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जंगलों में प्यासा भटक रहा है सफेद हिरन
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 03 May 2016 12:26 AM IST
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जंगलों में प्यासा भटक रहा है सफेद हिरन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो हाथरस
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नासिर हुसैन
अलीगढ़ / हाथरस। हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले सफेद हिरन अलीगढ़ मंडल के जंगलों में-यह सुनने में जरूर अटपटा लगे, पर है सोला आने सच। इस दुर्लभ प्रजाति के करीब चार सफेद हिरन इनदिनों मंडल के सिकंदराराऊ के एचोला सहाददपुर गांव के जंगलों में पानी और चारे के लिए भटक रहे हैं। अमर उजाला के कैमरे ने सोमवार को उन्हें सामान्य हिरनों के साथ भटकते कैद कर लिया। गांव वालों की मानें तो पानी और भोजन की लालच में वह अक्सर भटक कर उनके घरों के करीब आ जाते हैं। दूसरी तरफ वन अधिकारियों को इलाके में सफेद हिरन होने की जानकारी भी नहीं है।
सफेद हिरन को हिमालयन मुस्क डियर के नाम से भी जाना जाता है। इनकी इलाके के जंगल में मौजूदगी हैरान करने वाली है। सहाददपुर गांव के रामपाल और रामप्रसाद ने बताया कि जब से इलाके में पानी की किल्लत हुई है, सामान्य हिरनों के झुंड में अक्सर सफेद हिरन दिख जाते हैं। जंगल में हिरनों के लिए बनाए गए अस्थाई तालाब सूखे हुए हैं। इसके चलते उन्हें हरा चारा भी नसीब नहीं हो रहा है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पानी और चारे का बजट अभी महकमा की ओर से उपलब्ध नहीं कराया गया है इसलिए हिरनों के खाने-पीने का इंतजाम नहीं हो पा रहा है।
दिनभर प्यासे रहकर रात को पीते हैं पानी
ग्रामीणाें ने बताया कि जंगल में पानी नहीं होने से हिरन रात को भटकते हुए गांव में आ जाते हैं। खेत में पंप आदि से पानी पीते हैं। डर के चलते दिन में जंगल से बाहर नहीं आते। रात को खेतों में हरा चारा, पानी आदि ग्रहण करने के बाद लौट जाते हैं।
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अधिकारियों को नहीं मालूम सफेद हिरन भी है
सहाददपुर के जंगलों में काले हिरन के साथ दुर्लभ सफेद हिरन भी हैं इस बारे में डीएफओ एके कश्यप को जानकारी नहीं है। इस बारे में पूछने पर उन्हाेंने आश्चर्य जताया। उन्हाेंने कहा कि वर्ष 2013 में हिरनों की गणना कराई गई थी तब भी इसकी जानकारी नहीं मिली थी।
यह है सफेद हिरन की खासियत
सफेद हिरन को हिमालयन मुस्क डियर कहा जाता है। विदेशों में इसे व्हाइट बेलिड डियर से भी जाना जाता है। इंटरनेट की जानकारियों पर भरोसा करें तो सफेद हिरन के अंगों एवं मांस की मांग परफ्यूम, इत्र और दवाई बनाने के लिए अत्याधिक है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसके मांस की कीमत हजारों अमेरिकी डालर प्रति किलो है। देश में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में सफेद हिरन पाए जाते हैं।
हिरनों के लिए पानी की व्वस्था के संबंध में प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। बजट आते ही इसका इंतजाम कर दिया जाएगा। वैसे हरे चारे का कोई प्रस्ताव अभी नहीं है। सफेद हिरन के बारे में जांच से पहले हम कुछ नहीं कह सकतें। एके कश्यप, डीएफओ, हाथरस
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अलीगढ़ / हाथरस। हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले सफेद हिरन अलीगढ़ मंडल के जंगलों में-यह सुनने में जरूर अटपटा लगे, पर है सोला आने सच। इस दुर्लभ प्रजाति के करीब चार सफेद हिरन इनदिनों मंडल के सिकंदराराऊ के एचोला सहाददपुर गांव के जंगलों में पानी और चारे के लिए भटक रहे हैं। अमर उजाला के कैमरे ने सोमवार को उन्हें सामान्य हिरनों के साथ भटकते कैद कर लिया। गांव वालों की मानें तो पानी और भोजन की लालच में वह अक्सर भटक कर उनके घरों के करीब आ जाते हैं। दूसरी तरफ वन अधिकारियों को इलाके में सफेद हिरन होने की जानकारी भी नहीं है।
सफेद हिरन को हिमालयन मुस्क डियर के नाम से भी जाना जाता है। इनकी इलाके के जंगल में मौजूदगी हैरान करने वाली है। सहाददपुर गांव के रामपाल और रामप्रसाद ने बताया कि जब से इलाके में पानी की किल्लत हुई है, सामान्य हिरनों के झुंड में अक्सर सफेद हिरन दिख जाते हैं। जंगल में हिरनों के लिए बनाए गए अस्थाई तालाब सूखे हुए हैं। इसके चलते उन्हें हरा चारा भी नसीब नहीं हो रहा है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पानी और चारे का बजट अभी महकमा की ओर से उपलब्ध नहीं कराया गया है इसलिए हिरनों के खाने-पीने का इंतजाम नहीं हो पा रहा है।
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दिनभर प्यासे रहकर रात को पीते हैं पानी
ग्रामीणाें ने बताया कि जंगल में पानी नहीं होने से हिरन रात को भटकते हुए गांव में आ जाते हैं। खेत में पंप आदि से पानी पीते हैं। डर के चलते दिन में जंगल से बाहर नहीं आते। रात को खेतों में हरा चारा, पानी आदि ग्रहण करने के बाद लौट जाते हैं।
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अधिकारियों को नहीं मालूम सफेद हिरन भी है
सहाददपुर के जंगलों में काले हिरन के साथ दुर्लभ सफेद हिरन भी हैं इस बारे में डीएफओ एके कश्यप को जानकारी नहीं है। इस बारे में पूछने पर उन्हाेंने आश्चर्य जताया। उन्हाेंने कहा कि वर्ष 2013 में हिरनों की गणना कराई गई थी तब भी इसकी जानकारी नहीं मिली थी।
यह है सफेद हिरन की खासियत
सफेद हिरन को हिमालयन मुस्क डियर कहा जाता है। विदेशों में इसे व्हाइट बेलिड डियर से भी जाना जाता है। इंटरनेट की जानकारियों पर भरोसा करें तो सफेद हिरन के अंगों एवं मांस की मांग परफ्यूम, इत्र और दवाई बनाने के लिए अत्याधिक है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसके मांस की कीमत हजारों अमेरिकी डालर प्रति किलो है। देश में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में सफेद हिरन पाए जाते हैं।
हिरनों के लिए पानी की व्वस्था के संबंध में प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। बजट आते ही इसका इंतजाम कर दिया जाएगा। वैसे हरे चारे का कोई प्रस्ताव अभी नहीं है। सफेद हिरन के बारे में जांच से पहले हम कुछ नहीं कह सकतें। एके कश्यप, डीएफओ, हाथरस