरिया रोगियों को क्लोरोक्वीन की गोलियां मरीज की उम्र के अनुसार देंगी। उन्हें बताया गया है कि दस साल पर तीन गोली, आठ साल पर दो, चार साल पर एक और एक साल तक आधी गोली देनी है। अगर मरीज को बुखार चढ़ रहा है तो यह गोली नहीं खिलाई जाएगी।
स्लाइड के 15 और दवा के कोर्स पर मिलेंगे 15 रुपये
ऐसा नहीं कि आशाओं को स्लाइड बनाने के एवज में कुछ नहीं मिलेगा। शासन स्तर से एक आशा को प्रति स्लाइड 15 रुपये देने की व्यवस्था भी की गई है। यदि आशा मलेरिया रोगी को दवा का पूरा कोर्स कराती है तो उसे 75 रुपये मिलेंगे।
जिलेभर की सभी आशाओं को जिला मलेरिया विभाग के अधिकारियों द्वारा स्लाइड बनाने का प्रशिक्षण प्रदान कर दिया गया है। अब बुखार एवं मलेरिया रोगियों की जांच मरीज के घर पर गांव की आशा ही कर सकेंगी। रोगियों को अस्पतालों तक भटकने की आवश्यकता नहीं होगी।
- डॉ. रामवीर सिंह, सीएमओ, हाथरस।
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इसके लिए विभाग ने आशाओं को प्रशिक्षित भी कर दिया है। पिछले दिनों हसायन, सासनी, मुरसान, सादाबाद, सहपऊ और महौ के स्वास्थ्य केंद्रों पर हुए प्रशिक्षण में आशाओं को चिकित्सकों ने बुखार और मलेरिया रोगियों की जांच और स्लाइड बनाने का तौर तरीका सिखाया था।
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आशाओं को बताया गया कि जब भी वह मलेरिया की जांच करें तो पूरी तरह से सावधानी बरतें। जांच के लिए आशाओं को किट भी प्रदान की गई हैं, जिसमें स्लाइड तैयार करने के सारे सामान हैं। मलेरिया की बढ़ती बीमारी और अस्पतालों में जुटती भीड़ को देखकर शासन ने यह अहम जिम्मेदारी आशाओं को सौंपी है।
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यह रहेगी स्लाइड बनाने से लेकर उपचार की प्रक्रिया
आशा कार्यकत्री स्लाइड को जांच के लिए नजदीक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के एलटी को देंगी। यदि जांच के दौरान मलेरिया की पुष्टि होती है तो पीड़ित का इलाज कराया जाएगा। इलाज में आशाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। आशाएं मलेरिया रोगियों को क्लोरोक्वीन की गोलियां मरीज की उम्र के अनुसार देंगी। उन्हें बताया गया है कि दस साल पर तीन गोली, आठ साल पर दो, चार साल पर एक और एक साल तक आधी गोली देनी है। अगर मरीज को बुखार चढ़ रहा है तो यह गोली नहीं खिलाई जाएगी।
स्लाइड के 15 और दवा के कोर्स पर मिलेंगे 15 रुपये
ऐसा नहीं कि आशाओं को स्लाइड बनाने के एवज में कुछ नहीं मिलेगा। शासन स्तर से एक आशा को प्रति स्लाइड 15 रुपये देने की व्यवस्था भी की गई है। यदि आशा मलेरिया रोगी को दवा का पूरा कोर्स कराती है तो उसे 75 रुपये मिलेंगे।
जिलेभर की सभी आशाओं को जिला मलेरिया विभाग के अधिकारियों द्वारा स्लाइड बनाने का प्रशिक्षण प्रदान कर दिया गया है। अब बुखार एवं मलेरिया रोगियों की जांच मरीज के घर पर गांव की आशा ही कर सकेंगी। रोगियों को अस्पतालों तक भटकने की आवश्यकता नहीं होगी।
- डॉ. रामवीर सिंह, सीएमओ, हाथरस।